Study Material  कक्षा 6 –  अध्याय 14 : हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ | Economic Activities Around Us

Study Material  कक्षा 6 –  अध्याय 14 : हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ | Economic Activities Around Us

आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ सारांश

“हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ” अध्याय में यह बताया गया है कि हमारे दैनिक जीवन में होने वाले विभिन्न कार्य किस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े होते हैं। इस अध्याय में प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक और तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियों, उनके महत्व तथा एक-दूसरे पर उनकी निर्भरता को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। साथ ही अमूल सहकारी संगठन की सफलता की कहानी के माध्यम से सहकारिता (Cooperative) की शक्ति को भी स्पष्ट किया गया है।

अध्याय की शुरुआत गुजरात के आणंद में रहने वाले दुग्ध उत्पादक किसानों की कहानी से होती है। पहले किसान अपना दूध बिचौलियों को बेचते थे, जिसके कारण उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। बिचौलिए अधिक लाभ कमाते थे, जबकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिलता था। अपनी इस समस्या को लेकर किसान सरदार वल्लभभाई पटेल के पास पहुँचे। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मिलकर एक सहकारी संगठन बनाएँ और स्वयं दूध का संग्रह, प्रसंस्करण तथा बिक्री करें। इससे वे बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे और उन्हें अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा।

सरदार पटेल की सलाह पर किसानों ने 1946 में अमूल सहकारी संस्था की स्थापना की। इस कार्य में त्रिभुवन दास पटेल तथा डॉ. वर्गीज़ कुरियन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अमूल की स्थापना के बाद किसानों ने मिलकर दूध का उत्पादन, संग्रह, पाश्चुरीकरण, प्रसंस्करण और बिक्री का कार्य शुरू किया। इस व्यवस्था से किसानों की आय बढ़ी, महिलाओं को रोजगार मिला और ग्रामीण क्षेत्रों का आर्थिक विकास हुआ। अमूल सहकारिता का एक सफल उदाहरण बन गया।

अध्याय में सहकारी संगठन (Cooperative Society) का अर्थ भी समझाया गया है। सहकारी संगठन वह संस्था होती है जिसमें लोग अपनी इच्छा से एक साथ मिलकर अपनी आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं। इसमें सभी सदस्य संगठन के मालिक होते हैं और सभी निर्णय सामूहिक रूप से लिए जाते हैं। इससे समानता, सहयोग और लोकतांत्रिक भावना का विकास होता है।

इसके बाद अध्याय में प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector) का परिचय दिया गया है। प्राथमिक क्षेत्रक में वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ आती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी होती हैं। जैसे—कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी और दुग्ध उत्पादन। अमूल के उदाहरण में किसानों द्वारा गायों से दूध प्राप्त करना प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि है, क्योंकि दूध सीधे प्राकृतिक स्रोत (पशु) से प्राप्त होता है।

इसके बाद दूध को कारखानों में ले जाकर उसका पाश्चुरीकरण (Pasteurization) किया जाता है और उससे घी, मक्खन, पनीर, दूध पाउडर, दही तथा अन्य दुग्ध उत्पाद बनाए जाते हैं। किसी कच्चे पदार्थ को उपयोगी वस्तु में बदलने का कार्य द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector) कहलाता है। इसमें उद्योग और कारखाने प्रमुख भूमिका निभाते हैं। अमूल के डेयरी कारखाने इसी क्षेत्रक का उदाहरण हैं।

जब तैयार उत्पादों को ट्रक, रेल, हवाई जहाज आदि के माध्यम से विभिन्न स्थानों तक पहुँचाया जाता है, उनका विपणन (Marketing) किया जाता है और दुकानों में ग्राहकों को बेचा जाता है, तब ये गतिविधियाँ तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary Sector) में आती हैं। इस क्षेत्र में परिवहन, संचार, बैंकिंग, व्यापार, भंडारण, बीमा तथा खुदरा बिक्री जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं। इस प्रकार तृतीयक क्षेत्रक उपभोक्ताओं तक वस्तुएँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अध्याय में यह विशेष रूप से बताया गया है कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं। यदि किसान दूध न पैदा करें, तो कारखाने बंद हो जाएँगे। यदि कारखाने दूध का प्रसंस्करण न करें, तो बाजार में दूध से बने उत्पाद उपलब्ध नहीं होंगे। यदि परिवहन और व्यापार की व्यवस्था न हो, तो तैयार उत्पाद ग्राहकों तक नहीं पहुँच पाएँगे। इसलिए किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए तीनों क्षेत्रकों का मिलकर कार्य करना आवश्यक है।

इसके बाद अध्याय में पाठ्यपुस्तक के निर्माण का उदाहरण देकर भी तीनों क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता समझाई गई है। सबसे पहले पेड़ों से लकड़ी प्राप्त की जाती है, जो प्राथमिक क्षेत्रक का कार्य है। फिर लकड़ी से कागज बनाया जाता है और उस पर छपाई करके पुस्तक तैयार की जाती है, जो द्वितीयक क्षेत्रक का कार्य है। इसके बाद तैयार पुस्तकों को गोदामों, दुकानों और विद्यालयों तक पहुँचाया जाता है, जो तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधि है। इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि किसी एक वस्तु के निर्माण में अनेक आर्थिक गतिविधियाँ जुड़ी होती हैं।

अध्याय में कागज के पुनर्चक्रण (Recycling) का महत्व भी बताया गया है। उपयोग किए गए कागज को पुनः संसाधित करके नया कागज बनाया जा सकता है। इससे पेड़ों की कटाई कम होती है, ऊर्जा और पानी की बचत होती है तथा पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलती है। पुस्तक के अनुसार एक टन कागज का पुनर्चक्रण करने से लगभग 17 पेड़ों और 2.5 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत होती है तथा लगभग 70% ऊर्जा और पानी की बचत होती है। इसलिए हमें कागज का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना चाहिए।

अध्याय के अंत में विद्यार्थियों को अपने आसपास होने वाली आर्थिक गतिविधियों की पहचान करने तथा उन्हें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों में वर्गीकृत करने के लिए प्रेरित किया गया है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता मिलती है कि समाज में होने वाला प्रत्येक आर्थिक कार्य किसी न किसी रूप में अन्य कार्यों से जुड़ा होता है।

निष्कर्ष

यह अध्याय हमें सिखाता है कि हमारे आसपास होने वाली प्रत्येक आर्थिक गतिविधि देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है। प्राथमिक क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनों से वस्तुएँ प्राप्त करता है, द्वितीयक क्षेत्रक उन्हें उपयोगी उत्पादों में बदलता है और तृतीयक क्षेत्रक उन उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुँचाता है। तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर पूरी तरह निर्भर हैं। साथ ही, अमूल जैसे सहकारी संगठन यह सिद्ध करते हैं कि सहयोग, एकता और सामूहिक प्रयास से किसानों और समाज का आर्थिक विकास संभव है। पुनर्चक्रण, संसाधनों का उचित उपयोग और पर्यावरण संरक्षण भी इस अध्याय के महत्वपूर्ण संदेश हैं।

पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है? यह द्वितीयक क्षेत्रक से किस प्रकार भिन्न है? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर-

प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector) वह क्षेत्र है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं। इसमें कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी तथा दुग्ध उत्पादन जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं।

द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector) वह क्षेत्र है जिसमें प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल को कारखानों या उद्योगों में उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। जैसे दूध से घी, मक्खन, पनीर और दूध पाउडर बनाना।

प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक में अंतर
प्राथमिक क्षेत्रक द्वितीयक क्षेत्रक
प्राकृतिक संसाधनों से वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं। कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदला जाता है।
कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन आदि इसमें आते हैं। उद्योग, कारखाने और विनिर्माण कार्य इसमें आते हैं।
यह कच्चा माल उपलब्ध कराता है। यह कच्चे माल का प्रसंस्करण करता है।

उदाहरण (प्राथमिक क्षेत्रक)

खेती करना।
गाय से दूध प्राप्त करना।

उदाहरण (द्वितीयक क्षेत्रक)

दूध से पनीर बनाना।
लकड़ी से फर्नीचर बनाना।

प्रश्न 2. द्वितीयक क्षेत्रक किस प्रकार से तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर है? उदाहरणों द्वारा समझाइए।

उत्तर-

द्वितीयक क्षेत्रक में तैयार किए गए उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए तृतीयक क्षेत्रक की आवश्यकता होती है। तृतीयक क्षेत्रक में परिवहन, व्यापार, विपणन, भंडारण, बैंकिंग तथा खुदरा बिक्री जैसी सेवाएँ शामिल हैं।

उदाहरण के लिए, अमूल के कारखानों में दूध से मक्खन, घी, पनीर और दूध पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इन उत्पादों को ट्रक, रेल और अन्य परिवहन साधनों द्वारा विभिन्न शहरों और गाँवों की दुकानों तक पहुँचाया जाता है तथा वहाँ ग्राहकों को बेचा जाता है। यदि परिवहन और विपणन की व्यवस्था न हो, तो तैयार उत्पाद लोगों तक नहीं पहुँच पाएँगे।

इस प्रकार द्वितीयक क्षेत्रक अपने उत्पादों की बिक्री और वितरण के लिए तृतीयक क्षेत्रक पर निर्भर रहता है।

प्रश्न 3. प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों के बीच परस्पर निर्भरता का एक उदाहरण दीजिए। इसको प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का प्रयोग करते हुए समझाइए।

उत्तर –

उदाहरण – अमूल दुग्ध उत्पादन

प्रवाह चित्र (Flow Chart)

गायों से दूध प्राप्त करना
(प्राथमिक क्षेत्रक)

दूध का पाश्चुरीकरण एवं प्रसंस्करण कर घी, मक्खन, पनीर, दूध पाउडर आदि बनाना
(द्वितीयक क्षेत्रक)

तैयार उत्पादों का परिवहन, विपणन और दुकानों में बिक्री
(तृतीयक क्षेत्रक)

उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुँचते हैं।

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं। यदि किसी एक क्षेत्रक का कार्य रुक जाए, तो पूरी आर्थिक प्रक्रिया प्रभावित हो जाएगी। इसलिए देश की अर्थव्यवस्था के विकास के लिए तीनों क्षेत्रकों का मिलकर कार्य करना आवश्यक है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (परीक्षा उपयोगी)

प्रश्न 1. आर्थिक गतिविधि क्या है?

उत्तर – वे गतिविधियाँ जिनसे वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन होता है और लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है, आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।

प्रश्न 2. सहकारी संगठन क्या है?

उत्तर- जब लोग अपनी आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए स्वेच्छा से मिलकर एक संगठन बनाते हैं, उसे सहकारी संगठन कहते हैं।

प्रश्न 3. अमूल की स्थापना कब हुई थी?

उत्तर – अमूल की स्थापना 1946 ई. में हुई थी।

प्रश्न 4. अमूल की स्थापना में किन व्यक्तियों का प्रमुख योगदान था?

उत्तर – अमूल की स्थापना में त्रिभुवन दास पटेल और डॉ. वर्गीज़ कुरियन का महत्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 5. किसानों ने सहकारी संगठन क्यों बनाया?

उत्तर – बिचौलियों से मुक्ति पाने, दूध का उचित मूल्य प्राप्त करने और अपनी आय बढ़ाने के लिए किसानों ने सहकारी संगठन बनाया।

प्रश्न 6. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है?

उत्तर – प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त करने वाली आर्थिक गतिविधियाँ प्राथमिक क्षेत्रक कहलाती हैं।

प्रश्न 7. प्राथमिक क्षेत्रक के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर – कृषि
दुग्ध उत्पादन

प्रश्न 8. द्वितीयक क्षेत्रक क्या है?

उत्तर – जिस क्षेत्र में कच्चे माल को तैयार वस्तुओं में बदला जाता है, उसे द्वितीयक क्षेत्रक कहते हैं।

प्रश्न 9. द्वितीयक क्षेत्रक के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर – दूध से पनीर बनाना।
लकड़ी से फर्नीचर बनाना।

प्रश्न 10. तृतीयक क्षेत्रक क्या है?

उत्तर – सेवाएँ प्रदान करने वाली आर्थिक गतिविधियाँ, जैसे परिवहन, व्यापार और विपणन, तृतीयक क्षेत्रक कहलाती हैं।

प्रश्न 11. तृतीयक क्षेत्रक के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर – परिवहन, खुदरा व्यापार

प्रश्न 12. पाश्चुरीकरण (Pasteurization) क्या है?

उत्तर – दूध को एक निश्चित तापमान तक गर्म करके उसके हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने की प्रक्रिया पाश्चुरीकरण कहलाती है।

प्रश्न 13. कारखाना क्या होता है?

उत्तर – वह स्थान जहाँ कच्चे माल से तैयार वस्तुओं का निर्माण किया जाता है, कारखाना कहलाता है।

प्रश्न 14. अमूल में दूध से कौन-कौन से उत्पाद बनाए जाते हैं?

उत्तर – दूध से घी, मक्खन, पनीर, दूध पाउडर तथा अन्य दुग्ध उत्पाद बनाए जाते हैं।

प्रश्न 15. निर्यात (Export) क्या है?

उत्तर – किसी देश में निर्मित वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देशों में बेचना निर्यात कहलाता है।

प्रश्न 16. खुदरा (Retail) क्या है?

उत्तर – वस्तुओं को अंतिम उपभोक्ता को कम मात्रा में बेचना खुदरा व्यापार कहलाता है।

प्रश्न 17. अमूल के उत्पाद उपभोक्ताओं तक कैसे पहुँचते हैं?

उत्तर – ट्रक, रेल, हवाई परिवहन और दुकानों के माध्यम से उत्पाद उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं।

प्रश्न 18. तीनों आर्थिक क्षेत्रकों में क्या संबंध है?

उत्तर – तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं और मिलकर अर्थव्यवस्था को चलाते हैं।

प्रश्न 19. पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया में प्राथमिक क्षेत्रक का कार्य क्या है?

उत्तर – पेड़ों से लकड़ी और काष्ठीय रेशे (लगदी) प्राप्त करना प्राथमिक क्षेत्रक का कार्य है।

प्रश्न 20. पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया में द्वितीयक क्षेत्रक का कार्य क्या है?

उत्तर – लगदी से कागज बनाना तथा उस पर छपाई करके पुस्तक तैयार करना।

प्रश्न 21. पाठ्यपुस्तक बनने की प्रक्रिया में तृतीयक क्षेत्रक का कार्य क्या है?

उत्तर – तैयार पुस्तकों का परिवहन, वितरण और बिक्री करना।

प्रश्न 22. पुनर्चक्रण (Recycling) क्या है?

उत्तर – पुरानी वस्तुओं को पुनः उपयोग योग्य बनाकर नए उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया पुनर्चक्रण कहलाती है।

प्रश्न 23. कागज के पुनर्चक्रण से क्या लाभ होते हैं?

उत्तर – पेड़ों की कटाई कम होती है, ऊर्जा और पानी की बचत होती है तथा पर्यावरण की रक्षा होती है।

प्रश्न 24. सहकारी संगठन का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

उत्तर – इससे सदस्यों को उचित मूल्य मिलता है और बिचौलियों पर निर्भरता समाप्त होती है।

प्रश्न 25. अमूल की सफलता का मुख्य कारण क्या है?

उत्तर – किसानों का सहयोग, सामूहिक निर्णय और सहकारी संगठन की व्यवस्था।

प्रश्न 26. यदि तृतीयक क्षेत्रक कार्य करना बंद कर दे तो क्या होगा?

उत्तर – तैयार वस्तुएँ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच पाएँगी और व्यापार प्रभावित हो जाएगा।

प्रश्न 27. प्राथमिक क्षेत्रक देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर – यह कच्चा माल और खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है, जिन पर अन्य क्षेत्रक निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 28. द्वितीयक क्षेत्रक का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर – कच्चे माल को उपयोगी और मूल्यवान तैयार वस्तुओं में बदलना।

प्रश्न 29. तृतीयक क्षेत्रक का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर – वस्तुओं और सेवाओं को लोगों तक पहुँचाना तथा व्यापार को सुचारु रूप से चलाना।

प्रश्न 30. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – हमें समझ में आता है कि प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं। सहकारिता, सामूहिक प्रयास, संसाधनों का सही उपयोग तथा पुनर्चक्रण से आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों संभव हैं।

दीर्घ अतिरिक्त प्रश्न–उत्तर

प्रश्न 1. आर्थिक गतिविधियाँ क्या हैं? इनके विभिन्न क्षेत्रकों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।

उत्तर – आर्थिक गतिविधियाँ वे सभी कार्य हैं जिनके द्वारा वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन, वितरण तथा उपभोग किया जाता है। ये गतिविधियाँ लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं तथा देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं।

आर्थिक गतिविधियों को तीन भागों में बाँटा गया है—

  1. प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector) इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं। इसमें कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी और दुग्ध उत्पादन शामिल हैं।
  2. द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector) इस क्षेत्र में प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल को कारखानों में उपयोगी वस्तुओं में बदला जाता है। जैसे—दूध से घी, पनीर और मक्खन बनाना।
  3. तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary Sector) इस क्षेत्र में परिवहन, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, संचार तथा विपणन जैसी सेवाएँ प्रदान की जाती हैं, जिससे तैयार वस्तुएँ उपभोक्ताओं तक पहुँचती हैं।

तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं और मिलकर देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

प्रश्न 2. अमूल सहकारी संस्था की स्थापना क्यों हुई? इसकी सफलता के कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – पहले गुजरात के आणंद जिले के दुग्ध उत्पादक किसानों को अपने दूध का उचित मूल्य नहीं मिलता था। बिचौलिए अधिक लाभ कमाते थे और किसानों का शोषण करते थे। इस समस्या के समाधान के लिए किसानों ने 1946 में अमूल सहकारी संस्था की स्थापना की।

इस संस्था के गठन में सरदार वल्लभभाई पटेल, त्रिभुवन दास पटेल और डॉ. वर्गीज़ कुरियन का महत्वपूर्ण योगदान था।

अमूल की सफलता के प्रमुख कारण—

किसानों का आपसी सहयोग।
सहकारी संगठन की व्यवस्था।
दूध का वैज्ञानिक प्रसंस्करण।
आधुनिक तकनीक का उपयोग।
उचित मूल्य पर उत्पादों की बिक्री।
बिचौलियों की भूमिका समाप्त होना।
लोकतांत्रिक ढंग से संस्था का संचालन।

आज अमूल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व की सफल सहकारी संस्थाओं में से एक है। इसने किसानों की आय बढ़ाई तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया।

प्रश्न 3. प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता को उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर – देश की अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

उदाहरण – अमूल

किसान गायों से दूध प्राप्त करते हैं। (प्राथमिक क्षेत्रक)
डेयरी कारखानों में दूध से घी, मक्खन, पनीर और दूध पाउडर बनाया जाता है। (द्वितीयक क्षेत्रक)
इन उत्पादों को ट्रक, रेल और दुकानों के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। (तृतीयक क्षेत्रक)

यदि किसान दूध न पैदा करें, तो कारखानों में उत्पादन नहीं होगा। यदि कारखाने कार्य न करें, तो बिक्री के लिए उत्पाद नहीं होंगे। यदि परिवहन और व्यापार न हो, तो उत्पाद ग्राहकों तक नहीं पहुँच पाएँगे।

इस प्रकार तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे के पूरक हैं और मिलकर अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से चलाते हैं।

प्रश्न 4. पाठ्यपुस्तक के निर्माण की प्रक्रिया द्वारा तीनों आर्थिक क्षेत्रकों की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – एक पाठ्यपुस्तक बनने में तीनों आर्थिक क्षेत्रकों का योगदान होता है।

प्राथमिक क्षेत्रक में पेड़ों से लकड़ी और काष्ठीय रेशे (लगदी) प्राप्त किए जाते हैं।

द्वितीयक क्षेत्रक में लकड़ी की लगदी से कागज बनाया जाता है तथा उस पर छपाई करके पुस्तक तैयार की जाती है।

तृतीयक क्षेत्रक में तैयार पुस्तकों को परिवहन द्वारा गोदामों, पुस्तक विक्रेताओं और विद्यालयों तक पहुँचाया जाता है तथा उनकी बिक्री की जाती है।

इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि किसी भी वस्तु के निर्माण में तीनों क्षेत्रकों का समान महत्व होता है और सभी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।

प्रश्न 5. सहकारी संगठन क्या है? इसके लाभों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।

उत्तर – सहकारी संगठन वह संस्था है जिसमें लोग स्वेच्छा से मिलकर अपनी आर्थिक और सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं। इसमें सभी सदस्यों को समान अधिकार प्राप्त होते हैं।

सहकारी संगठन के लाभ—

किसानों और उत्पादकों को उचित मूल्य मिलता है।
बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।
सदस्यों की आय में वृद्धि होती है।
सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था होती है।
रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होता है।
सहयोग और समानता की भावना विकसित होती है।
लोकतांत्रिक ढंग से संस्था का संचालन होता है।

अमूल सहकारी संस्था इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।

प्रश्न 6. कागज के पुनर्चक्रण (Recycling) का महत्व बताइए।

उत्तर – पुनर्चक्रण का अर्थ है पुरानी वस्तुओं को पुनः उपयोग योग्य बनाकर नए उत्पाद तैयार करना।

कागज का पुनर्चक्रण करने से—

पेड़ों की कटाई कम होती है।
ऊर्जा की बचत होती है।
पानी की बचत होती है।
पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
कचरे की मात्रा घटती है।
प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होता है।
सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा मिलता है।

पुस्तक के अनुसार एक टन कागज का पुनर्चक्रण करने से लगभग 17 पेड़ों तथा लगभग 70% ऊर्जा और पानी की बचत होती है। इसलिए हमें कागज का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और पुनर्चक्रण को अपनाना चाहिए।

प्रश्न 7. तृतीयक क्षेत्रक देश की अर्थव्यवस्था में क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर – तृतीयक क्षेत्रक सेवा क्षेत्र कहलाता है। इसका मुख्य कार्य वस्तुओं और सेवाओं को लोगों तक पहुँचाना है। इस क्षेत्र में परिवहन, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, संचार, भंडारण तथा विपणन जैसी सेवाएँ शामिल होती हैं।

यदि तृतीयक क्षेत्रक न हो, तो कारखानों में बने उत्पाद उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँच पाएँगे। व्यापार रुक जाएगा, उद्योगों का उत्पादन प्रभावित होगा तथा आर्थिक विकास धीमा पड़ जाएगा।

इसलिए तृतीयक क्षेत्रक प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है तथा देश की अर्थव्यवस्था के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रश्न 8. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – यह अध्याय हमें सिखाता है कि हमारे आसपास होने वाली सभी आर्थिक गतिविधियाँ देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी होती हैं। प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक मिलकर उत्पादन, प्रसंस्करण, परिवहन और व्यापार का कार्य करते हैं।

अमूल जैसी सहकारी संस्थाएँ हमें सहयोग, एकता और सामूहिक प्रयास का महत्व बताती हैं। साथ ही, कागज के पुनर्चक्रण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

हमें संसाधनों का सही उपयोग करना चाहिए, पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए तथा प्रत्येक आर्थिक गतिविधि और प्रत्येक श्रमिक के कार्य का सम्मान करना चाहिए।


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