Study Material कक्षा 6 – अध्याय 12 : आधारभूत लोकतंत्र – भाग 3 : नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार | Grassroots Democracy – Part 3: Local Government in Urban Areas
सरल एवं विस्तृत सारांश
अध्याय “आधारभूत लोकतंत्र – भाग 3 :
नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार” में शहरों और कस्बों में कार्य करने वाली स्थानीय सरकारों के बारे में विस्तार से बताया गया है। जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्थानीय शासन का कार्य करती है, उसी प्रकार नगरों और महानगरों में नगर पंचायत, नगरपालिका तथा नगर निगम स्थानीय प्रशासन का संचालन करते हैं। इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा शहरों का सुव्यवस्थित विकास करना है।
अध्याय की शुरुआत इंदौर शहर के उदाहरण से होती है। इंदौर को लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया। यह उपलब्धि केवल नगर निगम के प्रयासों से नहीं, बल्कि नागरिकों के सक्रिय सहयोग से संभव हुई। इससे यह स्पष्ट होता है कि किसी भी शहर की स्वच्छता और विकास में सरकार के साथ-साथ नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक होती है।
इसके बाद अध्याय में नगरीय स्थानीय निकायों का परिचय दिया गया है। भारत में नगरों की जनसंख्या के आधार पर तीन प्रकार की स्थानीय सरकारें होती हैं—
नगर पंचायत – 1 लाख से कम जनसंख्या वाले कस्बों और छोटे नगरों के लिए।
नगरपालिका (Municipal Council) – 1 लाख से 10 लाख तक की जनसंख्या वाले नगरों के लिए।
नगर निगम (Municipal Corporation / महानगर निगम) – 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों के लिए।
इन तीनों संस्थाओं का उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्र के नागरिकों को आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराना तथा विकास कार्यों का संचालन करना है।
अध्याय में आगे समीर और अनीता के बीच संवाद के माध्यम से गाँव और शहर के जीवन की तुलना की गई है। अनीता बताती है कि शहरों में ऊँची इमारतें, भीड़-भाड़, तेज़ जीवनशैली और अधिक जनसंख्या होती है। लोग अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं और कई बार अपने पड़ोसियों को भी अच्छी तरह नहीं जानते। दूसरी ओर समीर बताता है कि गाँवों में लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं, एक-दूसरे की सहायता करते हैं, मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं और सामूहिक रूप से निर्णय लेते हैं। इस संवाद से यह समझाया गया है कि गाँव और शहर की जीवनशैली अलग हो सकती है, लेकिन दोनों स्थानों पर स्थानीय सरकार नागरिकों की सहायता करती है।
अध्याय में यह भी बताया गया है कि नगरों में यदि कोई दुर्घटना, प्राकृतिक आपदा या अन्य समस्या आती है, तो स्थानीय सरकार और नागरिक मिलकर उसका समाधान करते हैं। उदाहरण के रूप में भारी वर्षा के कारण मकान गिरने की घटना का उल्लेख किया गया है, जिसमें स्थानीय लोगों ने एक-दूसरे की सहायता की। इससे यह संदेश मिलता है कि सामाजिक सहयोग और नागरिक जिम्मेदारी लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार हैं।
इसके बाद अध्याय में नगरीय स्थानीय निकायों के प्रमुख कार्यों का उल्लेख किया गया है। ये संस्थाएँ शहरों में सफाई, कचरा प्रबंधन, पेयजल आपूर्ति, सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, सीवर व्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पार्कों का रख-रखाव, जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण, भवन निर्माण की अनुमति तथा अग्निशमन जैसी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। इनके बिना किसी भी नगर का सुचारु संचालन संभव नहीं है।
अध्याय यह भी बताता है कि नगरीय स्थानीय निकाय अपने कार्यों के लिए विभिन्न स्रोतों से धन प्राप्त करते हैं। इनमें संपत्ति कर, जल कर, व्यापारिक लाइसेंस शुल्क, पार्किंग शुल्क, विज्ञापन शुल्क तथा सरकार द्वारा दी जाने वाली अनुदान राशि शामिल होती है। कुछ सेवाओं के लिए नागरिकों से निर्धारित शुल्क भी लिया जाता है। इसी धन से नगरों में विकास कार्य किए जाते हैं और नागरिक सुविधाओं का विस्तार होता है।
लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव कराने से नहीं होती, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से होती है। इसलिए अध्याय में बताया गया है कि नगरों के नागरिक अपने क्षेत्र के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। ये प्रतिनिधि नगर पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम में नागरिकों की समस्याएँ उठाते हैं और उनके समाधान के लिए कार्य करते हैं। यदि नागरिक जागरूक रहें, शिकायतें दर्ज कराएँ, बैठकों में भाग लें और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, तो स्थानीय शासन अधिक प्रभावी बनता है।
अध्याय में एक उदाहरण दिया गया है जिसमें कुछ बच्चों ने बिजली का एक खतरनाक तार नीचे लटका हुआ देखा। उन्होंने इसकी सूचना संबंधित प्रतिनिधि को दी और बिजली का खंभा सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि बच्चे भी जागरूक नागरिक बनकर समाज की सुरक्षा और विकास में योगदान दे सकते हैं। लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की आवाज़ महत्वपूर्ण होती है।
अध्याय के अंत में यह बताया गया है कि ग्रामीण और नगरीय दोनों क्षेत्रों में स्थानीय सरकार लोकतंत्र की नींव है। दोनों स्थानों पर नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और स्थानीय विकास में भाग लेते हैं। अंतर केवल इतना है कि गाँवों में ग्राम पंचायत कार्य करती है, जबकि शहरों में नगर पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम कार्य करते हैं।
निष्कर्ष
यह अध्याय हमें सिखाता है कि नगरीय स्थानीय सरकार शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम नागरिकों को स्वच्छता, पेयजल, सड़क, प्रकाश, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाएँ प्रदान करते हैं। इन संस्थाओं की सफलता नागरिकों के सहयोग, जागरूकता और जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। यदि नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करें, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें और स्थानीय शासन में सक्रिय भाग लें, तो शहर अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित बन सकते हैं। यही इस अध्याय का मुख्य संदेश है।
पुस्तक के प्रश्नों के उत्तर
प्रश्न 1. विद्यालय आते हुए आप और आपके मित्र पाते हैं कि जल के एक पाइप में रिसाव हो रहा है। इस रिसाव से बहुत सारा जल व्यर्थ हो रहा है। इस स्थिति में आप और आपके मित्र क्या करेंगे?
उत्तर – यदि विद्यालय आते समय हमें जल के पाइप में रिसाव दिखाई दे, तो सबसे पहले हम उस स्थान की जानकारी अपने शिक्षक, अभिभावकों या आसपास के जिम्मेदार लोगों को देंगे। इसके बाद नगर पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम के संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज कराएँगे ताकि पाइप की शीघ्र मरम्मत हो सके। यदि कोई हेल्पलाइन या मोबाइल ऐप उपलब्ध हो, तो उसके माध्यम से भी सूचना देंगे। साथ ही लोगों को जल संरक्षण का महत्व समझाएँगे और पानी की बर्बादी रोकने का प्रयास करेंगे। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
प्रश्न 2. आप अपने निकट रहने वाले नगरीय स्थानीय निकाय के किसी सदस्य को अपनी कक्षा में आमंत्रित कीजिए। उनके साथ उनकी भूमिका और उत्तरदायित्वों पर विचार-विमर्श कीजिए। उनसे पूछने के लिए प्रश्नों की एक सूची तैयार कीजिए।
उत्तर –
पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची—
आपका मुख्य कार्य क्या है?
आपके क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
नगर की सफाई कैसे कराई जाती है?
पेयजल की व्यवस्था कैसे की जाती है?
सड़क और नालियों की मरम्मत कौन कराता है?
नागरिक अपनी शिकायत कहाँ दर्ज करा सकते हैं?
नगर निगम/नगरपालिका को धन कहाँ से प्राप्त होता है?
बच्चों के लिए आपकी क्या योजनाएँ हैं?
स्वच्छता अभियान में नागरिक कैसे सहयोग कर सकते हैं?
एक अच्छे नागरिक के क्या कर्तव्य होने चाहिए?
इन प्रश्नों से विद्यार्थियों को स्थानीय सरकार के कार्यों और उत्तरदायित्वों की अच्छी जानकारी मिलेगी।
प्रश्न 3. अपने परिवार एवं पड़ोस के वयस्क लोगों के साथ चर्चा कीजिए और नगरीय स्थानीय निकायों से उनकी अपेक्षाओं की एक सूची बनाइए।
उत्तर – नगरीय स्थानीय निकायों से नागरिकों की प्रमुख अपेक्षाएँ निम्नलिखित हैं—
नियमित सफाई और कचरा संग्रहण।
स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था।
अच्छी और सुरक्षित सड़कें।
नालियों की नियमित सफाई।
पर्याप्त स्ट्रीट लाइट।
यातायात व्यवस्था में सुधार।
सार्वजनिक पार्कों और उद्यानों का रख-रखाव।
समय पर जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी करना।
स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाओं में सुधार।
नागरिकों की शिकायतों का शीघ्र समाधान।
प्रश्न 4. एक अच्छे नगरीय स्थानीय निकाय की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर – एक अच्छे नगरीय स्थानीय निकाय की प्रमुख विशेषताएँ—
स्वच्छ और सुंदर शहर।
नियमित कचरा प्रबंधन।
शुद्ध पेयजल की उपलब्धता।
अच्छी सड़कें और नालियाँ।
पर्याप्त स्ट्रीट लाइट।
पारदर्शी और उत्तरदायी प्रशासन।
नागरिकों की शिकायतों का शीघ्र समाधान।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की अच्छी व्यवस्था।
नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना।
प्रश्न 5. ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था और नगरीय स्थानीय निकायों के बीच क्या समानताएँ एवं क्या भिन्नताएँ हैं?
उत्तर – समानताएँ
दोनों स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ हैं।
दोनों में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है।
दोनों का उद्देश्य स्थानीय समस्याओं का समाधान करना है।
दोनों विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं के लिए कार्य करते हैं।
दोनों लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
भिन्नताएँ
पंचायती राज व्यवस्था नगरीय स्थानीय निकाय
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करती है। नगरों और शहरों में कार्य करती है।
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद इसके भाग हैं। नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम इसके भाग हैं।
ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान देती है। शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं पर अधिक ध्यान देती है।
कृषि और ग्रामीण समस्याओं का समाधान करती है। यातायात, सफाई, जल आपूर्ति और शहरी सेवाओं का प्रबंधन करती है।
30 अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (परीक्षा उपयोगी)
प्रश्न 1. नगरीय स्थानीय सरकार क्या है?
उत्तर – नगरीय स्थानीय सरकार वह संस्था है जो शहरों और कस्बों के प्रशासन तथा विकास कार्यों का संचालन करती है।
प्रश्न 2. नगरीय स्थानीय निकायों के तीन प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर –
नगर पंचायत
नगरपालिका (नगर परिषद/म्यूनिसिपल काउंसिल)
नगर निगम (महानगर निगम)
प्रश्न 3. नगर पंचायत कहाँ बनाई जाती है?
उत्तर – एक लाख से कम जनसंख्या वाले नगरों और कस्बों में नगर पंचायत बनाई जाती है।
प्रश्न 4. नगरपालिका कहाँ बनाई जाती है?
उत्तर – एक लाख से दस लाख तक की जनसंख्या वाले नगरों में नगरपालिका बनाई जाती है।
प्रश्न 5. नगर निगम कहाँ बनाया जाता है?
उत्तर – दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों में नगर निगम बनाया जाता है।
प्रश्न 6. नगर निगम को और किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर – नगर निगम को महानगर निगम (Municipal Corporation) भी कहा जाता है।
प्रश्न 7. नगरपालिकाओं का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर – नगर की सफाई, जल आपूर्ति, सड़क निर्माण, नालियों की देखभाल तथा नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
प्रश्न 8. नगर निगम नागरिकों को कौन-कौन सी सेवाएँ प्रदान करता है?
उत्तर – सफाई, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवर व्यवस्था, पार्क, स्वास्थ्य सेवाएँ तथा कचरा प्रबंधन जैसी सेवाएँ प्रदान करता है।
प्रश्न 9. इंदौर शहर क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर – इंदौर लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है।
प्रश्न 10. इंदौर की सफलता में किसका योगदान रहा?
उत्तर – नगर निगम और जागरूक नागरिकों—दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
प्रश्न 11. नगरीय स्थानीय निकायों के सदस्य कैसे चुने जाते हैं?
उत्तर – जनता द्वारा चुनाव के माध्यम से चुने जाते हैं।
प्रश्न 12. स्थानीय सरकार में नागरिकों की क्या भूमिका है?
उत्तर – चुनाव में मतदान करना, स्वच्छता बनाए रखना, शिकायत दर्ज कराना तथा विकास कार्यों में सहयोग देना।
प्रश्न 13. नगरीय स्थानीय निकायों के लिए धन कहाँ से आता है?
उत्तर – करों, शुल्कों, लाइसेंस फीस तथा सरकार द्वारा दिए गए अनुदान से धन प्राप्त होता है।
प्रश्न 14. क्या कुछ नगरीय सेवाएँ शुल्क आधारित होती हैं?
उत्तर – हाँ, कुछ सेवाओं के लिए नागरिकों से निर्धारित शुल्क लिया जाता है।
प्रश्न 15. नगरीय स्थानीय सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर – शहरों का विकास करना तथा नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
प्रश्न 16. शहर और गाँव के जीवन में एक अंतर लिखिए।
उत्तर – शहरों में जनसंख्या अधिक और जीवन तेज़ होता है, जबकि गाँवों में लोग एक-दूसरे को अधिक जानते हैं और सामुदायिक जीवन मजबूत होता है।
प्रश्न 17. नगरों में नागरिकों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?
उत्तर – क्योंकि नागरिकों के सहयोग से ही स्वच्छता, सुरक्षा और विकास कार्य सफल होते हैं।
प्रश्न 18. सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा क्यों करनी चाहिए?
उत्तर – क्योंकि यह सभी नागरिकों की संपत्ति होती है और इसके संरक्षण से समाज का विकास होता है।
प्रश्न 19. लोकतंत्र में नागरिकों का क्या महत्व है?
उत्तर – लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक का मत और सहभागिता महत्वपूर्ण होती है।
प्रश्न 20. यदि सड़क पर कोई खतरा दिखाई दे तो क्या करना चाहिए?
उत्तर – तुरंत संबंधित विभाग या स्थानीय निकाय को सूचना देनी चाहिए और लोगों को सावधान करना चाहिए।
प्रश्न 21. नगरों में स्वच्छता बनाए रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर – नगर निगम या नगरपालिका के साथ-साथ सभी नागरिकों की भी जिम्मेदारी है।
प्रश्न 22. स्थानीय सरकार लोकतंत्र को कैसे मजबूत बनाती है?
उत्तर – यह लोगों को अपने क्षेत्र के विकास और निर्णयों में भाग लेने का अवसर देती है।
प्रश्न 23. नगरों में कचरा प्रबंधन क्यों आवश्यक है?
उत्तर – स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए कचरा प्रबंधन आवश्यक है।
प्रश्न 24. नागरिकों को कर (Tax) क्यों देना चाहिए?
उत्तर – ताकि स्थानीय सरकार विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं पर खर्च कर सके।
प्रश्न 25. स्थानीय निकायों का चुनाव क्यों कराया जाता है?
उत्तर – ताकि जनता अपने योग्य प्रतिनिधियों का चुनाव कर सके और स्थानीय शासन सुचारु रूप से चल सके।
प्रश्न 26. एक आदर्श नगर की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर –
स्वच्छ वातावरण।
अच्छी सड़कें एवं पेयजल की व्यवस्था।
प्रश्न 27. स्थानीय सरकार के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
उत्तर-
नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
विकास कार्यों का संचालन करना।
प्रश्न 28. नागरिकों को स्थानीय सरकार का सहयोग क्यों करना चाहिए?
उत्तर –
ताकि शहर का विकास हो, समस्याओं का समाधान हो और लोकतंत्र मजबूत बने।
प्रश्न 29. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर –
हमें स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए और स्थानीय सरकार का सहयोग करना चाहिए।
प्रश्न 30. नगरीय स्थानीय सरकार का समाज में क्या महत्व है?
उत्तर –
नगरीय स्थानीय सरकार शहरों में आवश्यक नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, विकास कार्यों का संचालन करती है और नागरिकों की भागीदारी से लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
अतरिक्त दीर्घ प्रश्नोत्तर लिखो
(परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण)
प्रश्न 1. नगरीय स्थानीय सरकार क्या है? इसके उद्देश्य एवं महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर – नगरीय स्थानीय सरकार वह व्यवस्था है जो नगरों और शहरों के प्रशासन तथा विकास का कार्य करती है। भारत में जनसंख्या के आधार पर नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम का गठन किया जाता है। इन संस्थाओं के सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं और वे नागरिकों की समस्याओं का समाधान करते हैं।
नगरीय स्थानीय सरकार के प्रमुख उद्देश्य हैं—
शहरों का समुचित विकास करना।
नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना।
स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना।
पेयजल, सड़क, बिजली और सीवर व्यवस्था बनाए रखना।
लोकतंत्र को स्थानीय स्तर तक पहुँचाना।
नागरिकों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करना।
इस प्रकार नगरीय स्थानीय सरकार शहरों के विकास और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 2. नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर – भारत में जनसंख्या के आधार पर तीन प्रकार के नगरीय स्थानीय निकाय बनाए जाते हैं।
नगर पंचायत छोटे नगरों और कस्बों (1 लाख से कम जनसंख्या) के लिए होती है।
नगरपालिका 1 लाख से 10 लाख तक की जनसंख्या वाले नगरों में कार्य करती है।
नगर निगम 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों में कार्य करता है और इसे महानगर निगम भी कहा जाता है।
तीनों संस्थाओं का उद्देश्य नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराना तथा नगर का विकास करना है। अंतर केवल उनके कार्यक्षेत्र और जनसंख्या के आधार पर है।
प्रश्न 3. नगरीय स्थानीय निकायों के प्रमुख कार्यों का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
उत्तर – नगरीय स्थानीय निकाय शहरों के विकास और नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था करते हैं। इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
शहर की सफाई और कचरा प्रबंधन।
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना।
सड़कों और पुलों का निर्माण एवं मरम्मत।
नालियों और सीवर व्यवस्था का रख-रखाव।
स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था।
सार्वजनिक पार्कों और उद्यानों का रख-रखाव।
जन्म और मृत्यु का पंजीकरण।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना।
भवन निर्माण की अनुमति देना।
पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियान चलाना।
इन कार्यों के माध्यम से स्थानीय निकाय नागरिकों को बेहतर जीवन-स्तर प्रदान करते हैं।
प्रश्न 4. इंदौर शहर को स्वच्छ भारत का आदर्श क्यों माना जाता है?
उत्तर – इंदौर शहर को लगातार कई वर्षों तक भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया है। इसका मुख्य कारण नगर निगम की प्रभावी कार्यप्रणाली तथा नागरिकों का सक्रिय सहयोग है। नगर निगम ने नियमित कचरा संग्रहण, स्वच्छता अभियान, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया। नागरिकों ने भी कचरा इधर-उधर न फेंककर, सफाई बनाए रखकर और नगर निगम का सहयोग करके शहर को स्वच्छ बनाने में योगदान दिया। यह उदाहरण बताता है कि यदि सरकार और नागरिक मिलकर कार्य करें, तो किसी भी शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।
प्रश्न 5. लोकतंत्र को मजबूत बनाने में नगरीय स्थानीय निकायों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर – नगरीय स्थानीय निकाय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत बनाते हैं। इनके सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं और वे नागरिकों की समस्याओं का समाधान करते हैं।
स्थानीय निकाय नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देते हैं। लोग अपने क्षेत्र की समस्याएँ अपने प्रतिनिधियों तक पहुँचाते हैं और उनके समाधान में सहयोग करते हैं। इससे सरकार और जनता के बीच सीधा संपर्क बना रहता है।
इस प्रकार स्थानीय निकाय लोकतंत्र को प्रभावी, उत्तरदायी और जनहितकारी बनाते हैं।
प्रश्न 6. एक आदर्श नगरीय स्थानीय निकाय की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर – एक आदर्श नगरीय स्थानीय निकाय में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए—
शहर की नियमित सफाई।
शुद्ध पेयजल की व्यवस्था।
अच्छी सड़कें और नालियाँ।
पर्याप्त स्ट्रीट लाइट।
पारदर्शी और ईमानदार प्रशासन।
नागरिकों की शिकायतों का शीघ्र समाधान।
पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान।
सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार।
नागरिकों की सक्रिय भागीदारी।
विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन।
ऐसा स्थानीय निकाय शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित बनाता है।
प्रश्न 7. नगरीय स्थानीय सरकार और पंचायती राज व्यवस्था में समानताएँ एवं भिन्नताएँ लिखिए।
उत्तर – दोनों व्यवस्थाएँ स्थानीय स्वशासन की संस्थाएँ हैं और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से कार्य करती हैं।
समानताएँ
दोनों लोकतंत्र को मजबूत बनाती हैं।
दोनों स्थानीय समस्याओं का समाधान करती हैं।
दोनों विकास कार्यों का संचालन करती हैं।
दोनों में जनता प्रतिनिधियों का चुनाव करती है।
भिन्नताएँ
पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करती है, जबकि नगरीय स्थानीय सरकार शहरों में कार्य करती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद होती हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम होते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में सफाई, यातायात, जलापूर्ति और शहरी सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
प्रश्न 8. नागरिकों की जिम्मेदारियाँ और कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर – एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्य हैं—
मतदान करना।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना।
शहर को स्वच्छ रखना।
करों का समय पर भुगतान करना।
यातायात नियमों का पालन करना।
जल और बिजली की बचत करना।
स्थानीय सरकार को समस्याओं की जानकारी देना।
पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करना।
कानूनों का पालन करना।
जब नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तब स्थानीय सरकार भी अपने कार्य अधिक प्रभावी ढंग से कर पाती है।
प्रश्न 9. नगरों के विकास में नागरिकों की भागीदारी क्यों आवश्यक है?
उत्तर – नगरों का विकास केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। नागरिकों का सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
यदि नागरिक स्वच्छता बनाए रखें, करों का भुगतान करें, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करें, समस्याओं की जानकारी समय पर दें तथा स्थानीय निकायों के साथ मिलकर कार्य करें, तो शहर का विकास तेजी से होता है। इंदौर जैसे शहरों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि नागरिकों की भागीदारी से ही शहर स्वच्छ, सुंदर और विकसित बन सकते हैं।
प्रश्न 10. इस अध्याय से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर – यह अध्याय हमें सिखाता है कि नगरीय स्थानीय सरकार शहरों के विकास की आधारशिला है। नगर पंचायत, नगरपालिका और नगर निगम नागरिकों को आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं और शहर को व्यवस्थित बनाते हैं।
हमें एक जागरूक नागरिक बनकर स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए, स्थानीय सरकार का सहयोग करना चाहिए तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करना चाहिए। सरकार और नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ही एक स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित शहर का निर्माण संभव है।
- Study Material कक्षा 6 – अध्याय 12 : आधारभूत लोकतंत्र – भाग 3 : नगरीय क्षेत्रों में स्थानीय सरकार | Grassroots Democracy – Part 3: Local Government in Urban Areas
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