Daily Current Affairs ईरान-अमेरिका संघर्ष की तपिश: भारतीय तट के पास डूबा ईरानी युद्धपोत और गहराता ऊर्जा संकट – क्या भारत की चुप्पी कूटनीतिक रणनीति है?
- ईरान के शहीद (Shahed) ड्रोंस द्वारा कतर के अल उदैद एयरबेस पर अमेरिका के $1.1 बिलियन के रडार को नष्ट करने की जानकारी।
- ईरान की ‘टिड्डी’ (Locust) रणनीति, जहाँ सस्ते ड्रोन के खिलाफ अमेरिका को महंगी मिसाइलें (THAAD, Patriot) खर्च करनी पड़ रही हैं।
- ईरान में आए 4.6 तीव्रता के भूकंप और उसके परमाणु परीक्षण से जुड़े होने की संभावना।
- ईरान के पास 10 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) की स्थिति
- भारत के पास केवल 25 दिन का तेल रिजर्व बचने की खबर और राज्यसभा में दिए गए 74 दिनों के रिजर्व के दावे पर विवाद।
- कतर द्वारा भारत को गैस (LNG) की सप्लाई रोकने और सीएनजी/पीएनजी की कीमतें बढ़ने का खतरा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और वहां फंसे 3200 तेल के जहाजों की स्थिति।
- विकल्प के रूप में रूस और वेनेजुएला से तेल आपूर्ति की संभावनाएं
- आईआरआईएस देना (IRIS Dena) युद्धपोत का अमेरिकी ओहायो क्लास सबमरीन द्वारा टॉरपीडो से डुबोया जाना।
- यह जहाज भारत के ‘मिलन 2026’ अभ्यास से लौट रहा था, जिसका निरीक्षण भारतीय राष्ट्रपति ने किया था।
- घटना पर भारत की चुप्पी और श्रीलंका द्वारा 32 ईरानी सैनिकों को बचाए जाने का विवरण।
- विशेषज्ञों (जैसे एडमिरल अरुण प्रकाश) द्वारा भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर उठाए गए सवाल
नई दिल्ली/दुबई: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी आहट हिंद महासागर और भारत की अर्थव्यवस्था तक पहुँच गई है। हालिया घटनाक्रमों में ईरानी युद्धपोत का डूबना, अरबों डॉलर के अमेरिकी रडार सिस्टम का नष्ट होना और भारत में तेल-गैस की संभावित किल्लत ने वैश्विक भू-राजनीति में खलबली मचा दी है।
1. भारतीय तट के पास ‘IRIS देना’ का जलसमाधि लेना
ईरान का आधुनिक युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ (IRIS Dena), जो भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘मिलन 2026’ नौसैनिक अभ्यास में भाग लेकर लौट रहा था, श्रीलंका के गाले (Galle) के पास एक अमेरिकी हमले का शिकार हो गया। अमेरिकी नौसेना की ओहायो क्लास (Ohio-class) पनडुब्बी ने मार्क 48 टॉरपीडो का उपयोग कर इस जहाज को निशाना बनाया, जिसमें 100 से अधिक ईरानी सैनिकों के मारे जाने की आशंका है।
इस घटना ने भारत के लिए कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि जो भारत खुद को हिंद महासागर का ‘नेट सुरक्षा प्रदाता’ मानता है, उसने अपने ‘अतिथि’ जहाज की डूबते समय मानवीय सहायता क्यों नहीं की? वहीं, ईरान ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिका को इस “बिना चेतावनी” की गई कार्रवाई का पछतावा होगा।
2. ईरान की ‘टिड्डी’ रणनीति: $20,000 का ड्रोन बनाम $1.1 बिलियन का रडार
युद्ध के मैदान में ईरान ने एक अनोखी सामरिक बढ़त हासिल की है। ईरान के सस्ते ‘शहीद’ (Shahed) ड्रोंस ने कतर के अल उदैद एयरबेस पर तैनात अमेरिका के $1.1 बिलियन की कीमत वाले ‘अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम’ को नष्ट कर दिया है। यह रडार अमेरिका की “आंख” माना जाता था, जो 5000 किमी तक की मिसाइलों को ट्रैक कर सकता था।
ईरान की इस रणनीति को ‘टिड्डियों का हमला’ कहा जा रहा है, जहाँ वह सैकड़ों सस्ते ड्रोन भेजकर अमेरिका के महंगे थार (THAAD) और पेट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को पंगु बना रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका को इन छोटे ड्रोंस को गिराने के लिए करोड़ों की मिसाइलें खर्च करनी पड़ रही हैं, जिससे उस पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
3. क्या ईरान ने कर लिया है परमाणु परीक्षण?
युद्ध के बीच ईरान में आए 4.6 तीव्रता के भूकंप ने दुनिया भर की खुफिया एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। यह भूकंप ईरान के उन रेगिस्तानी इलाकों में महसूस किया गया, जहाँ परमाणु गतिविधियों की संभावना रहती है। आईएईए (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास पर्याप्त संवर्धित यूरेनियम है और वह किसी भी समय परमाणु बम तैयार करने की स्थिति में पहुँच सकता है। यदि यह भूकंप वास्तव में एक परमाणु परीक्षण था, तो यह इजरायल और अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित होगा।
4. भारत पर प्रभाव: तेल का रिजर्व और गैस की सप्लाई
इस युद्ध का सीधा असर भारतीय आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हो गई है, जहाँ लगभग 3200 तेल के जहाज फंसे हुए हैं।
- तेल का संकट: रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के पास केवल 25 दिन का कच्चे तेल का रिजर्व बचा है। हालांकि, सरकार ने पहले राज्यसभा में 74 दिनों के रिजर्व का दावा किया था, जिस पर अब विपक्ष सवाल उठा रहा है।
- गैस की किल्लत: भारत की गैस जरूरतों का 40% पूरा करने वाले कतर ने गैस उत्पादन और सप्लाई रोक दी है। इससे आने वाले दिनों में सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की कीमतें बढ़ सकती हैं।
भारत के पास क्या हैं विकल्प?
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत अब रूस और वेनेजुएला जैसे देशों की ओर देख रहा है। रूस ने आश्वासन दिया है कि वह भारत की जरूरतों के लिए तेल सप्लाई जारी रखेगा। भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को 40 से अधिक देशों में विविधतापूर्ण (Diversify) किया है, जो इस संकट के समय में एक सुरक्षा कवच का काम कर सकता है।
निष्कर्ष: ईरान-अमेरिका का यह संघर्ष अब एक “क्षेत्रीय युद्ध” से बढ़कर वैश्विक आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।
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