Study Material  कक्षा 6 –  अध्याय 13 : कार्य का महत्व | Importance of the Work

Study Material  कक्षा 6 –  अध्याय 13 : कार्य का महत्व | Importance of the Work

कार्य का महत्व : सरल एवं विस्तृत सारांश (Importance of the Work)

“कार्य का महत्व” अध्याय में कार्य (Work) के महत्व, आर्थिक तथा गैर-आर्थिक गतिविधियों, मूल्य संवर्धन (Value Addition) और समाज में सेवा कार्यों की उपयोगिता को सरल भाषा में समझाया गया है। इस अध्याय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह बताना है कि प्रत्येक कार्य का अपना महत्व होता है और समाज के विकास में सभी प्रकार के कार्य आवश्यक हैं।

अध्याय की शुरुआत अनु और कबीर की बातचीत से होती है। दोनों पार्क में खेल रहे होते हैं, तभी वे अपनी पड़ोसन गीता मौसी को भारतीय वायुसेना की वर्दी में घर लौटते हुए देखते हैं। गीता मौसी वायुसेना में पायलट (विमान चालक) हैं और देश की सेवा करती हैं। अनु अपने परिवार के अन्य सदस्यों के कार्यों के बारे में भी बताती है। उसके दादाजी सीमा सुरक्षा बल से सेवानिवृत्त होकर अब बच्चों को निःशुल्क भूगोल पढ़ाते हैं। उसके माता-पिता कपड़ों की दुकान चलाते हैं और उसकी माँ महिलाओं को सिलाई भी सिखाती हैं। उसका बड़ा भाई रोहन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है तथा सप्ताहांत में युवाओं को निःशुल्क कंप्यूटर का प्रशिक्षण देता है। इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि समाज में लोग अनेक प्रकार के कार्य करते हैं और प्रत्येक कार्य का अपना महत्व है।

इसके बाद अध्याय में आर्थिक गतिविधियों और गैर-आर्थिक गतिविधियों का अंतर समझाया गया है। आर्थिक गतिविधियाँ वे होती हैं जिनसे धन या आय प्राप्त होती है। जैसे— किसान खेती करता है, दुकानदार सामान बेचता है, डॉक्टर इलाज करता है, वकील मुकदमा लड़ता है, चालक वाहन चलाता है और श्रमिक कारखाने में काम करता है। इन सभी कार्यों के बदले उन्हें धन या पारिश्रमिक मिलता है। इसलिए इन्हें आर्थिक गतिविधियाँ कहा जाता है।

इसके विपरीत, गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे होती हैं जिनका उद्देश्य धन कमाना नहीं, बल्कि सेवा, प्रेम, सहयोग और कर्तव्य निभाना होता है। जैसे— माता-पिता का बच्चों की देखभाल करना, परिवार के लिए भोजन बनाना, दादा-दादी की सेवा करना, घर के कार्यों में सहयोग देना या किसी को निःशुल्क शिक्षा देना। इन कार्यों से आय नहीं होती, फिर भी इनका समाज और परिवार में अत्यधिक महत्व होता है।

अध्याय में यह भी बताया गया है कि एक ही व्यक्ति आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों प्रकार के कार्य कर सकता है। उदाहरण के लिए, रोहन कंपनी में नौकरी करके वेतन प्राप्त करता है, इसलिए उसका यह कार्य आर्थिक गतिविधि है। लेकिन जब वह सप्ताहांत में विद्यार्थियों को निःशुल्क कंप्यूटर सिखाता है, तो वह गैर-आर्थिक गतिविधि कहलाती है। इसी प्रकार अनु के दादाजी बच्चों को बिना किसी शुल्क के पढ़ाते हैं, जो समाज सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसके बाद अध्याय में आर्थिक गतिविधियों के प्रकार समझाने के लिए काव्या की कहानी दी गई है। काव्या अपनी चाची के गाँव जाती है। रास्ते में वह राजमार्ग (हाईवे) का निर्माण होते देखती है, जहाँ तकनीशियन और श्रमिक मशीनों से कार्य कर रहे होते हैं। उसके चाचा निर्माण कंपनी में तकनीशियन हैं और उन्हें मासिक वेतन मिलता है। उसकी चाची डाकघर में कार्य करती हैं और वेतन प्राप्त करती हैं। इसके अतिरिक्त वे शाम को विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाकर अलग से शुल्क भी कमाती हैं। वहीं खेत में काम करने वाला श्रमिक मजदूरी प्राप्त करता है, जिसमें कुछ भुगतान धन के रूप में और कुछ आमों के रूप में होता है। इससे विद्यार्थियों को वेतन, मजदूरी और वस्तु के रूप में भुगतान की जानकारी मिलती है।

अध्याय में मूल्य संवर्धन (Value Addition) की अवधारणा भी सरल उदाहरण से समझाई गई है। राजेश नामक बढ़ई ₹600 की लकड़ी खरीदकर उससे कुर्सी बनाता है और उसे ₹1000 में बेचता है। लकड़ी और कुर्सी के मूल्य में जो अंतर है, वह उसके कौशल, समय और मेहनत का मूल्य है। अर्थात किसी वस्तु को अधिक उपयोगी बनाकर उसके मूल्य में वृद्धि करना मूल्य संवर्धन कहलाता है। यही आर्थिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण विशेषता है।

अध्याय आगे बताता है कि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ भी जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद और चर्च जैसे धार्मिक स्थलों पर सेवा कार्य किए जाते हैं। गुरुद्वारों में लंगर के माध्यम से सभी लोगों को निःशुल्क भोजन कराया जाता है। इन कार्यों से समाज में सेवा, समानता, सहयोग और मानवता की भावना विकसित होती है।

इसके बाद सामुदायिक सहभागिता का महत्व बताया गया है। स्वच्छ भारत अभियान इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसमें नागरिक मिलकर अपने घर, गली, सड़क, पार्क और सार्वजनिक स्थानों की सफाई करते हैं। इसी प्रकार वन महोत्सव के माध्यम से लोग मिलकर वृक्षारोपण करते हैं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। ऐसे सामूहिक प्रयास समाज को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाते हैं।

अध्याय के अंत में विद्यार्थियों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया गया है कि वे अपने परिवार और समाज में कौन-कौन सी आर्थिक तथा गैर-आर्थिक गतिविधियाँ देखते हैं और उनमें किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि समाज केवल धन कमाने वाले कार्यों से नहीं चलता, बल्कि सेवा, सहयोग, प्रेम और निःस्वार्थ कार्य भी समाज को मजबूत बनाते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

यह अध्याय हमें सिखाता है कि हर प्रकार का कार्य सम्मान के योग्य है। आर्थिक गतिविधियाँ व्यक्ति की आय बढ़ाती हैं और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ समाज में प्रेम, सहयोग, सेवा और मानवीय मूल्यों का विकास करती हैं। मूल्य संवर्धन, ईमानदारी, परिश्रम और सामुदायिक सहभागिता किसी भी समाज की प्रगति के आधार हैं। इसलिए हमें हर कार्य का सम्मान करना चाहिए, मेहनत से कार्य करना चाहिए और समाज की भलाई के लिए निःस्वार्थ सेवा में भी भाग लेना चाहिए।

पुस्तक में दिए गए प्रश्नों के उत्तर

प्रश्न 1. आर्थिक गतिविधियाँ किस प्रकार गैर-आर्थिक गतिविधियों से भिन्न होती हैं?

उत्तर – आर्थिक गतिविधियाँ गैर-आर्थिक गतिविधियाँ
इनका उद्देश्य आय या धन अर्जित करना होता है। इनका उद्देश्य सेवा, प्रेम, सहयोग और कर्तव्य निभाना होता है।
इन कार्यों के बदले वेतन, मजदूरी, लाभ या शुल्क मिलता है। इन कार्यों के बदले कोई धन या पारिश्रमिक नहीं मिलता।
ये देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देती हैं। ये समाज और परिवार में प्रेम, सहयोग तथा मानवीय मूल्यों को बढ़ाती हैं।
उदाहरण— किसान, डॉक्टर, दुकानदार, वकील, चालक आदि। उदाहरण— माता-पिता द्वारा बच्चों की देखभाल, दादा-दादी की सेवा, निःशुल्क शिक्षा देना आदि।

इस प्रकार आर्थिक गतिविधियों में धन का लेन-देन होता है, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ निःस्वार्थ सेवा और सहयोग पर आधारित होती हैं।

प्रश्न 2. लोग किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर – लोग अपनी योग्यता, कौशल और आवश्यकता के अनुसार अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में सम्मिलित होते हैं। इन कार्यों के बदले उन्हें वेतन, मजदूरी, लाभ या शुल्क प्राप्त होता है।

उदाहरण—

किसान खेती करके फसल बेचते हैं।
दुकानदार वस्तुओं की बिक्री करते हैं।
डॉक्टर रोगियों का उपचार करते हैं।
वकील कानूनी सलाह और मुकदमे लड़ते हैं।
शिक्षक विद्यालयों में पढ़ाते हैं।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर कंप्यूटर कार्यक्रम बनाते हैं।
डाकघर के कर्मचारी डाक सेवाएँ प्रदान करते हैं।
तकनीशियन मशीनों का संचालन करते हैं।
श्रमिक कारखानों और खेतों में कार्य करते हैं।

इन सभी कार्यों के बदले धन प्राप्त होता है, इसलिए ये आर्थिक गतिविधियाँ कहलाती हैं।

प्रश्न 3. सामुदायिक सेवा गतिविधियों में लगे लोग अत्यधिक सम्माननीय हैं। इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर – सामुदायिक सेवा करने वाले लोग बिना किसी स्वार्थ के समाज की भलाई के लिए कार्य करते हैं। वे लोगों की सहायता करते हैं, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक कल्याण जैसे कार्यों में योगदान देते हैं।

उदाहरण के लिए गुरुद्वारों में लंगर सेवा, स्वच्छ भारत अभियान, वन महोत्सव तथा निःशुल्क शिक्षा देना समाज सेवा के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। ऐसे कार्यों से समाज में प्रेम, सहयोग, भाईचारा और मानवता की भावना बढ़ती है।

इसी कारण सामुदायिक सेवा करने वाले लोग समाज में अत्यधिक सम्मान के पात्र होते हैं।

प्रश्न 4. विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को किस-किस प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है? उदाहरण दीजिए।

उत्तर – आर्थिक गतिविधियों के लिए लोगों को विभिन्न प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है।

वेतन (Salary) – जैसे शिक्षक, डाकघर कर्मचारी, सरकारी अधिकारी और सॉफ्टवेयर इंजीनियर को प्रतिमाह वेतन मिलता है।
मजदूरी (Wages) – जैसे खेतों, कारखानों और निर्माण कार्यों में काम करने वाले श्रमिकों को मजदूरी मिलती है।
शुल्क (Fees) – जैसे डॉक्टर, वकील और निजी शिक्षक अपनी सेवाओं के बदले शुल्क लेते हैं।
लाभ (Profit) – जैसे दुकानदार और व्यापारी वस्तुओं की बिक्री से लाभ कमाते हैं।
वस्तु के रूप में भुगतान (Payment in Kind) – जैसे खेत में काम करने वाले श्रमिक को धन के साथ-साथ आम या अन्य वस्तुएँ भी पारिश्रमिक के रूप में मिल सकती हैं।

इस प्रकार लोगों को उनके कार्य के अनुसार अलग-अलग प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (परीक्षा उपयोगी)

प्रश्न 1. कार्य (Work) क्या है?

उत्तर – मनुष्य द्वारा किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया शारीरिक या मानसिक प्रयास कार्य कहलाता है।

प्रश्न 2. आर्थिक गतिविधि क्या है?

उत्तर – जिस कार्य से धन या आय प्राप्त होती है, उसे आर्थिक गतिविधि कहते हैं।

प्रश्न 3. गैर-आर्थिक गतिविधि क्या है?

उत्तर – जिस कार्य का उद्देश्य धन कमाना नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग या कर्तव्य निभाना हो, उसे गैर-आर्थिक गतिविधि कहते हैं।

प्रश्न 4. आर्थिक गतिविधियों के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर – किसान द्वारा खेती करना।
डॉक्टर द्वारा रोगियों का उपचार करना।

प्रश्न 5. गैर-आर्थिक गतिविधियों के दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर –
माता-पिता द्वारा बच्चों की देखभाल करना।
किसी को निःशुल्क शिक्षा देना।

प्रश्न 6. क्या एक व्यक्ति आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों प्रकार के कार्य कर सकता है?

उत्तर – हाँ। एक व्यक्ति नौकरी करके वेतन कमा सकता है और साथ ही समाज सेवा के लिए निःशुल्क कार्य भी कर सकता है।

प्रश्न 7. रोहन कौन-सा आर्थिक कार्य करता है?

उत्तर – रोहन सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करता है और वेतन प्राप्त करता है।

प्रश्न 8. रोहन कौन-सा गैर-आर्थिक कार्य करता है?

उत्तर – वह सप्ताहांत में युवाओं को निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण देता है।

प्रश्न 9. अनु के दादाजी समाज की सेवा कैसे करते हैं?

उत्तर – वे सेवानिवृत्ति के बाद बच्चों को निःशुल्क भूगोल पढ़ाते हैं।

प्रश्न 10. मूल्य संवर्धन (Value Addition) क्या है?

उत्तर – किसी वस्तु को अधिक उपयोगी बनाकर उसके मूल्य में वृद्धि करना मूल्य संवर्धन कहलाता है।

प्रश्न 11. मूल्य संवर्धन का एक उदाहरण दीजिए।

उत्तर – लकड़ी से कुर्सी बनाकर उसे अधिक मूल्य पर बेचना मूल्य संवर्धन का उदाहरण है।

प्रश्न 12. मजदूरी किसे कहते हैं?

उत्तर – श्रमिकों को उनके कार्य के बदले दिया जाने वाला पारिश्रमिक मजदूरी कहलाता है।

प्रश्न 13. वेतन किसे कहते हैं?

उत्तर – किसी कर्मचारी को नियमित रूप से प्रतिमाह दिया जाने वाला पारिश्रमिक वेतन कहलाता है।

प्रश्न 14. शुल्क (Fees) किसे कहते हैं?

उत्तर – डॉक्टर, वकील या शिक्षक जैसी सेवाओं के बदले प्राप्त धनराशि को शुल्क कहते हैं।

प्रश्न 15. लाभ (Profit) क्या होता है?

उत्तर – व्यापार में वस्तुओं को बेचकर प्राप्त अतिरिक्त आय को लाभ कहते हैं।

प्रश्न 16. वस्तु के रूप में पारिश्रमिक क्या होता है?

उत्तर – जब कार्य के बदले धन के स्थान पर वस्तुएँ दी जाती हैं, तो उसे वस्तु के रूप में पारिश्रमिक कहते हैं।

प्रश्न 17. सामुदायिक सेवा क्या है?

उत्तर – समाज के हित के लिए निःस्वार्थ भाव से किया गया कार्य सामुदायिक सेवा कहलाता है।

प्रश्न 18. स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य क्या है?

उत्तर – देश को स्वच्छ बनाना तथा लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

प्रश्न 19. वन महोत्सव क्यों मनाया जाता है?

उत्तर – वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए वन महोत्सव मनाया जाता है।

प्रश्न 20. गुरुद्वारे के लंगर से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – लंगर हमें सेवा, समानता, सहयोग और मानवता की शिक्षा देता है।

प्रश्न 21. प्रत्येक कार्य का सम्मान क्यों करना चाहिए?

उत्तर – क्योंकि हर कार्य समाज और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है।

प्रश्न 22. समाज में सेवा कार्यों का क्या महत्व है?

उत्तर – सेवा कार्यों से प्रेम, सहयोग, भाईचारा और सामाजिक एकता बढ़ती है।

प्रश्न 23. आर्थिक गतिविधियाँ देश के विकास में कैसे सहायक हैं?

उत्तर – इनसे उत्पादन, रोजगार और आय बढ़ती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

प्रश्न 24. गैर-आर्थिक गतिविधियाँ क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर – वे समाज में मानवीय मूल्यों, सहयोग और सेवा की भावना विकसित करती हैं।

प्रश्न 25. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – हमें हर प्रकार के कार्य का सम्मान करना चाहिए, ईमानदारी और परिश्रम से काम करना चाहिए तथा समाज सेवा में भी योगदान देना चाहिए।

प्रश्न 26. कार्य और परिश्रम का क्या संबंध है?

उत्तर – किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए परिश्रम आवश्यक है।

प्रश्न 27. समाज में सभी व्यवसायों का सम्मान क्यों होना चाहिए?

उत्तर – क्योंकि प्रत्येक व्यवसाय समाज की किसी न किसी आवश्यकता को पूरा करता है और देश के विकास में योगदान देता है।

प्रश्न 28. क्या बिना वेतन के किया गया कार्य भी महत्वपूर्ण है?

उत्तर – हाँ। बिना वेतन के किए गए सेवा कार्य समाज और परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं।

प्रश्न 29. सामुदायिक सहभागिता से क्या लाभ होते हैं?

उत्तर – इससे स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सहयोग और नागरिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है।

प्रश्न 30. एक आदर्श नागरिक कार्य के प्रति कैसा दृष्टिकोण रखता है?

उत्तर – एक आदर्श नागरिक सभी कार्यों का सम्मान करता है, ईमानदारी और मेहनत से अपना कार्य करता है तथा समाज की भलाई के लिए निःस्वार्थ सेवा में भी भाग लेता है।

दीर्घ प्रश्न उत्तर लिखो (परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण)

प्रश्न 1. कार्य का क्या महत्व है? विस्तारपूर्वक लिखिए।

उत्तर – कार्य मनुष्य के जीवन का आधार है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने तथा समाज और देश के विकास में योगदान देने के लिए कार्य करता है। कार्य से व्यक्ति आत्मनिर्भर बनता है, उसकी आय बढ़ती है तथा उसके जीवन स्तर में सुधार होता है।

कार्य केवल धन कमाने का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और परिश्रम की भावना भी विकसित करता है। समाज में किसान, शिक्षक, डॉक्टर, सैनिक, इंजीनियर, व्यापारी और श्रमिक जैसे सभी लोग अपने-अपने कार्यों से समाज की सेवा करते हैं।

इस प्रकार प्रत्येक कार्य का सम्मान करना चाहिए क्योंकि सभी कार्य समाज और राष्ट्र की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

प्रश्न 2. आर्थिक गतिविधियाँ और गैर-आर्थिक गतिविधियाँ क्या हैं? दोनों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – आर्थिक गतिविधियाँ वे होती हैं जिनसे व्यक्ति को धन या आय प्राप्त होती है। जैसे—किसान खेती करता है, डॉक्टर उपचार करता है, दुकानदार व्यापार करता है तथा शिक्षक नौकरी करके वेतन प्राप्त करता है।

गैर-आर्थिक गतिविधियाँ वे होती हैं जिनका उद्देश्य धन कमाना नहीं, बल्कि सेवा, सहयोग, प्रेम और कर्तव्य निभाना होता है। जैसे—माता-पिता द्वारा बच्चों की देखभाल करना, दादा-दादी की सेवा करना तथा किसी को निःशुल्क शिक्षा देना।

अंतर

आर्थिक गतिविधियों से आय प्राप्त होती है, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियों से आय नहीं होती।
आर्थिक गतिविधियाँ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती हैं, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ समाज में मानवीय मूल्यों और सहयोग की भावना विकसित करती हैं।
आर्थिक गतिविधियाँ व्यवसाय से जुड़ी होती हैं, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी होती हैं।

दोनों प्रकार की गतिविधियाँ समाज के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 3. आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न प्रकार तथा पारिश्रमिक के रूपों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से व्यक्ति धन अर्जित करता है। इन कार्यों के बदले अलग-अलग प्रकार से पारिश्रमिक दिया जाता है।

पारिश्रमिक के प्रमुख रूप—

वेतन (Salary) – सरकारी एवं निजी कर्मचारियों को प्रतिमाह दिया जाता है।
मजदूरी (Wages) – श्रमिकों को उनके कार्य के अनुसार दी जाती है।
शुल्क (Fees) – डॉक्टर, वकील तथा निजी शिक्षक अपनी सेवाओं के बदले शुल्क लेते हैं।
लाभ (Profit) – व्यापारी वस्तुओं की खरीद-बिक्री से लाभ कमाते हैं।
वस्तु के रूप में भुगतान – कभी-कभी कार्य के बदले धन के साथ वस्तुएँ भी दी जाती हैं।

इन सभी प्रकार के पारिश्रमिक से व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।

प्रश्न 4. मूल्य संवर्धन (Value Addition) क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर – जब किसी वस्तु को अधिक उपयोगी या आकर्षक बनाकर उसके मूल्य में वृद्धि की जाती है, तो इसे मूल्य संवर्धन कहते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि एक बढ़ई ₹600 की लकड़ी खरीदकर उससे सुंदर कुर्सी बनाता है और उसे ₹1000 में बेचता है, तो लकड़ी को उपयोगी वस्तु में बदलने से उसका मूल्य बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ मूल्य बढ़ई के कौशल, परिश्रम और समय का परिणाम होता है।

मूल्य संवर्धन से वस्तु का उपयोग बढ़ता है, उसकी कीमत बढ़ती है और उत्पादक की आय में वृद्धि होती है। यह आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार है।

प्रश्न 5. सामुदायिक सेवा का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – सामुदायिक सेवा वह कार्य है जो समाज के हित के लिए निःस्वार्थ भाव से किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों की सहायता करना और समाज को बेहतर बनाना होता है।

स्वच्छ भारत अभियान, वन महोत्सव, गुरुद्वारे का लंगर, रक्तदान, निःशुल्क शिक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य सामुदायिक सेवा के उदाहरण हैं।

सामुदायिक सेवा से समाज में सहयोग, भाईचारा, समानता, प्रेम और मानवता की भावना विकसित होती है। यह नागरिकों को अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराती है तथा समाज को संगठित और सशक्त बनाती है।

प्रश्न 6. प्रत्येक कार्य का सम्मान क्यों करना चाहिए? विस्तारपूर्वक लिखिए।

उत्तर – समाज का प्रत्येक कार्य महत्वपूर्ण होता है। किसान भोजन उगाता है, शिक्षक शिक्षा देता है, डॉक्टर स्वास्थ्य की रक्षा करता है, सैनिक देश की सुरक्षा करता है और सफाई कर्मचारी स्वच्छ वातावरण बनाए रखते हैं। यदि इनमें से कोई भी कार्य न हो, तो समाज का सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है। किसी भी कार्य को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए। सभी कार्य परिश्रम, ईमानदारी और जिम्मेदारी से किए जाते हैं तथा समाज के विकास में योगदान देते हैं।

इसलिए हमें सभी व्यवसायों और कार्यों का सम्मान करना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति के श्रम की कद्र करनी चाहिए।

प्रश्न 7. स्वच्छ भारत अभियान और वन महोत्सव का महत्व बताइए।

उत्तर – स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य देश को स्वच्छ बनाना, लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना है। वन महोत्सव का उद्देश्य अधिक से अधिक वृक्ष लगाना, पर्यावरण की रक्षा करना तथा लोगों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। इन दोनों अभियानों में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इनके माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ और हरित वातावरण का निर्माण होता है तथा समाज में सामुदायिक सहयोग की भावना मजबूत होती है।

प्रश्न 8. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर – यह अध्याय हमें सिखाता है कि प्रत्येक कार्य का अपना महत्व है और सभी कार्य सम्मान के योग्य हैं। आर्थिक गतिविधियाँ व्यक्ति और देश की आर्थिक उन्नति में सहायक होती हैं, जबकि गैर-आर्थिक गतिविधियाँ समाज में सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को बढ़ाती हैं।

हमें मेहनत, ईमानदारी और लगन से अपना कार्य करना चाहिए। साथ ही समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक गतिविधियों में भी भाग लेना चाहिए। जब हम अपने कार्य को पूरी निष्ठा से करते हैं और दूसरों के कार्य का सम्मान करते हैं, तभी एक समृद्ध और सशक्त समाज का निर्माण होता है।


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