कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 3 : जिज्ञासा | Curiosity
सरल एवं विस्तृत सारांश (परीक्षा उपयोगी) कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 3 : जिज्ञासा | Curiosity
उचित आहार – स्वस्थ शरीर का आधार अध्याय हमें बताता है कि स्वस्थ जीवन के लिए सही भोजन कितना आवश्यक है। हमारा शरीर भोजन से ऊर्जा प्राप्त करता है, बढ़ता है, कार्य करता है और रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त करता है। यदि भोजन संतुलित और पौष्टिक हो, तो शरीर स्वस्थ रहता है, जबकि असंतुलित भोजन अनेक बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए हमें यह जानना आवश्यक है कि भोजन में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं और उनका शरीर में क्या कार्य है।
भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्रकार के भोजन खाए जाते हैं। किसी क्षेत्र का भोजन वहाँ की जलवायु, खेती, संस्कृति और परंपराओं पर निर्भर करता है। कहीं चावल मुख्य भोजन है, तो कहीं गेहूँ, बाजरा या मक्का अधिक खाया जाता है। अलग-अलग भोजन होने के बावजूद सभी का उद्देश्य शरीर को आवश्यक पोषण देना है। समय के साथ भोजन बनाने की पारंपरिक और आधुनिक विधियों में भी परिवर्तन आया है।
हमारे भोजन में कई प्रकार के पोषक तत्व होते हैं। मुख्य पोषक तत्व हैं— कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिज। इनके अतिरिक्त आहारीय रेशे (रूक्षांश) और जल भी शरीर के लिए आवश्यक हैं। प्रत्येक पोषक तत्व का शरीर में अलग-अलग कार्य होता है, इसलिए हमें सभी पोषक तत्वों वाला भोजन करना चाहिए।
कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देने वाला मुख्य पोषक तत्व है। चावल, गेहूँ, आलू, मक्का और रोटी इसके प्रमुख स्रोत हैं। जब हम खेलते हैं, दौड़ते हैं या कोई कार्य करते हैं, तब शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट से प्राप्त होती है। शरीर में ऊर्जा की कमी होने पर व्यक्ति जल्दी थक जाता है।
वसा भी शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है तथा शरीर को गर्म रखने में सहायता करती है। घी, मक्खन, तेल, मेवे और बीज वसा के प्रमुख स्रोत हैं। वसा की आवश्यकता सीमित मात्रा में होती है। यदि अधिक मात्रा में वसा युक्त भोजन लिया जाए, तो मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। इसलिए वसा का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए।
प्रोटीन शरीर की वृद्धि और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत के लिए आवश्यक है। इसे शरीर-वर्धक पोषक तत्व कहा जाता है। दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, अंडा, मछली और मांस प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। बढ़ते बच्चों के लिए प्रोटीन विशेष रूप से आवश्यक होता है क्योंकि इससे शरीर का विकास सही ढंग से होता है।
विटामिन और खनिज शरीर को स्वस्थ बनाए रखते हैं और रोगों से बचाते हैं। विटामिन A आँखों के लिए, विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए, विटामिन D हड्डियों के लिए तथा आयरन और कैल्सियम जैसे खनिज शरीर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनकी कमी हो जाए, तो रतौंधी, स्कर्वी, रिकेट्स और एनीमिया जैसे अभावजन्य रोग हो सकते हैं।
आहारीय रेशे (रूक्षांश) भोजन को पचाने में सहायता करते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं से बचाते हैं। फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और अंकुरित अनाज इसके अच्छे स्रोत हैं। जल शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है, पाचन में सहायता करता है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालता है। इसलिए प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
अध्याय में खाद्य पदार्थों में स्टार्च, वसा और प्रोटीन की पहचान करने के सरल प्रयोग भी बताए गए हैं। आयोडीन विलयन से स्टार्च की जाँच की जाती है। यदि खाद्य पदार्थ का रंग नीला-काला हो जाए, तो उसमें स्टार्च उपस्थित होता है। तैलीय धब्बे से वसा तथा विशेष रसायनों की सहायता से प्रोटीन की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। इन प्रयोगों से यह समझ आता है कि एक ही खाद्य पदार्थ में एक से अधिक पोषक तत्व हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, मूँगफली में प्रोटीन और वसा दोनों पाए जाते हैं।
ऐसा भोजन जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व, पर्याप्त मात्रा में जल तथा आहारीय रेशे उचित मात्रा में हों, संतुलित आहार कहलाता है। प्रत्येक व्यक्ति की आयु, लिंग, स्वास्थ्य और कार्य के अनुसार संतुलित आहार की आवश्यकता अलग-अलग होती है। बच्चों, खिलाड़ियों, गर्भवती महिलाओं और वृद्ध लोगों की पोषण आवश्यकताएँ समान नहीं होतीं। इसलिए सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार भोजन करना चाहिए।
आजकल लोग जंक फूड जैसे चिप्स, नूडल्स, टॉफी, कोल्ड ड्रिंक और अधिक तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करने लगे हैं। इनमें वसा और शर्करा अधिक होती है, जबकि प्रोटीन, विटामिन, खनिज और रेशे कम होते हैं। ऐसे भोजन का अधिक सेवन मोटापा, मधुमेह तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए जंक फूड से बचना चाहिए और घर का ताजा एवं पौष्टिक भोजन करना चाहिए।
इस अध्याय में मिलेट (मोटा अनाज) जैसे ज्वार, बाजरा, रागी और सांवा का विशेष महत्व बताया गया है। ये अनाज अत्यधिक पौष्टिक होते हैं तथा इनमें विटामिन, आयरन, कैल्सियम और आहारीय रेशे भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इन्हें पोषक अनाज भी कहा जाता है। इनकी खेती कम पानी में भी की जा सकती है, इसलिए ये किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक हैं।
अध्याय में खाद्य मील (Food Mile) की भी चर्चा की गई है। खेत से हमारी थाली तक भोजन पहुँचने में किसान, परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और दुकानदार सहित अनेक लोगों का योगदान होता है। किसी खाद्य पदार्थ द्वारा उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक तय की गई कुल दूरी को खाद्य मील कहते हैं। स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग करने से परिवहन कम होता है, प्रदूषण घटता है और भोजन अधिक ताजा मिलता है। साथ ही स्थानीय किसानों को भी लाभ होता है।
अंत में अध्याय हमें यह महत्वपूर्ण संदेश देता है कि भोजन का कभी भी अपव्यय नहीं करना चाहिए। हमें उतना ही भोजन लेना चाहिए जितना हम खा सकें। भोजन तैयार करने और हमारी थाली तक पहुँचाने में अनेक लोगों की मेहनत लगती है। इसलिए भोजन का सम्मान करना, संतुलित आहार लेना, जंक फूड से बचना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। यही स्वस्थ शरीर और सुखी जीवन का आधार है।
पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से असंगत को चुनें और कारण बताएँ—
(क) ज्वार, बाजरा, रागी, चना
उत्तर – असंगत – चना
कारण: ज्वार, बाजरा और रागी मिलेट (मोटे अनाज) हैं, जबकि चना एक दलहन (दाल) है।
(ख) राजमा, मूँग, सोयाबीन, चावल
उत्तर – असंगत – चावल
कारण: राजमा, मूँग और सोयाबीन दलहन हैं तथा प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं, जबकि चावल अनाज है और मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है।
प्रश्न 2. भारत में पारंपरिक और आधुनिक पाक पद्धतियों की तुलना करते हुए चर्चा करें।
उत्तर – पारंपरिक पाक पद्धतियाँ
लकड़ी, उपले या मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाया जाता था।
हाथ से मसाले पीसे जाते थे।
भोजन ताज़ा और स्थानीय सामग्री से तैयार होता था।
आधुनिक पाक पद्धतियाँ
गैस स्टोव, इंडक्शन, माइक्रोवेव आदि का उपयोग किया जाता है।
मिक्सर, ग्राइंडर और अन्य आधुनिक उपकरणों का प्रयोग होता है।
भोजन जल्दी और सुविधाजनक तरीके से तैयार किया जाता है।
दोनों पद्धतियों का उद्देश्य भोजन पकाना है, लेकिन आधुनिक पद्धतियाँ समय और श्रम की बचत करती हैं।
प्रश्न 3. शिक्षक का कहना है कि अच्छा आहार औषधि के रूप में कार्य कर सकता है। रवि शिक्षक से कौन-से दो प्रश्न पूछ सकता है?
उत्तर –
संतुलित आहार हमें रोगों से कैसे बचाता है?
कौन-कौन से खाद्य पदार्थ शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं?
प्रश्न 4. सभी स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यप्रद नहीं होते और सभी पौष्टिक खाद्य पदार्थ हमेशा स्वादिष्ट नहीं लगते। उदाहरण सहित अपने विचार लिखिए।
उत्तर – यह कथन सही है। चिप्स, पिज्जा, बर्गर और कोल्ड ड्रिंक स्वादिष्ट लग सकते हैं, लेकिन ये अधिक वसा और शर्करा के कारण स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते। दूसरी ओर, दाल, हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज और बाजरा जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ कुछ लोगों को कम स्वादिष्ट लग सकते हैं, लेकिन वे शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक होते हैं। इसलिए स्वाद के साथ-साथ पोषण का भी ध्यान रखना चाहिए।
प्रश्न 5. मेद सब्जियाँ नहीं खाता, लेकिन बिस्कुट, नूडल्स और सफेद ब्रेड खाता है। उसे पेट दर्द और कब्ज रहती है। उसे अपने आहार में क्या परिवर्तन करना चाहिए?
उत्तर – मेद को जंक फूड कम करना चाहिए तथा अपने भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियाँ, फल, सलाद, साबुत अनाज, अंकुरित अनाज और पर्याप्त पानी शामिल करना चाहिए। उसे आहारीय रेशों (रूक्षांश) से भरपूर भोजन करना चाहिए, जिससे कब्ज और पेट दर्द की समस्या दूर हो सकती है।
प्रश्न 6. रेशमा को कम रोशनी में देखने में कठिनाई हो रही थी।
(क) वह किस अभावजन्य रोग से पीड़ित है?
उत्तर -रतौंधी (Night Blindness)।
(ख) उसके आहार में किस खाद्य घटक की कमी हो सकती है?
उत्तर – विटामिन A की कमी।
(ग) चार खाद्य पदार्थों के नाम लिखिए जिन्हें उसे अपने आहार में शामिल करना चाहिए।
उत्तर –
गाजर
पालक
आम
दूध
प्रश्न 7. पोषण की दृष्टि से आप किसे चुनेंगे और क्यों?
(क) डिब्बाबंद फलों का रस
(ख) ताज़े फलों का रस
(ग) ताज़े फल
उत्तर -मैं ताज़े फल चुनूँगा, क्योंकि उनमें विटामिन, खनिज, आहारीय रेशे और प्राकृतिक पोषक तत्व सबसे अधिक मात्रा में सुरक्षित रहते हैं।
प्रश्न 8. गौरव के पैर की हड्डी टूट गई थी।
(क) चिकित्सक ने कैल्सियम की गोली क्यों दी?
उत्तर – हड्डियों को मजबूत बनाने और उन्हें जल्दी जोड़ने के लिए।
(ख) बाद में विटामिन D का सिरप क्यों दिया?
उत्तर – क्योंकि विटामिन D शरीर में कैल्सियम के अवशोषण में सहायता करता है और हड्डियों को मजबूत बनाता है।
(ग) आपके मन में क्या प्रश्न उठता है?
उत्तर (उदाहरण) – क्या केवल कैल्सियम लेने से हड्डियाँ पूरी तरह मजबूत हो जाती हैं, या विटामिन D भी आवश्यक होता है?
प्रश्न 9. चीनी कार्बोहाइड्रेट है, फिर भी आयोडीन डालने पर नीला-काला रंग क्यों नहीं होता?
उत्तर – क्योंकि आयोडीन परीक्षण केवल स्टार्च (मंड) की उपस्थिति बताता है। चीनी कार्बोहाइड्रेट है, लेकिन उसमें स्टार्च नहीं होता, इसलिए उसका रंग नहीं बदलता।
प्रश्न 10. “सभी मंड कार्बोहाइड्रेट हैं, लेकिन सभी कार्बोहाइड्रेट मंड नहीं हैं।” इस कथन की जाँच कैसे करेंगे?
उत्तर – दो खाद्य पदार्थ लें—एक जिसमें स्टार्च हो (जैसे आलू) और दूसरा जिसमें चीनी हो। दोनों पर आयोडीन परीक्षण करें। आलू नीला-काला हो जाएगा, जबकि चीनी का रंग नहीं बदलेगा। इससे सिद्ध होगा कि स्टार्च कार्बोहाइड्रेट है, पर सभी कार्बोहाइड्रेट स्टार्च नहीं होते।
प्रश्न 11. शिक्षिका की साड़ी पर आयोडीन नीला-काला हो गया, लेकिन मोज़े पर नहीं। क्यों?
उत्तर – साड़ी के कपड़े में स्टार्च लगा हो सकता है, इसलिए आयोडीन का रंग नीला-काला हो गया। मोज़े में स्टार्च नहीं था, इसलिए रंग नहीं बदला।
प्रश्न 12. मिलेट (मोटा अनाज) स्वास्थ्यप्रद क्यों माना जाता है? क्या केवल मिलेट खाने से सभी पोषण आवश्यकताएँ पूरी हो जाती हैं?
उत्तर – मिलेट में विटामिन, खनिज, कैल्सियम, आयरन और आहारीय रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इन्हें स्वास्थ्यप्रद माना जाता है। लेकिन केवल मिलेट खाने से शरीर की सभी पोषण आवश्यकताएँ पूरी नहीं होतीं। संतुलित आहार के लिए दालें, फल, सब्जियाँ, दूध, जल आदि का भी सेवन आवश्यक है।
प्रश्न 13. यदि आपको किसी विलयन का नमूना दिया जाए, तो आप कैसे जाँच करेंगे कि वह आयोडीन विलयन है या नहीं?
उत्तर – आलू या चावल जैसे स्टार्च युक्त पदार्थ पर उस विलयन की कुछ बूँदें डालेंगे। यदि पदार्थ का रंग नीला-काला हो जाए, तो वह आयोडीन विलयन है। यदि रंग में कोई परिवर्तन न हो, तो वह आयोडीन विलयन नहीं है।
अतरिक्त प्रश्नोत्तर लिखो
प्रश्न 1. भोजन हमारे लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर – भोजन हमें ऊर्जा प्रदान करता है, शरीर की वृद्धि और विकास में सहायता करता है, शरीर की टूट-फूट की मरम्मत करता है तथा रोगों से लड़ने की शक्ति देता है।
प्रश्न 2. पोषक तत्व किसे कहते हैं?
उत्तर – भोजन में उपस्थित वे तत्व जो शरीर को ऊर्जा, वृद्धि, विकास और स्वास्थ्य प्रदान करते हैं, पोषक तत्व कहलाते हैं।
प्रश्न 3. भोजन के मुख्य पोषक तत्वों के नाम लिखिए।
उत्तर –
कार्बोहाइड्रेट
प्रोटीन
वसा
विटामिन
खनिज लवण
इसके अतिरिक्त जल और आहारीय रेशे भी आवश्यक घटक हैं।
प्रश्न 4. कार्बोहाइड्रेट का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर – कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा प्रदान करने का मुख्य कार्य करते हैं।
प्रश्न 5. प्रोटीन को शरीर-वर्धक पोषक तत्व क्यों कहा जाता है?
उत्तर – क्योंकि प्रोटीन शरीर की वृद्धि, विकास तथा क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत में सहायता करता है।
प्रश्न 6. वसा का क्या कार्य है?
उत्तर – वसा शरीर को ऊर्जा देती है, शरीर को गर्म रखती है तथा ऊर्जा का भंडार बनाती है।
प्रश्न 7. विटामिन और खनिज क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर -विटामिन और खनिज शरीर को स्वस्थ रखते हैं, रोगों से बचाते हैं तथा शरीर के विभिन्न अंगों के सही कार्य में सहायता करते हैं।
प्रश्न 8. आहारीय रेशों (रूक्षांश) का क्या महत्व है?
उत्तर – आहारीय रेशे भोजन के पाचन में सहायता करते हैं तथा कब्ज जैसी समस्याओं से बचाते हैं।
प्रश्न 9. संतुलित आहार किसे कहते हैं?
उत्तर – जिस आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व, जल और आहारीय रेशे उचित मात्रा में हों, उसे संतुलित आहार कहते हैं।
प्रश्न 10. क्या सभी व्यक्तियों की पोषण आवश्यकताएँ समान होती हैं?
उत्तर – नहीं। आयु, लिंग, स्वास्थ्य, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली के अनुसार पोषण आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं।
प्रश्न 11. जंक फूड क्या है?
उत्तर – ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा और शर्करा अधिक तथा विटामिन, खनिज, प्रोटीन और रेशे कम होते हैं, जंक फूड कहलाते हैं।
प्रश्न 12. जंक फूड का अधिक सेवन क्यों नहीं करना चाहिए?
उत्तर – क्योंकि इससे मोटापा और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं।
प्रश्न 13. मिलेट (मोटा अनाज) क्या है?
उत्तर – ज्वार, बाजरा, रागी और सांवा जैसे छोटे, पौष्टिक अनाजों को मिलेट (मोटा अनाज) कहते हैं।
प्रश्न 14. मिलेट को पोषक अनाज क्यों कहा जाता है?
उत्तर – क्योंकि इनमें विटामिन, आयरन, कैल्सियम तथा आहारीय रेशे प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
प्रश्न 15. खाद्य मील (Food Mile) क्या है?
उत्तर – किसी खाद्य पदार्थ द्वारा उत्पादन के स्थान से उपभोक्ता तक तय की गई कुल दूरी को खाद्य मील कहते हैं।
प्रश्न 16. खाद्य मील कम करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर – इससे परिवहन लागत और प्रदूषण कम होता है, स्थानीय किसानों को लाभ मिलता है तथा भोजन अधिक ताज़ा मिलता है।
प्रश्न 17. आयोडीन परीक्षण किस पोषक तत्व की पहचान करता है?
उत्तर – आयोडीन परीक्षण से स्टार्च (मंड) की पहचान की जाती है।
प्रश्न 18. मूँगफली में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं?
उत्तर – मूँगफली में प्रोटीन और वसा दोनों पाए जाते हैं।
प्रश्न 19. पैकेटबंद खाद्य पदार्थ खरीदते समय क्या देखना चाहिए?
उत्तर – पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी तथा यदि उपलब्ध हो तो फोर्टीफिकेशन (प्रबलीकरण) संबंधी जानकारी अवश्य देखनी चाहिए।
प्रश्न 20. फोर्टीफाइड (प्रबलीकृत) खाद्य पदार्थ क्या होते हैं?
उत्तर – ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त पोषक तत्व मिलाए जाते हैं, फोर्टीफाइड खाद्य पदार्थ कहलाते हैं। उदाहरण – आयोडीन युक्त नमक।
प्रश्न 21. भोजन की बर्बादी क्यों नहीं करनी चाहिए?
उत्तर – भोजन खेत से थाली तक पहुँचाने में किसानों और अनेक लोगों का परिश्रम लगता है। इसलिए हमें उतना ही भोजन लेना चाहिए जितना हम खा सकें।
प्रश्न 22. स्थानीय खाद्य पदार्थ खाने का क्या लाभ है?
उत्तर – स्थानीय भोजन ताज़ा होता है, खाद्य मील कम करता है, प्रदूषण घटाता है तथा स्थानीय किसानों को सहायता प्रदान करता है।
प्रश्न 23. स्वास्थ्य के लिए कौन-सी तीन अच्छी आदतें अपनानी चाहिए?
उत्तर –
संतुलित आहार लेना।
जंक फूड से बचना।
भोजन की बर्बादी न करना।
प्रश्न 24. FSSAI क्या है?
उत्तर – भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक सरकारी संस्था है, जो भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा को नियंत्रित करती है।
प्रश्न 25. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर – हमें संतुलित और पौष्टिक भोजन करना चाहिए, जंक फूड से बचना चाहिए, भोजन का सम्मान करना चाहिए तथा भोजन की बर्बादी नहीं करनी चाहिए। स्वस्थ शरीर के लिए सही आहार सबसे महत्वपूर्ण है।
अतरिक्त दीर्घ प्रश्नोत्तर लिखो
कक्षा 6 विज्ञान (जिज्ञासा)
अध्याय 3 : उचित आहार – स्वस्थ शरीर का आधार
अतिरिक्त दीर्घ प्रश्न–उत्तर (4–5 अंक हेतु)
प्रश्न 1. संतुलित आहार क्या है? इसके महत्व को विस्तार से लिखिए।
उत्तर – संतुलित आहार वह आहार है जिसमें शरीर की आवश्यकता के अनुसार सभी आवश्यक पोषक तत्व—कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, जल तथा आहारीय रेशे उचित मात्रा में उपस्थित हों।
संतुलित आहार का महत्व –
शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देता है।
शरीर की वृद्धि और विकास में सहायता करता है।
क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करता है।
रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है।
शरीर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखता है।
बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक होता है।
इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आयु और आवश्यकता के अनुसार संतुलित आहार लेना चाहिए।
प्रश्न 2. भोजन के मुख्य पोषक तत्वों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – भोजन में निम्नलिखित मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं—
कार्बोहाइड्रेट – शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं।
प्रोटीन – शरीर की वृद्धि तथा ऊतकों की मरम्मत करते हैं।
वसा – ऊर्जा का भंडार है तथा शरीर को गर्म रखती है।
विटामिन – शरीर को स्वस्थ रखते हैं और रोगों से बचाते हैं।
खनिज लवण – हड्डियों, दाँतों और रक्त के निर्माण में सहायता करते हैं।
जल – पाचन, तापमान नियंत्रण और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है।
आहारीय रेशे – पाचन क्रिया को सुचारु रखते हैं तथा कब्ज से बचाते हैं।
इन सभी पोषक तत्वों का संतुलित मात्रा में सेवन आवश्यक है।
प्रश्न 3. प्रोटीन, विटामिन और खनिज लवण हमारे शरीर के लिए क्यों आवश्यक हैं?
उत्तर – प्रोटीन शरीर की वृद्धि और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करता है, इसलिए इसे शरीर-वर्धक पोषक तत्व कहा जाता है।
विटामिन शरीर को स्वस्थ रखते हैं तथा विभिन्न अभावजन्य रोगों से बचाते हैं। उदाहरण के लिए, विटामिन A आँखों के लिए और विटामिन D हड्डियों के लिए आवश्यक है।
खनिज लवण जैसे कैल्सियम और आयरन हड्डियों, दाँतों तथा रक्त के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इनकी कमी से शरीर में अनेक रोग हो सकते हैं, इसलिए इनका संतुलित मात्रा में सेवन आवश्यक है।
प्रश्न 4. जंक फूड क्या है? इसके अधिक सेवन से होने वाली हानियाँ लिखिए।
उत्तर – जंक फूड ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिनमें वसा, नमक और शर्करा अधिक होती है, जबकि विटामिन, खनिज, प्रोटीन और आहारीय रेशे कम होते हैं।
अधिक सेवन से होने वाली हानियाँ—
मोटापा बढ़ सकता है।
शरीर को आवश्यक पोषण नहीं मिलता।
पाचन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
लंबे समय में अनेक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए जंक फूड का सेवन कम करना चाहिए और पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रश्न 5. मिलेट (मोटा अनाज) क्या है? इसके लाभ लिखिए।
उत्तर – ज्वार, बाजरा, रागी आदि को मिलेट (मोटा अनाज) कहा जाता है।
मिलेट के लाभ—
इनमें आयरन, कैल्सियम, विटामिन और आहारीय रेशे प्रचुर मात्रा में होते हैं।
ये स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
कम पानी में भी उगाए जा सकते हैं।
किसानों के लिए उपयोगी फसल हैं।
संतुलित आहार का महत्वपूर्ण भाग हैं।
इसी कारण मिलेट को पोषक अनाज भी कहा जाता है।
प्रश्न 6. खाद्य मील (Food Mile) क्या है? इसे कम करने के क्या लाभ हैं?
उत्तर – किसी खाद्य पदार्थ के उत्पादन स्थल से उपभोक्ता तक पहुँचने में तय की गई कुल दूरी को खाद्य मील (Food Mile) कहते हैं।
खाद्य मील कम करने के लाभ—
भोजन अधिक ताज़ा मिलता है।
परिवहन पर खर्च कम होता है।
ईंधन की बचत होती है।
प्रदूषण कम होता है।
स्थानीय किसानों को लाभ मिलता है।
पर्यावरण की रक्षा होती है।
इसलिए स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग अधिक करना चाहिए।
प्रश्न 7. अभावजन्य रोग क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – जब शरीर को किसी आवश्यक पोषक तत्व की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलती, तब जो रोग उत्पन्न होते हैं उन्हें अभावजन्य रोग कहते हैं।
उदाहरण—
विटामिन A की कमी – रतौंधी
विटामिन C की कमी – स्कर्वी
विटामिन D की कमी – रिकेट्स
आयरन की कमी – एनीमिया
इन रोगों से बचने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।
प्रश्न 8. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से लिखिए।
उत्तर – यह अध्याय हमें सिखाता है कि स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार अत्यंत आवश्यक है। भोजन में सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में होने चाहिए। जंक फूड का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए और मिलेट, दालें, फल, हरी सब्जियाँ तथा स्थानीय खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए। हमें भोजन की बर्बादी नहीं करनी चाहिए तथा भोजन का सम्मान करना चाहिए। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ जीवन का आधार उचित आहार ही है।
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