Study Material अध्याय 3 : स्थलरूप एवं जीवन | Landforms and Life
परिचय
इस अध्याय में पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले मुख्य स्थलरूपों (Landforms) और उनसे जुड़े जीवन के बारे में बताया गया है। स्थलरूप पृथ्वी की सतह के प्राकृतिक आकार होते हैं, जो लाखों वर्षों में बनते हैं। मुख्य रूप से तीन प्रकार के स्थलरूप होते हैं— पर्वत, पठार और मैदान।
- पर्वत
पर्वत पृथ्वी की सतह के ऊँचे भाग होते हैं। इनकी ढलान खड़ी होती है और इनके शिखर ऊँचे होते हैं। कुछ ऊँचे पर्वत वर्षभर बर्फ से ढके रहते हैं। हिमालय, आल्प्स और एंडीज़ विश्व की प्रसिद्ध पर्वत श्रृंखलाएँ हैं।
पर्वतों में चीड़, देवदार और फर जैसे पेड़ पाए जाते हैं। यहाँ हिम तेंदुआ, याक, भालू और कई प्रकार के पक्षी भी रहते हैं। पर्वतों से निकलने वाली नदियाँ मैदानों को जल प्रदान करती हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करना कठिन होता है, इसलिए लोग सीढ़ीनुमा खेत बनाकर खेती करते हैं। पर्यटन, पशुपालन और तीर्थयात्रा भी यहाँ के महत्वपूर्ण व्यवसाय हैं। हालांकि भूस्खलन, हिमस्खलन, बादल फटना और बाढ़ जैसी समस्याएँ भी होती हैं।
- पठार
पठार ऊँचे और सपाट भू-भाग होते हैं। उनकी सतह अपेक्षाकृत समतल होती है। तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊँचा और बड़ा पठार है, जबकि भारत का दक्कन पठार सबसे प्राचीन पठारों में से एक है।
पठारों में खनिजों की भरपूर मात्रा पाई जाती है, इसलिए इन्हें “खनिजों का भंडार” भी कहा जाता है। भारत का छोटानागपुर पठार कोयला, लोहा और मैंगनीज़ के लिए प्रसिद्ध है। कुछ पठारों की मिट्टी कम उपजाऊ होती है, लेकिन ज्वालामुखी से बने लावा पठार बहुत उपजाऊ होते हैं। पठारों में सुंदर जलप्रपात भी पाए जाते हैं।
- मैदान
मैदान समतल और विस्तृत भूमि होती है। इनकी ऊँचाई सामान्यतः समुद्र तल से 300 मीटर से कम होती है। नदियाँ पर्वतों से मिट्टी और गाद लाकर मैदानों में जमा करती हैं, जिससे भूमि उपजाऊ बन जाती है।
मैदान कृषि के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं। यहाँ गेहूँ, चावल, मक्का, जौ और अन्य फसलें उगाई जाती हैं। इसी कारण विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में रहती है। भारत का गंगा का मैदान सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है।
मरुस्थल और मानव जीवन
अध्याय में मरुस्थलों का भी संक्षिप्त उल्लेख किया गया है। मरुस्थल बहुत शुष्क क्षेत्र होते हैं। कुछ गर्म (जैसे थार और सहारा) तथा कुछ ठंडे (जैसे गोबी) होते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोग वहाँ के वातावरण के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं।
परिणाम स्वरूप – पर्वत, पठार और मैदान पृथ्वी के मुख्य स्थलरूप हैं। प्रत्येक स्थलरूप की अपनी विशेषताएँ, अवसर और चुनौतियाँ होती हैं। मानव ने इन सभी स्थानों में अपने जीवन को अनुकूल बनाया है। ये स्थलरूप हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
अध्याय 3 : स्थलरूप एवं जीवन नोट्स
यह अध्याय हमें पृथ्वी की सतह के विभिन्न रूपों और वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन पर उनके प्रभाव के बारे में बताता है।
- स्थलरूपों का परिचय
पृथ्वी की सतह हर जगह एक जैसी नहीं है। लाखों वर्षों में प्रकृति ने विभिन्न भौतिक आकृतियाँ बनाई हैं जिन्हें स्थलरूप (Landforms) कहा जाता है।
इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा गया है- पर्वत, पठार, मैदान
- पर्वत (Mountains)
पर्वत वे भूभाग हैं जो अपने आस-पास की जमीन से बहुत ऊँचे होते हैं। इनकी पहचान इनके चौड़े आधार, खड़ी ढलान और नुकीली चोटियों से होती है।
प्रकार – हिमालय जैसे ऊँचे और नुकीले पर्वत नवीन (युवा) पर्वत कहलाते हैं, जबकि अरावली जैसी पहाड़ियाँ पुरानी हैं और समय के साथ घिसकर गोल हो गई हैं।
वनस्पति और जीव – यहाँ शंकुधारी वन (जैसे चीड़, देवदार) पाए जाते हैं। बहुत ऊँचाई पर केवल घास, काई और लाइकेन उगते हैं। यहाँ हिम तेंदुआ, याक और सुनहरी गरुड़ जैसे विशिष्ट जीव पाए जाते हैं।
पर्वतीय जीवन – यहाँ जीवन कठिन है। लोग ढलानों को काटकर सीढ़ीदार खेती (वेदिका कृषि) करते हैं। पर्वतों को कई संस्कृतियों में पवित्र माना जाता है, जैसे एवरेस्ट (सगरमाथा) और कैलाश पर्वत।
चुनौतियाँ – भूस्खलन, बादल फटना, हिमस्खलन और आकस्मिक बाढ़ यहाँ की प्रमुख प्राकृतिक आपदाएँ हैं।
- पठार (Plateaus)
पठार वह ऊँची भूमि है जिसकी सतह ऊपर से चपटी (मेज की तरह) होती है।
खनिजों का भंडार – पठारों को ‘खनिजों का भंडार-गृह’ कहा जाता है। उदाहरण के लिए, भारत का छोटा नागपुर पठार लोहा, कोयला और मैंगनीज के लिए प्रसिद्ध है।
महत्वपूर्ण तथ्य – तिब्बत का पठार विश्व का सबसे ऊँचा पठार है, जिसे ‘विश्व की छत’ भी कहा जाता है।
प्राकृतिक दृश्य – पठारों में कई सुंदर जलप्रपात (Waterfalls) होते हैं, जैसे कर्नाटक का जोग प्रपात और झारखंड का हुंडरू प्रपात। ज्वालामुखी से बने पठारों में काली मिट्टी होती है जो खेती के लिए उपजाऊ होती है।
- मैदान (Plains)
मैदान समतल और बड़े भूभाग होते हैं, जिनकी ऊँचाई समुद्र तल से आमतौर पर 300 मीटर से अधिक नहीं होती।
निर्माण – इनका निर्माण नदियों द्वारा पहाड़ों से लाई गई सिल्ट, रेत और गाद (तलछट) के जमा होने से होता है।
विशेषताएँ – मैदानों की मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है, इसलिए यहाँ खेती (जैसे चावल, गेहूँ) मुख्य व्यवसाय है।
जनसंख्या – अपनी सुगमता और उपजाऊपन के कारण, विश्व की अधिकांश जनसंख्या मैदानों में ही रहती है। भारत में गंगा का मैदान इसका प्रमुख उदाहरण है।
समस्याएँ – बढ़ती जनसंख्या के कारण यहाँ प्रदूषण और भूमिगत जल स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियाँ पैदा हो गई हैं।
- मरुस्थल (Deserts)
जहाँ बहुत कम वर्षा होती है, उन शुष्क क्षेत्रों को मरुस्थल कहते हैं। ये गर्म (थार, सहारा) या ठंडे (गोबी, अंटार्कटिका) हो सकते हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद यहाँ के समुदायों की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर होती है।
- सांस्कृतिक दृष्टिकोण (पाँच ‘तिनै’)
प्राचीन तमिल साहित्य में पाँच प्रकार की दृश्यभूमियों (तिनै) का वर्णन है, जो मानव और पर्यावरण के गहरे संबंध को दर्शाती हैं-
कुरुंजी – पर्वतीय क्षेत्र (शिकार और संग्रहण)
मुल्लाई – घास के मैदान और वन (पशुपालन)
मरूदम – उपजाऊ कृषि मैदान (खेती)
नेयदल – तटीय क्षेत्र (मत्स्य पालन)
पालै – शुष्क मरुस्थल (घुमंतू जीवन)
निष्कर्ष – प्रत्येक स्थलरूप मनुष्य को अलग-अलग चुनौतियाँ और अवसर प्रदान करता है, और इंसान ने अपनी बुद्धिमानी से हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीखा है।
अध्याय 3 : स्थलरूप एवं जीवन — प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. आपका कस्बा, गाँव या नगर किस प्रकार के स्थलरूप पर स्थित है? इस अध्याय में बताई गई कौन-सी विशेषताएँ आप अपने आसपास देखते हैं?
उत्तर:
मेरा कस्बा/गाँव मैदान क्षेत्र में स्थित है। यहाँ समतल भूमि, उपजाऊ मिट्टी, खेती-बाड़ी, सड़क और परिवहन की अच्छी सुविधाएँ हैं। आसपास गेहूँ, धान और अन्य फसलें उगाई जाती हैं। यह मैदान की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 2. छोटानागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा की यात्रा में आने वाले तीन स्थलरूपों के बारे में बताइए।
उत्तर:
छोटानागपुर – यह एक पठारी क्षेत्र है।
प्रयागराज – यह गंगा के उपजाऊ मैदान में स्थित है।
अल्मोड़ा – यह हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है।
इस प्रकार यात्रा में पठार, मैदान और पर्वत तीनों स्थलरूप देखने को मिलते हैं।
प्रश्न 3. भारत के कुछ प्रसिद्ध तीर्थस्थलों की सूची बनाइए तथा बताइए कि वे किस स्थलरूप में स्थित हैं।
उत्तर –
तीर्थस्थल स्थलरूप
बद्रीनाथ पर्वत
केदारनाथ पर्वत
अमरनाथ पर्वत
वैष्णो देवी पर्वत
प्रयागराज मैदान
वाराणसी मैदान
हरिद्वार मैदान
रामेश्वरम् तटीय मैदान
प्रश्न 4. सही या गलत बताइए
(क) हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत श्रृंखला है।
उत्तर: गलत
(ख) पठार प्रायः एक ओर से उठे हुए होते हैं।
उत्तर: सही
(ग) पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं।
उत्तर: गलत
(घ) भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते हैं।
उत्तर: गलत
(ङ) गंगा, यमुना की सहायक नदी है।
उत्तर: गलत
(च) मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है।
उत्तर: सही
(छ) हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है।
उत्तर: सही
(ज) मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं।
उत्तर: सही
(झ) सभी मरुस्थल गर्म होते हैं।
उत्तर: गलत
प्रश्न 5. शब्दों के जोड़े बनाइए
शब्द सही जोड़ा
एवरेस्ट गिरिशृंग पर्वतारोहण
राफ्टिंग गंगा
ऊँट मरुस्थल
पठार विश्व की छत
गंगा का मैदान धान के खेत
जलमार्ग नदी
किलिमंजारो गिरिशृंग अफ्रीका
यमुना सहायक नदी
अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 6. स्थलरूप क्या है?
उत्तर:
पृथ्वी की सतह के प्राकृतिक भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं। जैसे— पर्वत, पठार और मैदान।
प्रश्न 7. मुख्य स्थलरूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
मुख्य स्थलरूप तीन हैं—
पर्वत
पठार
मैदान
प्रश्न 8. पर्वत क्या हैं?उत्तर:
पर्वत पृथ्वी की सतह के ऊँचे भाग होते हैं जिनकी ढलान खड़ी और शिखर ऊँचे होते हैं।
प्रश्न 9. पठार क्या है?
उत्तर:
पठार ऊँचा तथा समतल भू-भाग होता है जिसकी सतह सपाट होती है।
प्रश्न 10. मैदान क्या है?
उत्तर:
मैदान समतल एवं विस्तृत भूमि होती है, जो कृषि और मानव बसावट के लिए उपयुक्त होती है।
प्रश्न 11. तिब्बत के पठार को विश्व की छत क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
क्योंकि यह विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा पठार है, जिसकी औसत ऊँचाई लगभग 4500 मीटर है।
प्रश्न 12. छोटानागपुर पठार किस लिए प्रसिद्ध है?
उत्तर:
छोटानागपुर पठार लौह अयस्क, कोयला और मैंगनीज़ जैसे खनिजों के भंडार के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 13. पर्वतीय क्षेत्रों में खेती कैसे की जाती है?
उत्तर:
पर्वतीय क्षेत्रों में सीढ़ीनुमा खेत बनाकर वेदिका (टेरस) कृषि की जाती है।
प्रश्न 14. पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों के मुख्य व्यवसाय क्या हैं?
उत्तर:
कृषि, पशुपालन, पर्यटन और हस्तशिल्प पर्वतीय क्षेत्रों के मुख्य व्यवसाय हैं।
प्रश्न 15. मैदान कृषि के लिए उपयुक्त क्यों होते हैं?
उत्तर:
मैदानों में नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी होती है, इसलिए यहाँ कृषि आसानी से की जा सकती है।
प्रश्न 16. गंगा का मैदान क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर:
गंगा का मैदान अत्यंत उपजाऊ है और यहाँ बड़ी जनसंख्या निवास करती है। यह कृषि का प्रमुख क्षेत्र है।
प्रश्न 17. मरुस्थल क्या है?
उत्तर:
बहुत कम वर्षा वाले शुष्क क्षेत्रों को मरुस्थल कहते हैं।
प्रश्न 18. भारत का प्रमुख मरुस्थल कौन-सा है?
उत्तर:
थार मरुस्थल भारत का प्रमुख मरुस्थल है।
प्रश्न 19. पर्वतीय जीवन की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं?
उत्तर:
भूस्खलन, हिमस्खलन, भारी हिमपात, बादल फटना और आकस्मिक बाढ़ पर्वतीय जीवन की प्रमुख चुनौतियाँ हैं।
प्रश्न 20. मानव विभिन्न स्थलरूपों में कैसे रहता है?
उत्तर:
मानव ने पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल सभी क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है और वहाँ रहने तथा आजीविका कमाने के तरीके विकसित किए हैं।
अध्याय 3 : स्थलरूप एवं जीवन — अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. स्थलरूप किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह के प्राकृतिक भौतिक स्वरूप को स्थलरूप कहते हैं।
प्रश्न 2. स्थलरूपों के मुख्य प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: पर्वत, पठार और मैदान।
प्रश्न 3. पर्वतों की पहचान कैसे की जाती है?
उत्तर: पर्वतों का आधार चौड़ा, ढलान खड़ी और शिखर संकरा होता है।
प्रश्न 4. पहाड़ी और पर्वत में क्या अंतर है?
उत्तर: पर्वत अधिक ऊँचे होते हैं, जबकि पहाड़ियाँ अपेक्षाकृत कम ऊँची और गोलाकार होती हैं।
प्रश्न 5. विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर कौन-सा है?
उत्तर: माउंट एवरेस्ट।
प्रश्न 6. माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?
उत्तर: लगभग 8848 मीटर।
प्रश्न 7. भारत की सबसे ऊँची पर्वत चोटी कौन-सी है?
उत्तर: कंचनजंगा।
प्रश्न 8. दक्षिण भारत का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर कौन-सा है?
उत्तर: अनाईमुडी।
प्रश्न 9. पर्वतों से नदियों को जल कैसे प्राप्त होता है?
उत्तर: बर्फ और हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है।
प्रश्न 10. पर्वतीय वनों में कौन-कौन से पेड़ पाए जाते हैं?
उत्तर: चीड़, देवदार, फर और स्प्रूस।
प्रश्न 11. याक किस प्रकार के क्षेत्र में पाया जाता है?
उत्तर: पर्वतीय क्षेत्रों में।
प्रश्न 12. सीढ़ीनुमा खेती क्या कहलाती है?
उत्तर: वेदिका कृषि (टेरेस फार्मिंग)।
प्रश्न 13. पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन क्यों विकसित होता है?
उत्तर: स्वच्छ हवा, सुंदर प्राकृतिक दृश्य और साहसिक खेलों के कारण।
प्रश्न 14. भूस्खलन क्या है?
उत्तर: पर्वत की मिट्टी या चट्टानों का अचानक टूटकर नीचे गिरना भूस्खलन कहलाता है।
प्रश्न 15. हिमस्खलन क्या है?
उत्तर: पर्वत से अचानक बर्फ का खिसककर नीचे गिरना हिमस्खलन कहलाता है।
प्रश्न 16. पठार क्या होता है?
उत्तर: ऊँचा तथा समतल भू-भाग पठार कहलाता है।
प्रश्न 17. विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार कौन-सा है?
उत्तर: तिब्बत का पठार।
प्रश्न 18. तिब्बत के पठार को क्या कहा जाता है?
उत्तर: विश्व की छत।
प्रश्न 19. भारत का प्रसिद्ध खनिज पठार कौन-सा है?
उत्तर: छोटानागपुर पठार।
प्रश्न 20. पठारों को खनिजों का भंडार क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि वहाँ खनिज बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं।
प्रश्न 21. मैदान क्या होते हैं?
उत्तर: समतल और विस्तृत भूमि को मैदान कहते हैं।
प्रश्न 22. मैदानों की मिट्टी उपजाऊ क्यों होती है?
उत्तर: नदियाँ गाद और तलछट लाकर मैदानों में जमा करती हैं, जिससे मिट्टी उपजाऊ बनती है।
प्रश्न 23. विश्व की अधिकांश जनसंख्या कहाँ रहती है?
उत्तर: मैदानों में।
प्रश्न 24. भारत का सबसे प्रसिद्ध मैदान कौन-सा है?
उत्तर: गंगा का मैदान।
प्रश्न 25. मैदानों में मुख्य व्यवसाय क्या है?
उत्तर: कृषि।
प्रश्न 26. गंगा के मैदान में कौन-कौन सी फसलें उगाई जाती हैं?
उत्तर: गेहूँ, धान, मक्का, जौ, बाजरा और रागी।
प्रश्न 27. संगम स्थल किसे कहते हैं?
उत्तर: जहाँ दो या दो से अधिक नदियाँ मिलती हैं, उसे संगम स्थल कहते हैं।
प्रश्न 28. मरुस्थल क्या है?
उत्तर: बहुत कम वर्षा वाला शुष्क क्षेत्र मरुस्थल कहलाता है।
प्रश्न 29. भारत का प्रमुख मरुस्थल कौन-सा है?
उत्तर: थार मरुस्थल।
30. विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल कौन-सा है?
उत्तर: सहारा मरुस्थल।
प्रश्न 31. ठंडे मरुस्थल का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: गोबी मरुस्थल।
प्रश्न 32. पर्वत, पठार और मैदान मानव जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर: ये लोगों के रहन-सहन, व्यवसाय, कृषि, परिवहन और संस्कृति को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 33. पहली भारतीय महिला कौन थीं जिन्होंने एवरेस्ट पर चढ़ाई की?
उत्तर: बछेंद्री पाल।
प्रश्न 34. कृत्रिम पैर के सहारे एवरेस्ट पर चढ़ने वाली भारतीय महिला कौन हैं?
उत्तर: अरुणिमा सिन्हा।
प्रश्न 35. इस अध्याय से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: हमें सीख मिलती है कि मनुष्य हर प्रकार के स्थलरूप में परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल सकता है तथा प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए।
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