कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 5 : लंबाई एवं गति का मापन | Measurement of Length and Motion
कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 5 : लंबाई एवं गति का मापन
अध्याय “लंबाई एवं गति का मापन” में हमें यह समझाया गया है कि हमारे दैनिक जीवन में वस्तुओं की लंबाई, दूरी और गति को मापना क्यों आवश्यक है। विज्ञान में किसी भी वस्तु के आकार या गति के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने के लिए मापन बहुत महत्वपूर्ण है। यदि हम किसी वस्तु की लंबाई या दो स्थानों के बीच की दूरी केवल अनुमान से बताएँ, तो अलग-अलग लोगों के उत्तर अलग हो सकते हैं। इसलिए मापन के लिए निश्चित और मानक मात्रकों का प्रयोग किया जाता है।
सबसे पहले अध्याय में लंबाई के बारे में बताया गया है। लंबाई का अर्थ किसी वस्तु के एक सिरे से दूसरे सिरे तक की दूरी से है। लंबाई मापने के लिए सामान्यतः मिलीमीटर (mm), सेंटीमीटर (cm), मीटर (m) और किलोमीटर (km) का उपयोग किया जाता है। छोटी वस्तुओं की लंबाई के लिए मिलीमीटर या सेंटीमीटर, कमरे या मैदान जैसी वस्तुओं के लिए मीटर तथा दो शहरों के बीच की दूरी के लिए किलोमीटर उपयुक्त होता है। उदाहरण के लिए, सिक्के की मोटाई मिलीमीटर में, पेंसिल की लंबाई सेंटीमीटर में और विद्यालय के मैदान की लंबाई मीटर में व्यक्त करना सुविधाजनक है।
मापन के लिए मानक मात्रक आवश्यक होते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी हथेली, बालिश्त या कदम को मापन की इकाई बनाए, तो एक ही वस्तु की लंबाई अलग-अलग प्राप्त हो सकती है। इसलिए विज्ञान में मानक इकाइयों का उपयोग किया जाता है। लंबाई का मानक SI मात्रक मीटर है। मीटर को आवश्यकता के अनुसार छोटी और बड़ी इकाइयों में बदला जा सकता है। 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर और 1 सेंटीमीटर = 10 मिलीमीटर होता है। इसी प्रकार 1 किलोमीटर = 1000 मीटर होता है।
लंबाई मापने के लिए पैमाना, मापने की फीता और अन्य मापन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। पैमाने से मापते समय उसे वस्तु के साथ सीधा और उसकी लंबाई की दिशा में रखना चाहिए। आँख की स्थिति भी सही होनी चाहिए। वस्तु के जिस सिरे से मापन शुरू किया गया है, उसे पैमाने के उचित चिह्न से मिलाना चाहिए। यदि पैमाने का शून्य वाला सिरा टूट गया हो, तो मापन किसी दूसरे स्पष्ट चिह्न से शुरू करके बाद में उस अंतर को घटाया जा सकता है। इससे सही लंबाई प्राप्त की जा सकती है।
किसी वस्तु की लंबाई मापते समय अनुमान और वास्तविक मापन में अंतर समझना भी जरूरी है। पहले वस्तु की लंबाई का अनुमान लगाया जा सकता है और फिर पैमाने से उसका वास्तविक मापन किया जा सकता है। इस प्रकार हम अपने अनुमान को मापे गए मान से तुलना कर सकते हैं। अध्याय में बच्चों को अपनी और अपने भाई-बहनों की लंबाई मापकर उसका अभिलेख रखने जैसी गतिविधियाँ भी कराई गई हैं। हर कुछ महीनों में लंबाई मापने से वृद्धि का पता लगाया जा सकता है।
अध्याय में दूरी मापने की विभिन्न विधियों को भी समझाया गया है। दो स्थानों के बीच की दूरी मापने के लिए परिस्थिति के अनुसार अलग-अलग उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। सड़क पर किलोमीटर के संकेतक हमें किसी स्थान की दूरी बताते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी किलोमीटर संकेतक पर “दिल्ली 70 km” लिखा है, तो इसका अर्थ है कि उस स्थान से दिल्ली की दूरी 70 किलोमीटर है।
साइकिल के पहिए की सहायता से भी दूरी मापी जा सकती है। इसके लिए पहले पहिए की परिधि मापी जाती है। फिर यह देखा जाता है कि साइकिल चलाते समय पहिया कितनी बार घूमता है। पहिए की एक बार की परिधि को पहिए के घूमने की संख्या से गुणा करने पर लगभग तय की गई दूरी प्राप्त की जा सकती है। इसी प्रकार की तकनीक का उपयोग सड़क पर दूरी मापने वाले उपकरणों में किया जाता है।
इसके बाद अध्याय में गति की अवधारणा समझाई गई है। जब कोई वस्तु किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो कहा जाता है कि वस्तु गति में है। जैसे सड़क पर चलती कार, दौड़ता हुआ बच्चा या उड़ता हुआ पक्षी गति में हैं। यदि कोई वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति नहीं बदलती, तो वह स्थिर मानी जाती है।
वस्तुएँ अलग-अलग प्रकार की गति कर सकती हैं। सरल रेखीय गति में वस्तु सीधी रेखा में चलती है, जैसे सीधी सड़क पर चलती कार। वृत्तीय गति में वस्तु वृत्ताकार पथ पर चलती है, जैसे घड़ी की सुई या घूमता हुआ पहिया। दोलन गति में वस्तु किसी निश्चित स्थिति के इधर-उधर बार-बार गति करती है, जैसे झूला। इसके अतिरिक्त किसी वस्तु की गति में एक से अधिक प्रकार की गति भी हो सकती है।
अध्याय में यह भी बताया गया है कि किसी वस्तु की गति को समझने के लिए उसके पथ और उसकी स्थिति में होने वाले परिवर्तन का ध्यान रखना चाहिए। रोलर कोस्टर जैसे उदाहरणों में एक ही यात्रा के दौरान गेंद या गाड़ी अलग-अलग भागों में अलग-अलग प्रकार की गति कर सकती है। इसलिए गति केवल “चलने” का नाम नहीं है, बल्कि वस्तु की स्थिति में समय के साथ होने वाला परिवर्तन है।
निष्कर्ष रूप में, यह अध्याय हमें सिखाता है कि लंबाई और दूरी को सही ढंग से मापने के लिए मानक मात्रकों और उचित उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए। मिलीमीटर, सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर का चयन वस्तु के आकार और दूरी के अनुसार किया जाता है। सही मापन के लिए पैमाने की स्थिति और आँख की स्थिति का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, जब कोई वस्तु समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष अपनी स्थिति बदलती है, तो वह गति में होती है। सरल रेखीय, वृत्तीय और दोलन जैसी विभिन्न गतियों को समझकर हम अपने आसपास होने वाली अनेक घटनाओं को वैज्ञानिक ढंग से समझ सकते हैं।
अध्याय 5 : लंबाई एवं गति का मापन
पुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. तालिका में दी गई लंबाइयों का उपयुक्त मात्रक से मिलान कीजिए।
वस्तु/दूरी उपयुक्त मात्रक
दिल्ली एवं लखनऊ के बीच की दूरी किलोमीटर (km)
सिक्के की मोटाई मिलीमीटर (mm)
रबर (इरेजर) की लंबाई सेंटीमीटर (cm)
विद्यालय के मैदान की लंबाई मीटर (m)
प्रश्न 2. निम्नलिखित कथनों को सत्य या असत्य लिखिए।
(क) एक सीधी सड़क पर चलती कार की गति सरल रेखीय गति का उदाहरण है।
उत्तर – सत्य।
(ख) यदि कोई वस्तु समय के साथ किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष अपनी स्थिति में परिवर्तन करती है, तो वह गति में है।
उत्तर – सत्य।
(ग) 1 km = 100 cm
उत्तर – असत्य।
सही संबंध: 1 km = 1000 m और 1 m = 100 cm।
प्रश्न 3. निम्न में से कौन-सा लंबाई मापने का मानक मात्रक नहीं है?
(क) मिलीमीटर
(ख) सेंटीमीटर
(ग) किलोमीटर
(घ) बालिश्त
उत्तर – (घ) बालिश्त।
कारण: बालिश्त अलग-अलग व्यक्तियों के हाथ के आकार के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए यह मानक मात्रक नहीं है।
प्रश्न 4. लंबाई मापते समय पैमाने को किस प्रकार रखना चाहिए और आँख की स्थिति कैसी होनी चाहिए?
उत्तर – पैमाने को वस्तु के संपर्क में उसकी लंबाई की दिशा में, अर्थात् वस्तु के साथ-साथ सीधा रखना चाहिए। पैमाने को पढ़ते समय आँख को मापी जा रही वस्तु के सिरे के ठीक ऊपर रखना चाहिए। इससे गलत कोण से देखने के कारण होने वाली मापन की त्रुटि से बचा जा सकता है।
प्रश्न 5. यदि पैमाने का सिरा टूटा हुआ हो, तो लंबाई कैसे मापेंगे?
उत्तर – यदि पैमाने का शून्य वाला सिरा टूटा हुआ है, तो वस्तु का एक सिरा पैमाने के किसी दूसरे स्पष्ट चिह्न, जैसे 1 cm या 2 cm, पर रखेंगे। वस्तु के दूसरे सिरे की रीडिंग नोट करेंगे। फिर अंतिम रीडिंग में प्रारंभिक रीडिंग को घटा देंगे।
उदाहरण: यदि वस्तु 2 cm से शुरू होकर 8 cm तक जाती है, तो उसकी लंबाई = 8 − 2 = 6 cm।
इस प्रकार टूटे हुए पैमाने से भी सही लंबाई मापी जा सकती है।
प्रश्न 6. लंबाई मापने के लिए अलग-अलग मात्रकों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर – सभी वस्तुओं की लंबाई समान नहीं होती। बहुत छोटी वस्तुओं के लिए मिलीमीटर सुविधाजनक है, छोटी वस्तुओं के लिए सेंटीमीटर, बड़ी वस्तुओं के लिए मीटर तथा बहुत लंबी दूरियों के लिए किलोमीटर सुविधाजनक होता है।
उदाहरण के लिए—
सिक्के की मोटाई – मिलीमीटर
पेंसिल की लंबाई – सेंटीमीटर
कमरे की लंबाई – मीटर
दो शहरों के बीच की दूरी – किलोमीटर
इसलिए वस्तु की लंबाई के अनुसार उपयुक्त मात्रक चुनना आवश्यक है।
प्रश्न 7. संदर्भ बिंदु क्या है? गति को समझने में इसका क्या महत्व है?
उत्तर – जब किसी वस्तु की दूरी या स्थिति किसी निश्चित वस्तु या बिंदु के सापेक्ष बताई जाती है, तो उस निश्चित बिंदु को संदर्भ बिंदु कहते हैं।
किसी वस्तु को गतिमान तब कहा जाता है जब उसकी स्थिति किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ बदलती है। इसलिए किसी वस्तु की गति का वर्णन करने के लिए संदर्भ बिंदु आवश्यक है।
प्रश्न 8. सरल रेखीय गति, वृत्तीय गति और दोलन-गति को समझाइए।
उत्तर –
- सरल रेखीय गति
जब कोई वस्तु सीधी रेखा के अनुरूप गति करती है, तो उसे सरल रेखीय गति कहते हैं।
उदाहरण: सीधी सड़क पर चलती कार।
- वृत्तीय गति
जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ के अनुरूप गति करती है, तो उसे वृत्तीय गति कहते हैं।
उदाहरण: घूमते हुए पहिए की गति।
- दोलन-गति
जब कोई वस्तु किसी निश्चित स्थिति के इधर-उधर गति करती है, तो उसे दोलन-गति कहते हैं।
उदाहरण: झूले की गति।
प्रश्न 9. सरल रेखीय, वृत्तीय एवं दोलन-गति के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर –
सरल रेखीय गति:
सीधी सड़क पर चलती कार।
सीधी पटरी पर चलती रेलगाड़ी।
वृत्तीय गति:
घूमते हुए पंखे के पंखों की गति।
घड़ी की सुई की गति।
दोलन-गति:
झूले की गति।
लटकते हुए पेंडुलम की गति।
प्रश्न 10. अपने चारों ओर की वस्तुओं के लिए mm, cm और m में मापने योग्य तीन-तीन वस्तुओं के उदाहरण दीजिए।
उत्तर –
मात्रक वस्तुओं के उदाहरण
mm सिक्के की मोटाई, कागज की मोटाई, छोटी कील की मोटाई
cm पेंसिल की लंबाई, रबर की लंबाई, पुस्तक की लंबाई
m कमरे की लंबाई, विद्यालय के मैदान की लंबाई, दरवाजे की ऊँचाई
इस प्रकार वस्तु के आकार के अनुसार उचित मात्रक का चयन किया जाता है।
प्रश्न 11. रोलर कोस्टर पर गेंद की गति के प्रकार और ट्रैक के संबंधित भागों की पहचान कीजिए।
उत्तर – रोलर कोस्टर के अलग-अलग भागों में गेंद अलग-अलग प्रकार की गति कर सकती है। सीधे भाग में गेंद की गति सरल रेखीय, गोल या घुमावदार भाग में वृत्तीय, तथा यदि गेंद किसी निश्चित स्थिति के इधर-उधर आगे-पीछे गति करे तो वह दोलन-गति होगी।
इस प्रश्न में चित्र 5.19 के अनुसार भागों की पहचान चित्र के आकार को देखकर की जानी है।
प्रश्न 12. तस्नीम एक मीटर पैमाना बनाना चाहती है। प्लाईवुड, कागज, कपड़ा, लचीली रबड़ और स्टील में से किसका उपयोग नहीं करना चाहिए और क्यों?
उत्तर – तस्नीम को कागज, कपड़ा और लचीली रबड़ जैसी लचीली या आसानी से मुड़ने वाली सामग्री का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि पैमाने का आकार बदल सकता है और सही मापन नहीं हो पाएगा।
मीटर पैमाने के लिए स्टील या प्लाईवुड जैसी कठोर और स्थिर सामग्री अधिक उपयुक्त होगी।
प्रश्न 13. लंबाई के मात्रकों के रूपांतरण पर कार्ड गेम कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर – इस खेल के लिए अलग-अलग कार्ड बनाए जा सकते हैं। कुछ कार्डों पर लंबाई के मान और कुछ पर उनके रूपांतरण लिखे जाएँ। जैसे—
1 m ↔ 100 cm
1 cm ↔ 10 mm
1 km ↔ 1000 m
विद्यार्थियों को सही मान और उसके रूपांतरण वाले कार्डों की जोड़ी बनानी होगी। जो विद्यार्थी सबसे अधिक सही जोड़ियाँ बनाएगा, वह विजेता होगा। इस प्रकार खेल-खेल में मात्रकों के रूपांतरण का अभ्यास किया जा सकता है।
अध्याय 5 : लंबाई एवं गति का मापन
अतिरिक्त प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1. मापन किसे कहते हैं?
उत्तर – किसी वस्तु की लंबाई या दूरी को किसी निश्चित मानक मात्रक से तुलना करके उसका मान ज्ञात करना मापन कहलाता है। सही मापन के लिए मानक मात्रकों और उचित मापन उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 2. लंबाई के प्रमुख मात्रक कौन-कौन से हैं?
उत्तर – लंबाई मापने के प्रमुख मात्रक हैं—
मिलीमीटर (mm)
सेंटीमीटर (cm)
मीटर (m)
किलोमीटर (km)
इनका उपयोग वस्तु या दूरी के आकार के अनुसार किया जाता है।
प्रश्न 3. लंबाई के मात्रकों में क्या संबंध है?
उत्तर-
1 km = 1000 m
1 m = 100 cm
1 cm = 10 mm
इसलिए बड़ी दूरी के लिए किलोमीटर और छोटी लंबाई के लिए सेंटीमीटर या मिलीमीटर का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 4. बालिश्त को लंबाई का मानक मात्रक क्यों नहीं माना जाता?
उत्तर –
बालिश्त किसी व्यक्ति के हाथ के आकार पर निर्भर करता है। अलग-अलग व्यक्तियों की बालिश्त की लंबाई अलग हो सकती है। इसलिए एक ही वस्तु को अलग-अलग लोग बालिश्त से मापेंगे तो अलग परिणाम मिल सकते हैं। इसी कारण बालिश्त मानक मात्रक नहीं है।
प्रश्न 5. मापन के लिए मानक मात्रक क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर –
मानक मात्रक इसलिए आवश्यक हैं ताकि किसी वस्तु की लंबाई का मापन सभी स्थानों और सभी व्यक्तियों के लिए समान रहे। यदि अलग-अलग लोग अलग-अलग इकाइयों का उपयोग करेंगे, तो मापन के परिणाम अलग हो सकते हैं। मानक मात्रकों से मापन अधिक विश्वसनीय और आसानी से समझने योग्य होता है।
प्रश्न 6. 15 cm के पैमाने में मिलीमीटर किस प्रकार बनाए जाते हैं?
उत्तर –
एक मीटर को 100 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक भाग 1 cm होता है। प्रत्येक 1 cm को फिर 10 बराबर भागों में बाँटा जाता है। इनमें प्रत्येक छोटा भाग 1 मिलीमीटर (mm) होता है। इसलिए 1 cm = 10 mm।
प्रश्न 7. इंच क्या है? इसका सेंटीमीटर से क्या संबंध है?
उत्तर –
इंच लंबाई मापने की एक इकाई है। कुछ पैमानों पर सेंटीमीटर के साथ इंच का अंकन भी दिया होता है।
1 inch = 2.54 cm
हालाँकि विज्ञान में लंबाई मापने के लिए मिलीमीटर, सेंटीमीटर, मीटर और किलोमीटर जैसे मानक मात्रकों का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 8. लंबाई मापने के लिए लचीले पदार्थ से बने उपकरणों का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर –
कुछ वस्तुएँ सीधी नहीं होतीं, बल्कि घुमावदार या वक्र होती हैं। ऐसी वस्तुओं की लंबाई सीधे कठोर पैमाने से मापना कठिन होता है। इसलिए मापन-फीते जैसे लचीले उपकरणों का उपयोग किया जाता है। उन्हें वस्तु के आकार के अनुसार मोड़कर लंबाई मापी जा सकती है।
प्रश्न 9. संदर्भ बिंदु किसे कहते हैं?
उत्तर –
किसी वस्तु की दूरी या स्थिति को जिस निश्चित वस्तु या बिंदु के सापेक्ष बताया जाता है, उसे संदर्भ बिंदु कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि हम कहते हैं कि विद्यालय बस स्टैंड से 500 मीटर दूर है, तो बस स्टैंड संदर्भ बिंदु है।
प्रश्न 10. गति किसे कहते हैं?
उत्तर –
जब किसी वस्तु की स्थिति किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ बदलती है, तो कहा जाता है कि वह वस्तु गति में है। उदाहरण के लिए, सड़क पर चलती कार की स्थिति सड़क किनारे स्थित किसी पेड़ के सापेक्ष बदलती रहती है, इसलिए कार गति में है।
प्रश्न 11. सरल रेखीय गति क्या है? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर –
जब कोई वस्तु सीधी रेखा के अनुरूप गति करती है, तो उसकी गति को सरल रेखीय गति कहते हैं।
उदाहरण:
सीधी सड़क पर चलती कार।
सीधी पटरी पर चलती रेलगाड़ी।
प्रश्न 12. वृत्तीय गति क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर – जब कोई वस्तु वृत्तीय पथ के अनुरूप गति करती है, तो उसे वृत्तीय गति कहते हैं।
उदाहरण:
घूमते हुए पहिए की गति।
घड़ी की सुई की गति।
प्रश्न 13. दोलन गति क्या है?
उत्तर – जब कोई वस्तु किसी निश्चित स्थिति के इधर-उधर बार-बार गति करती है, तो उसकी गति को दोलन गति कहते हैं।
उदाहरण: झूले की आगे-पीछे होने वाली गति।
प्रश्न 14. किसी वस्तु की लंबाई मापने के लिए सही पैमाना चुनना क्यों आवश्यक है?
उत्तर – वस्तु के आकार के अनुसार उचित पैमाना चुनना आवश्यक है। छोटी वस्तु के लिए छोटा पैमाना और बड़ी वस्तु के लिए बड़ा पैमाना सुविधाजनक होता है। उदाहरण के लिए, पेंसिल की लंबाई के लिए 15 cm का पैमाना उपयोगी है, जबकि कमरे की ऊँचाई मापने के लिए मीटर पैमाना या अन्य उपयुक्त उपकरण की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 15. दूरी और गति में क्या संबंध है?
उत्तर – किसी वस्तु के एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने पर उसके द्वारा तय की गई दूरी को मापा जा सकता है। यदि वस्तु समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो वह गति में है। इसलिए किसी गतिमान वस्तु का अध्ययन करते समय उसकी स्थिति में परिवर्तन और तय की गई दूरी पर ध्यान दिया जाता है।
प्रश्न 16. किलोमीटर का उपयोग किन दूरियों को मापने के लिए किया जाता है?
उत्तर – किलोमीटर का उपयोग बहुत बड़ी दूरियों को मापने के लिए किया जाता है। जैसे दो शहरों के बीच की दूरी। उदाहरण के लिए, पुस्तक में सड़क किनारे लगे किलोमीटर संकेतक पर किसी स्थान से दिल्ली की दूरी किलोमीटर में दिखाई गई है।
प्रश्न 17. यदि दो बच्चे किसी स्थान की दूरी का अलग-अलग अनुमान लगाएँ, तो ऐसा क्यों हो सकता है?
उत्तर – ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि दोनों बच्चे दूरी का अनुमान अलग-अलग स्थानों या संदर्भ बिंदुओं से लगा रहे हों। यदि दोनों एक ही निश्चित संदर्भ बिंदु से दूरी का निर्धारण करें, तो उनका अवलोकन समान हो सकता है।
प्रश्न 18. लंबाई मापते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर – लंबाई मापते समय—
उचित पैमाना या मापन उपकरण चुनना चाहिए।
पैमाने को वस्तु के साथ सही स्थिति में रखना चाहिए।
वस्तु के सिरे और पैमाने के चिह्न को ठीक से मिलाना चाहिए।
पैमाने को सही कोण से पढ़ना चाहिए।
मापन के साथ उचित मात्रक अवश्य लिखना चाहिए।
इससे मापन की त्रुटि कम होती है।
प्रश्न 19. मापन में मात्रक के साथ संख्या लिखते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर – मात्रक का संकेत सही होना चाहिए। जैसे किलोमीटर के लिए km, मीटर के लिए m, सेंटीमीटर के लिए cm और मिलीमीटर के लिए mm लिखा जाता है। संख्या और मात्रक के बीच स्थान छोड़ा जाता है, जैसे 15 cm। मात्रक के संकेत के अंत में पूर्णविराम या बहुवचन के लिए “s” नहीं लगाया जाता।
प्रश्न 20. इस अध्याय से हमें क्या मुख्य शिक्षा मिलती है?
उत्तर – इस अध्याय से हमें सीख मिलती है कि वस्तुओं की लंबाई और दूरी का सही मापन करने के लिए मानक मात्रकों और उचित उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए। हमें mm, cm, m और km के संबंध याद रखने चाहिए। साथ ही, गति को समझने के लिए संदर्भ बिंदु का महत्व जानना चाहिए तथा सरल रेखीय, वृत्तीय और दोलन गति में अंतर पहचानना चाहिए।
अतिरिक्त दीर्घ प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1. मापन क्या है? मानक मात्रकों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर – किसी वस्तु की लंबाई या दूरी को किसी निश्चित मात्रक से तुलना करके उसका मान ज्ञात करना मापन कहलाता है। मापन के लिए मानक मात्रकों का प्रयोग करना आवश्यक है, क्योंकि अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किए गए अनुमान या गैर-मानक माप अलग-अलग हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि कोई बच्चा किसी मेज की लंबाई को अपनी हथेली या बालिश्त से मापता है, तो दूसरे बच्चे का परिणाम अलग हो सकता है। इसलिए विज्ञान में मिलीमीटर (mm), सेंटीमीटर (cm), मीटर (m) और किलोमीटर (km) जैसे मानक मात्रकों का प्रयोग किया जाता है। इससे मापन सभी के लिए समान और विश्वसनीय होता है।
प्रश्न 2. लंबाई के विभिन्न मात्रकों को समझाइए और उनके बीच संबंध लिखिए।
उत्तर – वस्तु के आकार के अनुसार लंबाई मापने के लिए अलग-अलग मात्रकों का प्रयोग किया जाता है।
बहुत छोटी लंबाई के लिए मिलीमीटर (mm)।
छोटी वस्तुओं की लंबाई के लिए सेंटीमीटर (cm)।
बड़ी वस्तुओं की लंबाई के लिए मीटर (m)।
बहुत अधिक दूरी के लिए किलोमीटर (km)।
इन मात्रकों के बीच संबंध इस प्रकार हैं—
1 cm = 10 mm
1 m = 100 cm
1 km = 1000 m
उदाहरण के लिए, सिक्के की मोटाई मिलीमीटर में, पेंसिल की लंबाई सेंटीमीटर में, कमरे की लंबाई मीटर में तथा दो शहरों के बीच की दूरी किलोमीटर में व्यक्त करना सुविधाजनक होता है।
प्रश्न 3. बालिश्त, कदम आदि को मानक मात्रक क्यों नहीं माना जाता? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – बालिश्त, कदम या हाथ जैसी इकाइयाँ प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान नहीं होतीं। अलग-अलग लोगों के हाथ और कदमों का आकार अलग होता है। इसलिए यदि दो व्यक्ति एक ही वस्तु को बालिश्त या कदम से मापें, तो दोनों के परिणाम अलग हो सकते हैं।
उदाहरण के लिए, एक बच्चे की बालिश्त छोटी और दूसरे बच्चे की बालिश्त बड़ी हो सकती है। इसलिए मेज की लंबाई दोनों बच्चों के लिए अलग-अलग आ सकती है।
इसी समस्या को दूर करने के लिए विज्ञान में निश्चित और मानक मात्रकों का प्रयोग किया जाता है, जैसे mm, cm, m और km।
प्रश्न 4. किसी वस्तु की लंबाई पैमाने से मापते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर – पैमाने से सही लंबाई मापने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए—
वस्तु के अनुसार उचित पैमाना चुनना चाहिए।
पैमाने को वस्तु के साथ सीधा रखना चाहिए।
वस्तु का एक सिरा पैमाने के शून्य चिह्न से मिलाना चाहिए।
यदि शून्य चिह्न उपलब्ध न हो, तो किसी अन्य स्पष्ट चिह्न से मापन शुरू कर सकते हैं।
पैमाने को तिरछा नहीं रखना चाहिए।
रीडिंग लेते समय आँख को उचित स्थिति में रखना चाहिए।
प्राप्त संख्या के साथ उचित मात्रक भी लिखना चाहिए।
इन सावधानियों से मापन में होने वाली त्रुटियों को कम किया जा सकता है।
प्रश्न 5. यदि पैमाने का शून्य वाला सिरा टूट गया हो तो वस्तु की लंबाई कैसे मापेंगे?
उत्तर – यदि पैमाने का शून्य वाला सिरा टूट गया हो, तो भी वस्तु की लंबाई मापी जा सकती है। इसके लिए वस्तु के एक सिरे को पैमाने के किसी स्पष्ट चिह्न, जैसे 1 cm या 2 cm, पर रखेंगे। फिर वस्तु के दूसरे सिरे की रीडिंग नोट करेंगे।
मान लीजिए वस्तु का पहला सिरा 2 cm पर और दूसरा सिरा 8 cm पर है। तब वस्तु की लंबाई होगी—
लंबाई = 8 cm − 2 cm = 6 cm
इस प्रकार पैमाने का शून्य सिरा टूट जाने पर भी सही लंबाई प्राप्त की जा सकती है।
प्रश्न 6. संदर्भ बिंदु क्या है? गति को समझने में इसका क्या महत्व है?
उत्तर – किसी वस्तु की स्थिति या दूरी का निर्धारण जिस निश्चित वस्तु या बिंदु के सापेक्ष किया जाता है, उसे संदर्भ बिंदु कहते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि तीन विद्यार्थी अलग-अलग घरों से विद्यालय और उद्यान की दूरी का अनुमान लगाते हैं, तो उनके परिणाम अलग हो सकते हैं। इसका कारण यह है कि वे अलग-अलग घरों को आधार बना रहे हैं। यदि सभी विद्यार्थी बस स्टैंड जैसे एक ही संदर्भ बिंदु से दूरी मापें, तो उनका मापन समान होगा।
इसी प्रकार किसी वस्तु को गतिमान बताने के लिए भी यह देखना आवश्यक है कि उसकी स्थिति किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ बदल रही है या नहीं।
प्रश्न 7. गति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – जब कोई वस्तु किसी संदर्भ बिंदु के सापेक्ष समय के साथ अपनी स्थिति बदलती है, तो कहा जाता है कि वह वस्तु गति में है।
उदाहरण के लिए, सड़क पर चलती कार की स्थिति सड़क के किनारे लगे पेड़ के सापेक्ष लगातार बदलती रहती है। इसलिए कार गति में है। इसी प्रकार दौड़ता हुआ बच्चा, उड़ता हुआ पक्षी और चलती हुई साइकिल गति के उदाहरण हैं।
गति को समझने के लिए वस्तु की स्थिति में होने वाले परिवर्तन और संदर्भ बिंदु दोनों का ध्यान रखना आवश्यक है।
प्रश्न 8. सरल रेखीय गति, वृत्तीय गति और दोलन गति को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर –
- सरल रेखीय गति:
जब कोई वस्तु सीधी रेखा के अनुरूप गति करती है, तो उसे सरल रेखीय गति कहते हैं।
उदाहरण: सीधी सड़क पर चलती कार और सीधी पटरी पर चलती रेलगाड़ी। - वृत्तीय गति:
जब कोई वस्तु वृत्ताकार पथ पर गति करती है, तो उसे वृत्तीय गति कहते हैं।
उदाहरण: घूमते हुए पहिए और हिंडोले की गति। - दोलन गति:
जब कोई वस्तु किसी निश्चित स्थिति के इधर-उधर बार-बार गति करती है, तो उसे दोलन गति कहते हैं।
उदाहरण: झूले और पेंडुलम की आगे-पीछे की गति।
इस प्रकार वस्तु के गति-पथ के आधार पर उसकी गति का प्रकार पहचाना जा सकता है।
प्रश्न 9. क्या कोई वस्तु एक ही समय में एक से अधिक प्रकार की गति कर सकती है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – हाँ, कोई वस्तु एक ही समय में एक से अधिक प्रकार की गति कर सकती है।
उदाहरण के लिए, चलती हुई साइकिल आगे की ओर गति करती है, इसलिए उसका पूरा शरीर आगे की दिशा में गति करता है। साथ ही उसके पहिए अपनी धुरी के चारों ओर घूमते हैं। इसलिए साइकिल की गति में सरल रेखीय तथा पहिए की गति में वृत्तीय गति दोनों दिखाई देती हैं।
इसी प्रकार रोलर कोस्टर की गेंद अपने मार्ग के अलग-अलग भागों में अलग-अलग प्रकार की गति कर सकती है।
प्रश्न 10. लंबाई मापने वाले कुछ उपकरण लचीले पदार्थों से क्यों बनाए जाते हैं?
उत्तर – सभी वस्तुएँ सीधी नहीं होतीं। कुछ वस्तुएँ घुमावदार या वक्र आकार की होती हैं। ऐसी वस्तुओं की लंबाई कठोर पैमाने से मापना कठिन होता है।
इसलिए मापने की फीता जैसे कुछ उपकरण लचीले पदार्थों से बनाए जाते हैं। इन्हें वस्तु के आकार के अनुसार मोड़ा जा सकता है और घुमावदार वस्तुओं की लंबाई मापी जा सकती है।
इस प्रकार लचीले मापन उपकरण कठिन आकार वाली वस्तुओं की लंबाई मापने में उपयोगी होते हैं।
प्रश्न 11. अलग-अलग वस्तुओं की लंबाई के लिए अलग-अलग मात्रकों का चुनाव क्यों किया जाता है?
उत्तर – सभी वस्तुओं का आकार समान नहीं होता। इसलिए प्रत्येक वस्तु के लिए एक ही मात्रक का प्रयोग करना सुविधाजनक नहीं होता।
mm – बहुत छोटी लंबाई के लिए, जैसे छोटी वस्तु की मोटाई।
cm – पेंसिल, रबर या पुस्तक जैसी वस्तुओं के लिए।
m – कमरे, कक्षा या मैदान जैसी बड़ी वस्तुओं के लिए।
km – दो शहरों या बहुत दूर स्थित स्थानों के बीच की दूरी के लिए।
उचित मात्रक चुनने से मापन सरल, स्पष्ट और सुविधाजनक हो जाता है। पुस्तक में भी अलग-अलग वस्तुओं की लंबाई को mm, cm और m में व्यक्त करने की गतिविधि दी गई है।
प्रश्न 12. तस्नीम मीटर पैमाना बनाना चाहती है। प्लाईवुड, कागज, कपड़ा, लचीली रबड़ और स्टील में से किन पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए और क्यों?
उत्तर – मीटर पैमाना बनाने के लिए ऐसी सामग्री चाहिए जो कठोर, सीधी और स्थिर रहे। इसलिए कागज, कपड़ा और लचीली रबड़ का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे मुड़ या खिंच सकते हैं। इससे पैमाने की लंबाई बदल सकती है और मापन गलत हो सकता है।
प्लाईवुड या स्टील जैसी अपेक्षाकृत कठोर सामग्री अधिक उपयुक्त हो सकती है। पुस्तक में भी मीटर पैमाना बनाने के लिए इन सामग्रियों पर विचार करने का प्रश्न दिया गया है।
प्रश्न 13. लंबाई और गति के मापन का हमारे दैनिक जीवन में क्या महत्व है?
उत्तर – लंबाई और गति का मापन हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी है। घर बनाने में कमरे की लंबाई और ऊँचाई मापनी पड़ती है। कपड़े की लंबाई मापने के लिए फीते का उपयोग किया जाता है। सड़क पर स्थानों के बीच की दूरी किलोमीटर में बताई जाती है। वाहन की गति और उसके द्वारा तय की गई दूरी का अध्ययन भी मापन से संबंधित है।
मापन हमें वस्तुओं के आकार, उनके बीच की दूरी और उनकी गति को सही एवं वैज्ञानिक तरीके से समझने में सहायता करता है। इसलिए विज्ञान तथा दैनिक जीवन दोनों में मापन का बहुत महत्व है।
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