कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 1 : सजीव जगत में विविधता | Diversity In The Living World

सरल एवं विस्तृत सारांश (परीक्षा उपयोगी)

सजीव जगत में विविधता अध्याय हमें यह समझाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी पौधे और जीव-जंतु एक जैसे नहीं होते। उनके आकार, रंग, आकृति, रहने के स्थान, भोजन, चलने-फिरने के तरीके तथा अन्य विशेषताओं में बहुत अधिक भिन्नता होती है। यही भिन्नता जैव विविधता (Biodiversity) कहलाती है। जैव विविधता प्रकृति की सबसे बड़ी विशेषता है और पृथ्वी पर जीवन को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अपने आसपास देखने पर हमें अनेक प्रकार के पेड़-पौधे, घास, झाड़ियाँ, पक्षी, कीट, पशु और जलचर दिखाई देते हैं। प्रत्येक जीव का प्रकृति में अपना विशेष स्थान और कार्य होता है। उदाहरण के लिए, पेड़ पक्षियों को भोजन और आश्रय देते हैं, जबकि पक्षी और अन्य जीव फलों के बीज दूर-दूर तक फैलाकर नए पौधों के उगने में सहायता करते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सभी जीव एक-दूसरे पर किसी न किसी रूप में निर्भर रहते हैं।

इतने अधिक प्रकार के पौधों और जीवों का अध्ययन करना आसान नहीं होता, इसलिए वैज्ञानिक उन्हें उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटते हैं। इस प्रक्रिया को समूहन (Classification) कहते हैं। समूहन से किसी जीव या पौधे की पहचान करना और उसके गुणों को समझना सरल हो जाता है। अलग-अलग लोग अलग आधारों पर भी समूह बना सकते हैं, जैसे ऊँचाई, रंग, फूलों की उपस्थिति, भोजन की आदत या रहने का स्थान।

अध्याय में पौधों का वर्गीकरण विस्तार से बताया गया है। पौधों को उनके तने, ऊँचाई और शाखाओं के आधार पर तीन मुख्य समूहों में बाँटा जाता है—शाक, झाड़ी और वृक्ष। शाक छोटे पौधे होते हैं जिनका तना हरा और कोमल होता है, जैसे टमाटर। झाड़ियाँ मध्यम ऊँचाई की होती हैं, जिनके कई कठोर तने भूमि के पास से निकलते हैं, जैसे गुलाब। वृक्ष सबसे ऊँचे होते हैं, जिनका तना मोटा, कठोर और लकड़ी जैसा होता है तथा शाखाएँ ऊँचाई पर निकलती हैं, जैसे आम का पेड़। इसके अतिरिक्त कुछ पौधे सहारे से ऊपर चढ़ते हैं जिन्हें आरोही लता तथा कुछ भूमि पर फैलते हैं जिन्हें विसर्पी लता कहते हैं।

पौधों का वर्गीकरण उनकी पत्तियों के आधार पर भी किया जाता है। कुछ पौधों की पत्तियों में जाल जैसी शिराएँ होती हैं, जिन्हें जालिकारूपी शिरा-विन्यास कहते हैं, जैसे गुड़हल। कुछ पौधों में शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर होती हैं, जिन्हें समांतर शिरा-विन्यास कहते हैं, जैसे घास और केला।

जड़ों के आधार पर पौधे दो प्रकार के होते हैं। जिन पौधों में एक मुख्य जड़ होती है और उससे छोटी-छोटी शाखाएँ निकलती हैं, उन्हें मूसला जड़ कहते हैं, जैसे सरसों और चना। जिन पौधों में तने के आधार से समान आकार की अनेक पतली जड़ें निकलती हैं, उन्हें झकड़ा (रेशेदार) जड़ कहते हैं, जैसे घास और गेहूँ। सामान्यतः जालिकारूपी शिरा-विन्यास वाले पौधों में मूसला जड़ तथा समांतर शिरा-विन्यास वाले पौधों में रेशेदार जड़ पाई जाती है।

बीजों के आधार पर भी पौधों को दो समूहों में बाँटा जाता है। जिन बीजों में दो बीजपत्र होते हैं, वे द्विबीजपत्री कहलाते हैं, जैसे चना। जिनमें एक बीजपत्र होता है, वे एकबीजपत्री कहलाते हैं, जैसे मक्का। द्विबीजपत्री पौधों में सामान्यतः जालिकारूपी शिरा-विन्यास और मूसला जड़ होती है, जबकि एकबीजपत्री पौधों में समांतर शिरा-विन्यास और रेशेदार जड़ पाई जाती है।

जीव-जंतुओं में भी बहुत विविधता होती है। उन्हें उनके चलने-फिरने के तरीके, शरीर के अंगों, भोजन और रहने के स्थान के आधार पर समूहों में बाँटा जा सकता है। कोई जीव उड़ता है, कोई चलता है, कोई कूदता है, कोई रेंगता है और कोई तैरता है। पक्षी पंखों और पैरों की सहायता से उड़ते और चलते हैं, मछली पंखों (फिन) से तैरती है, बकरी टाँगों से चलती और कूदती है, जबकि साँप रेंगता है।

पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के आवास (Habitat) पाए जाते हैं, जैसे जंगल, मरुस्थल, पर्वतीय क्षेत्र, घास के मैदान, नदियाँ, तालाब और महासागर। प्रत्येक जीव अपने आवास के अनुसार विशेष बनावट और गुण विकसित कर लेता है। इसे अनुकूलन (Adaptation) कहते हैं। उदाहरण के लिए, मरुस्थल का ऊँट चौड़े खुर, लंबे पैर और कूबड़ के कारण रेतीले क्षेत्र में आसानी से चल सकता है तथा कई दिनों तक बिना पानी के जीवित रह सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में देवदार के वृक्ष शंक्वाकार होते हैं जिससे बर्फ आसानी से फिसल जाती है। मछली का धारारेखित शरीर और पंख उसे पानी में तैरने में सहायता करते हैं।

अध्याय में यह भी बताया गया है कि आवास दो प्रकार के होते हैं—थलीय आवास और जलीय आवास। जंगल, मरुस्थल और पर्वत थलीय आवास हैं, जबकि तालाब, नदी और महासागर जलीय आवास हैं। कुछ जीव, जैसे मेंढक, जल और थल दोनों स्थानों पर रहते हैं। ऐसे जीव उभयचर कहलाते हैं। यदि किसी जीव का आवास नष्ट हो जाए, तो उसके लिए भोजन, पानी और आश्रय की कमी हो जाती है और उसकी संख्या घटने लगती है।

इस अध्याय में जैव विविधता के संरक्षण का महत्व भी समझाया गया है। मानव गतिविधियों के कारण अनेक जीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे उनकी संख्या कम होती जा रही है। बाघ, चीता और गोडावण जैसे जीवों की सुरक्षा के लिए सरकार ने विशेष संरक्षण परियोजनाएँ शुरू की हैं। साथ ही पवित्र उपवन (Sacred Groves) जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोग पौधों और जीवों की रक्षा करते हैं।

निष्कर्ष

यह अध्याय हमें सिखाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी पौधे और जीव प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी विविधता को समझने के लिए उनका वर्गीकरण आवश्यक है। प्रत्येक जीव अपने आवास के अनुसार अनुकूलित होता है और सभी जीव मिलकर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं। इसलिए हमें जैव विविधता और प्राकृतिक आवासों की रक्षा करनी चाहिए, ताकि पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित और समृद्ध बना रहे।

पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर (परीक्षा उपयोगी)

प्रश्न 1. जैव विविधता क्या है?

उत्तर – पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, जीव-जंतुओं तथा अन्य सजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं। यह प्रकृति को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रश्न 2. पौधों और जीव-जंतुओं का समूह (समूहन) क्यों बनाया जाता है?

उत्तर – पौधों और जीव-जंतुओं में अनेक समानताएँ और भिन्नताएँ होती हैं। उनका अध्ययन सरल बनाने तथा उनकी पहचान करने के लिए उन्हें समान विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटा जाता है।

प्रश्न 3. पौधों को ऊँचाई और तने के आधार पर कितने समूहों में बाँटा जाता है?

उत्तर – पौधों को तीन मुख्य समूहों में बाँटा जाता है—

शाक
झाड़ी
वृक्ष

प्रश्न 4. शाक, झाड़ी और वृक्ष में अंतर लिखिए।

उत्तर – शाक झाड़ी वृक्ष
छोटे पौधे होते हैं। मध्यम ऊँचाई के होते हैं। बहुत ऊँचे होते हैं।
तना हरा एवं कोमल होता है। तना कठोर तथा पतला होता है। तना मोटा, कठोर और लकड़ी जैसा होता है।
उदाहरण – टमाटर उदाहरण – गुलाब उदाहरण – आम

प्रश्न 5. आरोही लता और विसर्पी लता क्या होती हैं?

उत्तर – आरोही लता – जिन पौधों को ऊपर बढ़ने के लिए सहारे की आवश्यकता होती है।
विसर्पी लता – जो पौधे भूमि पर फैलकर बढ़ते हैं।

प्रश्न 6. जालिकारूपी तथा समांतर शिरा-विन्यास में अंतर लिखिए।

उत्तर – जालिकारूपी शिरा-विन्यास – पत्ती की शिराएँ जाल के समान दिखाई देती हैं। उदाहरण – गुड़हल।
समांतर शिरा-विन्यास – पत्ती की शिराएँ एक-दूसरे के समानांतर होती हैं। उदाहरण – केला, घास।

प्रश्न 7. मूसला जड़ और रेशेदार (झकड़ा) जड़ में अंतर लिखिए।

उत्तर – मूसला जड़

एक मुख्य जड़ होती है।
उससे छोटी-छोटी पार्श्व जड़ें निकलती हैं।

उदाहरण – सरसों, चना।

रेशेदार (झकड़ा) जड़

समान आकार की अनेक पतली जड़ें होती हैं।
तने के आधार से निकलती हैं।
उदाहरण – गेहूँ, घास।

प्रश्न 8. द्विबीजपत्री तथा एकबीजपत्री पौधे क्या हैं?

उत्तर – जिन पौधों के बीज में दो बीजपत्र होते हैं, वे द्विबीजपत्री कहलाते हैं। उदाहरण – चना।
जिन पौधों के बीज में एक बीजपत्र होता है, वे एकबीजपत्री कहलाते हैं। उदाहरण – मक्का।

प्रश्न 9. जीव-जंतुओं का वर्गीकरण किन आधारों पर किया जा सकता है?

उत्तर – जीव-जंतुओं का वर्गीकरण निम्न आधारों पर किया जा सकता है—

रहने का स्थान
भोजन का प्रकार
शरीर की बनावट
चलने-फिरने का तरीका
गति के लिए उपयोग किए जाने वाले अंग

प्रश्न 10. अनुकूलन (Adaptation) क्या है?

उत्तर – जीवों में पाई जाने वाली वे विशेषताएँ जो उन्हें अपने आवास में जीवित रहने में सहायता करती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं।

प्रश्न 11. आवास (Habitat) क्या है?

उत्तर – वह स्थान जहाँ कोई पौधा या जीव स्वाभाविक रूप से रहता है तथा जहाँ उसे भोजन, जल, वायु और आश्रय प्राप्त होता है, आवास कहलाता है।

प्रश्न 12. थलीय तथा जलीय आवास में अंतर लिखिए।

उत्तर –
थलीय आवास – जहाँ जीव भूमि पर रहते हैं, जैसे जंगल, पर्वत, मरुस्थल।
जलीय आवास – जहाँ जीव जल में रहते हैं, जैसे नदी, तालाब, झील और महासागर।

प्रश्न 13. उभयचर जीव किसे कहते हैं?

उत्तर – जो जीव जल और थल दोनों स्थानों पर रह सकते हैं, उन्हें उभयचर कहते हैं। उदाहरण – मेंढक।

प्रश्न 14. जैव विविधता का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

उत्तर – जैव विविधता का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि इससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है, सभी जीवों के आवास सुरक्षित रहते हैं तथा पृथ्वी पर जीवन बना रहता है।

प्रश्न 15. मरुस्थल के ऊँट में कौन-कौन से अनुकूलन पाए जाते हैं?

उत्तर – मरुस्थल के ऊँट में निम्न अनुकूलन पाए जाते हैं—

लंबे पैर
चौड़े खुर
कूबड़ में भोजन का संग्रह
कम पानी में कई दिनों तक जीवित रहने की क्षमता
बहुत कम पसीना आना तथा कम मूत्र त्यागना

प्रश्न 16. देवदार के वृक्ष में कौन-सा अनुकूलन पाया जाता है?

उत्तर – देवदार का वृक्ष शंक्वाकार होता है तथा इसकी शाखाएँ नीचे की ओर झुकी रहती हैं, जिससे बर्फ आसानी से नीचे फिसल जाती है और वृक्ष सुरक्षित रहता है।

प्रश्न 17. मछली जल में आसानी से कैसे तैरती है?

उत्तर – मछली का शरीर धारारेखित (स्ट्रीमलाइन) होता है तथा उसके पंख (फिन) उसे जल में आसानी से तैरने में सहायता करते हैं।

प्रश्न 18. आवास नष्ट होने से क्या हानि होती है?

उत्तर – आवास नष्ट होने पर जीवों को भोजन, जल और आश्रय नहीं मिल पाता। इससे उनकी संख्या घटती है और जैव विविधता को नुकसान पहुँचता है।

प्रश्न 19. पवित्र उपवन (Sacred Groves) क्या हैं?

उत्तर – पवित्र उपवन ऐसे वन क्षेत्र हैं जिनका संरक्षण स्थानीय समुदाय करता है। यहाँ पेड़ों की कटाई और जीवों को हानि पहुँचाना प्रतिबंधित होता है, जिससे जैव विविधता सुरक्षित रहती है।

प्रश्न 20. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – इस अध्याय से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सभी पौधे और जीव प्रकृति के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमें जैव विविधता, प्राकृतिक आवासों और पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए ताकि पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित बना रहे।

दीर्घ अतरिक्त प्रश्न (Long-Answer Questions)

प्रश्न 1. जैव विविधता क्या है? इसका महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – पृथ्वी पर पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के पौधों, जीव-जंतुओं और सूक्ष्मजीवों की विविधता को जैव विविधता कहते हैं। प्रत्येक जीव प्रकृति में अपना विशेष कार्य करता है। जैव विविधता पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने, भोजन शृंखला को सुरक्षित रखने तथा मानव जीवन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि जैव विविधता नष्ट हो जाए, तो अनेक जीव विलुप्त हो सकते हैं और पर्यावरण का संतुलन बिगड़ सकता है। इसलिए जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

प्रश्न 2. पौधों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है? विस्तार से समझाइए।

उत्तर – पौधों का वर्गीकरण उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर किया जाता है।

ऊँचाई और तने के आधार पर – शाक, झाड़ी और वृक्ष।
तने के आधार पर – आरोही लता तथा विसर्पी लता।
पत्तियों के आधार पर – जालिकारूपी शिरा-विन्यास तथा समांतर शिरा-विन्यास।
जड़ों के आधार पर – मूसला जड़ तथा रेशेदार (झकड़ा) जड़।
बीजपत्रों की संख्या के आधार पर – एकबीजपत्री और द्विबीजपत्री पौधे।

इस प्रकार वर्गीकरण से पौधों की पहचान और अध्ययन सरल हो जाता है।

प्रश्न 3. अनुकूलन (Adaptation) क्या है? मरुस्थल और पर्वतीय क्षेत्रों के उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर – जीवों में पाई जाने वाली वे विशेषताएँ, जो उन्हें अपने प्राकृतिक आवास में जीवित रहने में सहायता करती हैं, अनुकूलन कहलाती हैं।

मरुस्थल के अनुकूलन-

ऊँट के लंबे पैर और चौड़े खुर उसे रेत पर चलने में सहायता करते हैं।
उसके कूबड़ में भोजन संचित रहता है।
वह कम पानी में कई दिनों तक जीवित रह सकता है।

पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूलन-

देवदार का वृक्ष शंक्वाकार होता है।
इसकी शाखाएँ नीचे की ओर झुकी रहती हैं, जिससे बर्फ आसानी से नीचे फिसल जाती है।
इससे वृक्ष सुरक्षित रहता है।

इन विशेषताओं के कारण पौधे और जीव अपने-अपने आवास में आसानी से जीवित रह पाते हैं।

प्रश्न 4. आवास (Habitat) क्या है? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – वह स्थान जहाँ कोई जीव या पौधा प्राकृतिक रूप से रहता है तथा जहाँ उसे भोजन, जल, वायु और आश्रय मिलता है, आवास कहलाता है।

आवास दो प्रकार के होते हैं—

(1) थलीय आवास – जहाँ जीव भूमि पर रहते हैं।
उदाहरण – जंगल, घास के मैदान, मरुस्थल और पर्वतीय क्षेत्र।

(2) जलीय आवास – जहाँ जीव जल में रहते हैं।
उदाहरण – नदी, तालाब, झील और महासागर।

कुछ जीव जैसे मेंढक जल और थल दोनों स्थानों पर रहते हैं, इसलिए उन्हें उभयचर कहा जाता है। आवास जीवों के जीवन और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 5. आवास नष्ट होने से क्या प्रभाव पड़ता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – जब किसी जीव का आवास नष्ट हो जाता है, तो उसे भोजन, पानी और आश्रय नहीं मिल पाता। इससे उसकी संख्या घटने लगती है और कई जीव विलुप्त होने के खतरे में आ जाते हैं। आवास के नष्ट होने से जैव विविधता कम होती है तथा पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है। इसलिए वनों, जलाशयों और अन्य प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करना आवश्यक है।

प्रश्न 6. जैव विविधता के संरक्षण के लिए भारत में किए गए प्रयासों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – भारत में जैव विविधता की रक्षा के लिए अनेक प्रयास किए गए हैं।

बाघों की सुरक्षा के लिए बाघ परियोजना (Project Tiger) शुरू की गई।
चीतों के संरक्षण के लिए चीता पुनर्वास परियोजना आरंभ की गई।
गोडावण जैसे दुर्लभ पक्षियों के आवासों को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
कई स्थानों पर पवित्र उपवन (Sacred Groves) का संरक्षण स्थानीय समुदाय द्वारा किया जाता है।
राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य भी जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रश्न 7. मरुस्थल के ऊँट में पाए जाने वाले अनुकूलनों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – मरुस्थल का ऊँट कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए कई विशेष अनुकूलन रखता है।

लंबे पैर और चौड़े खुर रेत पर चलने में सहायता करते हैं।
कूबड़ में भोजन संचित रहता है।
कम मात्रा में मूत्र त्यागता है।
पसीना बहुत कम आता है।
बिना पानी पिए कई दिनों तक जीवित रह सकता है।
ये सभी विशेषताएँ उसे मरुस्थल में जीवन के लिए उपयुक्त बनाती हैं।

प्रश्न 8. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – यह अध्याय हमें सिखाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी पौधे और जीव महत्वपूर्ण हैं। प्रत्येक जीव अपने आवास के अनुसार अनुकूलित होता है और प्रकृति के संतुलन में योगदान देता है। हमें पौधों, जीव-जंतुओं और उनके आवासों की रक्षा करनी चाहिए। जैव विविधता का संरक्षण करके ही हम पृथ्वी को जीवन से भरपूर और संतुलित बनाए रख सकते हैं।


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