अध्याय 4 : चुंबकों को जानें सारांश | Chapter 4: Getting to Know Magnets – Summary
इस अध्याय में चुंबक के बारे में विस्तार से बताया गया है। चुंबक एक ऐसी वस्तु है जो कुछ विशेष पदार्थों को अपनी ओर आकर्षित करती है। चुंबक का उपयोग हमारे दैनिक जीवन में अनेक स्थानों पर होता है। खिलौनों, कंपास, दरवाजों, मशीनों, विद्युत उपकरणों और अनेक वैज्ञानिक उपकरणों में चुंबकों का उपयोग किया जाता है। इस अध्याय में चुंबक के गुण, उसके ध्रुव, आकर्षण और प्रतिकर्षण तथा चुंबकीय दिशा-सूचक के बारे में बताया गया है।
चुंबक कई अलग-अलग आकारों में बनाए जाते हैं। छड़ चुंबक, U-आकार चुंबक, वलय चुंबक, चकती चुंबक, बेलनाकार चुंबक और गोलीय चुंबक इसके प्रमुख उदाहरण हैं। चुंबक का आकार और आकृति उसके उपयोग के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सभी चुंबकों में कुछ महत्वपूर्ण गुण समान होते हैं।
चुंबक के दो सिरे होते हैं जिन्हें चुंबकीय ध्रुव कहा जाता है। एक ध्रुव उत्तरी ध्रुव (N) और दूसरा दक्षिणी ध्रुव (S) कहलाता है। चुंबकीय ध्रुव हमेशा जोड़े में पाए जाते हैं। यदि किसी चुंबक को बीच से तोड़ दिया जाए, तो अलग-अलग उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव प्राप्त नहीं होते। प्रत्येक नए टुकड़े में भी उत्तर और दक्षिण दोनों ध्रुव बन जाते हैं। इसलिए किसी चुंबक का केवल एक ध्रुव प्राप्त करना संभव नहीं है।
चुंबक के ध्रुवों में एक महत्वपूर्ण गुण पाया जाता है। जब दो चुंबकों को पास लाया जाता है, तो समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं और विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। अर्थात् N-N और S-S के बीच प्रतिकर्षण होता है, जबकि N-S के बीच आकर्षण होता है। यह चुंबक की पहचान करने का महत्वपूर्ण गुण है।
चुंबक केवल कुछ विशेष पदार्थों को आकर्षित करता है। ऐसे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, चुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं। लोहा और स्टील इसके प्रमुख उदाहरण हैं। दूसरी ओर, लकड़ी, कागज, प्लास्टिक और काँच जैसे पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते। इन्हें अचुंबकीय पदार्थ कहा जाता है।
चुंबक के आकर्षण की शक्ति उसके सभी भागों में समान नहीं होती। सामान्यतः चुंबक के ध्रुवों के पास आकर्षण सबसे अधिक होता है। यदि छड़ चुंबक को स्टील की पिनों के ढेर के पास ले जाएँ, तो पिनें उसके सिरों के पास अधिक संख्या में चिपकती हैं। इससे पता चलता है कि चुंबकीय प्रभाव ध्रुवों के पास अधिक शक्तिशाली होता है।
चुंबक की सहायता से किसी अज्ञात चुंबक की पहचान भी की जा सकती है। यदि किसी वस्तु का एक सिरा किसी ज्ञात चुंबक के ध्रुव से आकर्षित होता है, तो केवल आकर्षण के आधार पर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि वह वस्तु चुंबक है, क्योंकि लोहे का टुकड़ा भी चुंबक की ओर आकर्षित होता है। लेकिन यदि दोनों वस्तुओं के बीच प्रतिकर्षण दिखाई दे, तो यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि दोनों चुंबक हैं। इसलिए प्रतिकर्षण चुंबक की पहचान का निश्चित परीक्षण है।
इस अध्याय में चुंबकीय दिक्सूचक (Magnetic Compass) के बारे में भी बताया गया है। दिक्सूचक में एक छोटी चुंबकीय सुई होती है, जो स्वतंत्र रूप से घूम सकती है। जब इसे स्थिर अवस्था में रखा जाता है, तो इसकी सुई लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है। इसी गुण के कारण दिक्सूचक का उपयोग दिशाओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। यदि किसी चुंबक को दिक्सूचक की सुई के पास लाया जाए, तो सुई अपनी दिशा से हट जाती है।
चुंबकीय प्रभाव कुछ अचुंबकीय पदार्थों के पार भी कार्य कर सकता है। यदि चुंबक और दिक्सूचक की सुई के बीच लकड़ी, कार्डबोर्ड, प्लास्टिक या पतली काँच की शीट रखी जाए, तो सुई के विक्षेपण में विशेष परिवर्तन नहीं होता। इससे पता चलता है कि चुंबकीय प्रभाव इन पदार्थों के आर-पार भी पहुँच सकता है।
चुंबकों का उपयोग अनेक रोचक कार्यों में किया जा सकता है। चुंबक बिना वस्तु को छुए लोहे या स्टील की वस्तुओं को आकर्षित कर सकता है। उदाहरण के लिए, पानी में गिरी स्टील की पेपर क्लिप को चुंबक की सहायता से बिना हाथ गीला किए बाहर निकाला जा सकता है। इसी प्रकार चुंबक की सहायता से स्टील की गेंदों को किसी भूलभुलैया में चलाया जा सकता है। चुंबकों का उपयोग खिलौनों और विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों में भी किया जाता है।
चुंबकों के साथ सावधानी बरतना भी आवश्यक है। उन्हें गरम नहीं करना चाहिए, हथौड़े से नहीं पीटना चाहिए और मोबाइल फोन या रिमोट जैसे उपकरणों के बहुत पास नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे चुंबक या उपकरण प्रभावित हो सकते हैं। चुंबकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें उचित ढंग से जोड़े में रखना चाहिए तथा उनके बीच लकड़ी का टुकड़ा और सिरों पर नरम लोहे के टुकड़े लगाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष:
इस अध्याय से हमें पता चलता है कि चुंबक के दो ध्रुव होते हैं—उत्तरी और दक्षिणी। समान ध्रुव प्रतिकर्षित तथा विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं। चुंबकीय पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, जबकि अचुंबकीय पदार्थ आकर्षित नहीं होते। चुंबक की शक्ति ध्रुवों के पास अधिक होती है और स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है। चुंबकीय दिक्सूचक की सहायता से दिशाओं का पता लगाया जाता है। चुंबकों के इन गुणों का हमारे दैनिक जीवन और विज्ञान में बहुत महत्व है।
पुस्तक के प्रश्नोत्तर
- निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
(क)
दो चुंबकों के विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, जबकि समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
(ख)
वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहते हैं।
(ग)
चुंबकीय दिक्सूचक की सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरती है।
(घ)
चुंबक में सदैव दो ध्रुव होते हैं।
- निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य?
(क) किसी चुंबक को टुकड़ों में तोड़कर एक ध्रुव प्राप्त किया जा सकता है।
उत्तर – असत्य (✗)
चुंबक को कितने भी टुकड़ों में तोड़ दिया जाए, प्रत्येक टुकड़े में उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुव होते हैं।
(ख) चुंबक के समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
उत्तर – सत्य (✓)
(ग) जब किसी छड़ चुंबक को लोहे के बुरादे के पास लाया जाता है, तो अधिकांश लोहे का बुरादा उसके बीच में चिपक जाता है।
उत्तर – असत्य (✗)
लोहे का बुरादा चुंबक के सिरों अर्थात् ध्रुवों पर अधिक मात्रा में चिपकता है।
(घ) स्वतंत्र रूप से लटका हुआ छड़ चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा की ओर इंगित करता है।
उत्तर – सत्य (✓)
स्वतंत्र रूप से लटकाने पर चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- स्तंभ I और स्तंभ II का मिलान कीजिए।
पुस्तक में विभिन्न चुंबकीय ध्रुवों की स्थितियाँ दी गई हैं। सही संबंध इस प्रकार है:
स्तंभ I सही उत्तर
N – N प्रतिकर्षण
N – S आकर्षण
S – N आकर्षण
S – S प्रतिकर्षण
नियम: समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण तथा विपरीत ध्रुवों में आकर्षण होता है।
- अथर्व के प्रयोग में सही विकल्प चुनिए।
अथर्व ने एक छड़ चुंबक को स्टील की पिनों के ढेर के ऊपर अलग-अलग स्थानों पर घुमाया। पुस्तक में दिए विकल्पों में सही अवलोकन है:
उत्तर – (i) 10, 2, 10
कारण: चुंबक के दोनों ध्रुवों पर चुंबकीय आकर्षण अधिक होता है, जबकि चुंबक के बीच के भाग में आकर्षण अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए दोनों सिरों पर अधिक पिन और बीच में कम पिन आकर्षित होंगी।
- बिना चिह्न वाले छड़ चुंबक के उत्तरी ध्रुव की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर – बिना चिह्न वाले छड़ चुंबक को एक धागे से बाँधकर स्वतंत्र रूप से लटका देंगे। उसे कुछ समय तक घूमने देंगे। जब चुंबक स्थिर हो जाएगा, तब उसका जो सिरा उत्तर दिशा की ओर होगा, उसे उत्तरी ध्रुव माना जाएगा और दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव होगा। स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
- चुंबकीय दिक्सूचक क्या है और इसका उपयोग किस लिए किया जाता है?
उत्तर – चुंबकीय दिक्सूचक या कंपास एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक छोटी चुंबकीय सुई लगी होती है। यह सुई स्वतंत्र रूप से घूम सकती है और स्थिर होने पर उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है। दिक्सूचक का उपयोग दिशाओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।
- चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थ क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।
उत्तर –
चुंबकीय पदार्थ:
वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, चुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं।
उदाहरण: लोहा और स्टील।
अचुंबकीय पदार्थ:
वे पदार्थ जो चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते, अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं।
उदाहरण: लकड़ी, प्लास्टिक, कागज और काँच।
- क्या चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के पार जा सकता है?
उत्तर – हाँ, चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के भीतर से होकर उनके पार जा सकता है। लकड़ी, कार्डबोर्ड, पतली प्लास्टिक शीट और पतली काँच की शीट को चुंबक और दिक्सूचक की सुई के बीच रखने पर सुई के विक्षेपण में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता। इससे पता चलता है कि चुंबकीय प्रभाव इन पदार्थों के पार जा सकता है।
- एक मिस्त्री के स्टील के पेंच बार-बार नीचे गिर रहे हैं। इस समस्या को कैसे हल किया जा सकता है?
उत्तर – मिस्त्री अपने पेंचकस के सिरे को चुंबक से चुम्बकित कर सकता है। इससे स्टील के पेंच पेंचकस के सिरे से आकर्षित होकर चिपक जाएँगे और बार-बार नीचे नहीं गिरेंगे। इस प्रकार वह आसानी से पेंच को पकड़कर मशीन की मरम्मत कर सकेगा।
- दो वलय चुंबक ‘क’ और ‘ख’ दिए गए हैं। चुंबक ‘क’ नीचे की ओर नहीं जाता है। इसका संभावित कारण क्या हो सकता है?
उत्तर – संभवतः दोनों चुंबकों के समान ध्रुव एक-दूसरे के सामने हैं। समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं, इसलिए चुंबक ‘क’ नीचे नहीं जाता।
चुंबक ‘क’ को बिना धकेले चुंबक ‘ख’ के संपर्क में लाने के लिए चुंबक ‘ख’ को उलट देना चाहिए, ताकि उसके सामने विपरीत ध्रुव आ जाएँ। विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करेंगे और चुंबक ‘क’ नीचे की ओर आ जाएगा।
परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बातें
चुंबक के दो ध्रुव—उत्तरी और दक्षिणी होते हैं।
समान ध्रुव प्रतिकर्षित करते हैं।
विपरीत ध्रुव आकर्षित करते हैं।
चुंबक को तोड़ने पर भी प्रत्येक टुकड़े में दोनों ध्रुव रहते हैं।
चुंबक के ध्रुवों पर आकर्षण सबसे अधिक होता है।
स्वतंत्र रूप से लटका चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
प्रतिकर्षण चुंबक की पहचान का निश्चित परीक्षण है।
लोहा और स्टील चुंबकीय पदार्थ हैं।
लकड़ी, कागज, प्लास्टिक और काँच अचुंबकीय पदार्थ हैं।
दिक्सूचक का उपयोग दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
कक्षा 6 विज्ञान (जिज्ञासा) अध्याय 4 : चुंबकों को जानें अतिरिक्त दीर्घ प्रश्न–उत्तर
प्रश्न 1. चुंबक के प्रमुख गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – चुंबक के कई महत्वपूर्ण गुण होते हैं—
चुंबक कुछ विशेष पदार्थों, जैसे लोहा और स्टील, को अपनी ओर आकर्षित करता है।
प्रत्येक चुंबक के दो ध्रुव होते हैं—उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)।
चुंबक के ध्रुवों पर उसका आकर्षण सबसे अधिक होता है।
समान ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
विपरीत ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
चुंबक को स्वतंत्र रूप से लटकाने पर वह लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
चुंबक को तोड़ने पर उसके छोटे-छोटे टुकड़ों में भी दोनों ध्रुव पाए जाते हैं।
इन गुणों के कारण चुंबकों का उपयोग अनेक उपकरणों और दैनिक जीवन की वस्तुओं में किया जाता है।
प्रश्न 2. चुंबक के ध्रुव क्या होते हैं? समान और विपरीत ध्रुवों के व्यवहार को समझाइए।
उत्तर – चुंबक के दोनों सिरों पर चुंबकीय प्रभाव अधिक होता है। इन सिरों को चुंबकीय ध्रुव कहते हैं। एक ध्रुव उत्तरी (N) और दूसरा दक्षिणी (S) कहलाता है।
जब दो चुंबकों को पास लाया जाता है, तो—
N और N ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
S और S ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।
N और S ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
इस प्रकार समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण और विपरीत ध्रुवों में आकर्षण होता है।
प्रश्न 3. किसी अज्ञात छड़ चुंबक के ध्रुवों की पहचान आप कैसे करेंगे?
उत्तर – अज्ञात छड़ चुंबक के ध्रुवों की पहचान करने के लिए उसे एक धागे से बाँधकर स्वतंत्र रूप से लटका सकते हैं। जब वह स्थिर हो जाएगा, तो उसका एक सिरा उत्तर दिशा की ओर और दूसरा दक्षिण दिशा की ओर होगा। उत्तर दिशा की ओर संकेत करने वाले सिरे को उत्तरी ध्रुव और दूसरे सिरे को दक्षिणी ध्रुव माना जाएगा।
किसी ज्ञात चुंबक की सहायता से भी पहचान की जा सकती है। यदि अज्ञात चुंबक का कोई सिरा ज्ञात चुंबक के किसी ध्रुव से प्रतिकर्षित होता है, तो दोनों समान ध्रुव हैं। प्रतिकर्षण यह निश्चित करता है कि अज्ञात वस्तु भी चुंबक है।
प्रश्न 4. चुंबक के ध्रुवों पर चुंबकीय आकर्षण अधिक क्यों माना जाता है? प्रयोग द्वारा समझाइए।
उत्तर – एक छड़ चुंबक लें और उसके पास लोहे की पिनें या लोहे का बुरादा रखें। देखने पर पता चलता है कि चुंबक के बीच के भाग की तुलना में उसके दोनों सिरों पर अधिक पिनें चिपकती हैं।
इससे पता चलता है कि चुंबक की चुंबकीय शक्ति उसके ध्रुवों के पास अधिक होती है। चुंबक के मध्य भाग में चुंबकीय आकर्षण अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए चुंबक के दोनों सिरों को ध्रुव कहा जाता है।
प्रश्न 5. चुंबकीय दिक्सूचक क्या है? यह किस सिद्धांत पर कार्य करता है और इसका उपयोग क्या है?
उत्तर – चुंबकीय दिक्सूचक एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक छोटी चुंबकीय सुई लगी होती है। यह सुई स्वतंत्र रूप से घूम सकती है। जब इसे स्थिर अवस्था में रखा जाता है, तो सुई लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है।
दिक्सूचक की इसी विशेषता के आधार पर दिशाओं का पता लगाया जाता है। यदि किसी चुंबक को दिक्सूचक की सुई के पास लाया जाए, तो सुई अपनी सामान्य दिशा से हट जाती है। इसलिए दिक्सूचक का उपयोग दिशा ज्ञात करने और चुंबकीय प्रभाव का अध्ययन करने में किया जाता है।
प्रश्न 6. चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों में अंतर उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर – जो पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहते हैं। उदाहरण के लिए लोहा और स्टील चुंबकीय पदार्थ हैं।
जो पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होते, उन्हें अचुंबकीय पदार्थ कहते हैं। उदाहरण के लिए लकड़ी, कागज, प्लास्टिक और काँच अचुंबकीय पदार्थ हैं।
किसी वस्तु को चुंबक के पास ले जाकर यह देखा जा सकता है कि वह आकर्षित होती है या नहीं। इस प्रकार चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों में अंतर किया जा सकता है।
प्रश्न 7. क्या चुंबकीय प्रभाव अचुंबकीय पदार्थों के आर-पार कार्य कर सकता है? प्रयोग द्वारा समझाइए।
उत्तर – हाँ, चुंबकीय प्रभाव कुछ अचुंबकीय पदार्थों के आर-पार कार्य कर सकता है।
इसके लिए चुंबक और चुंबकीय दिक्सूचक की सुई के बीच लकड़ी, कार्डबोर्ड, पतली प्लास्टिक या पतली काँच की शीट रखी जा सकती है। चुंबक को पास लाने पर दिक्सूचक की सुई फिर भी अपनी दिशा से हटती है। इससे पता चलता है कि चुंबकीय प्रभाव इन पदार्थों के आर-पार पहुँच सकता है।
प्रश्न 8. यदि किसी चुंबक को बीच से तोड़ दिया जाए तो क्या होगा? कारण सहित समझाइए।
उत्तर – यदि किसी चुंबक को बीच से तोड़ दिया जाए, तो उसका कोई एकल उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव प्राप्त नहीं होगा। प्रत्येक टुकड़ा स्वयं एक छोटा चुंबक बन जाएगा और उसमें उत्तरी तथा दक्षिणी दोनों ध्रुव होंगे।
यदि इन टुकड़ों को फिर से तोड़ा जाए, तो नए टुकड़ों में भी दोनों ध्रुव पाए जाएँगे। इससे सिद्ध होता है कि चुंबकीय ध्रुव हमेशा जोड़े में पाए जाते हैं।
प्रश्न 9. प्रतिकर्षण को चुंबक की पहचान का निश्चित परीक्षण क्यों कहा जाता है?
उत्तर – यदि किसी लोहे के टुकड़े को चुंबक के पास लाया जाए, तो वह चुंबक की ओर आकर्षित होगा। इसलिए केवल आकर्षण देखकर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि वस्तु स्वयं चुंबक है।
लेकिन यदि किसी वस्तु और ज्ञात चुंबक के बीच प्रतिकर्षण दिखाई दे, तो वह वस्तु निश्चित रूप से चुंबक होगी, क्योंकि प्रतिकर्षण केवल दो समान चुंबकीय ध्रुवों के बीच होता है। इसलिए प्रतिकर्षण चुंबक की पहचान का निश्चित परीक्षण है।
प्रश्न 10. दैनिक जीवन में चुंबकों के उपयोगों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – चुंबकों का उपयोग हमारे दैनिक जीवन में अनेक प्रकार से किया जाता है—
चुंबकीय दिक्सूचक में दिशाओं का पता लगाने के लिए।
पेंचकस के सिरे को चुम्बकित करके स्टील के पेंचों को पकड़ने के लिए।
खिलौनों में आकर्षण और प्रतिकर्षण उत्पन्न करने के लिए।
विभिन्न उपकरणों और मशीनों में।
लोहे या स्टील की वस्तुओं को बिना छुए आकर्षित करने के लिए।
पानी में गिरी स्टील की वस्तु को चुंबक की सहायता से निकालने के लिए।
इस प्रकार चुंबक विज्ञान और दैनिक जीवन दोनों में उपयोगी है।
प्रश्न 11. चुंबकों को सुरक्षित रखने के लिए किन सावधानियों का पालन करना चाहिए?
उत्तर – चुंबकों की देखभाल के लिए निम्न सावधानियाँ रखनी चाहिए—
चुंबक को अनावश्यक रूप से गरम नहीं करना चाहिए।
उसे हथौड़े से नहीं पीटना चाहिए।
चुंबक को मोबाइल फोन और अन्य संवेदनशील उपकरणों के बहुत पास नहीं रखना चाहिए।
चुंबकों को उचित तरीके से सुरक्षित रखना चाहिए।
छड़ चुंबकों को उचित व्यवस्था से रखने पर उनकी चुंबकीय शक्ति लंबे समय तक बनी रह सकती है।
इन सावधानियों से चुंबक को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।
प्रश्न 12. चुंबक का उपयोग करके पानी में गिरी स्टील की वस्तु को बिना हाथ गीला किए कैसे निकाला जा सकता है?
उत्तर – एक शक्तिशाली चुंबक लें और उसे पानी में गिरी स्टील की वस्तु के पास ले जाएँ। चुंबक स्टील की वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करेगा। अब चुंबक को धीरे-धीरे ऊपर की ओर खींचें। वस्तु चुंबक से चिपकी हुई बाहर आ जाएगी। इस प्रकार पानी में हाथ डाले बिना स्टील की वस्तु को निकाला जा सकता है। यह चुंबक के आकर्षण के गुण का दैनिक जीवन में एक उपयोग है।
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