Daily Current Affairs ईरान को मिला नया ‘सुप्रीम लीडर’: मुजतबा खमेनेई की नियुक्ति से अमेरिका में खलबली, क्या होगा दुनिया पर असर?
ईरान ने हाल ही में मोजतबा खमेनेई को अपना नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है, जो अपने पिता अयातुल्ला अली खमेनेई के उत्तराधिकारी बने हैं। इस निर्णय ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि मोजतबा को एक कट्टरपंथी नेता माना जाता है और अमेरिका ने उन पर पहले ही प्रतिबंध लगा रखे हैं। स्रोत बताते हैं कि इस नियुक्ति पर रूस और चीन ने समर्थन जताया है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने स्पष्ट रूप से अपनी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। ईरान की जनता इस बदलाव का सड़कों पर जश्न मनाकर स्वागत कर रही है, जिसे पश्चिमी दबाव के खिलाफ एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, भारत में विपक्षी दलों ने पश्चिम एशिया के संकट और तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की विदेश नीति और नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने ईरान में वंशवाद की नई बहस को जन्म दिया है और क्षेत्र में भविष्य के संघर्षों की संभावना को बढ़ा दिया है।
तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के राजनीतिक गलियारों और वैश्विक कूटनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर मुजतबा खमेनेई (Mojtaba Khamenei) को अपना नया सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) घोषित कर दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व (West Asia) भीषण युद्ध और तनाव की स्थिति से गुजर रहा है। मुजतबा खमेनेई, पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनेई के दूसरे बेटे हैं।
पृष्ठभूमि: कैसे खाली हुआ सर्वोच्च पद?
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमेनेई की 86 वर्ष की आयु में इजरायली गोलाबारी और बम धमाकों में मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद, 1 मार्च 2026 को एक अंतरिम परिषद (Council) बनाई गई थी जिसमें राष्ट्रपति, मोहसिन एजाई और अली रेजा अराफी को कार्यवाहक जिम्मेदारी सौंपी गई थी। ईरान की 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने गहन विचार-विमर्श के बाद मुजतबा के नाम पर मुहर लगाई।
कौन हैं मुजतबा खमेनेई?
1969 में जन्मे मुजतबा खमेनेई को ईरान के भीतर एक कट्टरपंथी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। उनके बारे में कुछ प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:
- हुजतुल इस्लाम: उन्होंने शिया इस्लाम में ‘हुजतुल इस्लाम’ की उच्च स्तरीय धार्मिक उपाधि प्राप्त की है।
- पिता के ‘गेटकीपर’: विकीलीक्स और अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, मुजतबा लंबे समय से अपने पिता के ‘गेटकीपर’ के रूप में कार्य कर रहे थे। आईआरजीसी (IRGC) और कुद्स फोर्सेस के साथ उनके बेहद करीबी संबंध हैं।
- कठोर विचारधारा: उन्हें अपने पिता से भी अधिक कट्टरपंथी माना जाता है। अमेरिका ने उन्हें 2019 से ही अपनी ‘ब्लैकलिस्ट’ में डाल रखा है।
अमेरिका बनाम ईरान: ट्रंप की नाराजगी
मुजतबा की नियुक्ति ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नियुक्ति पर स्पष्ट रूप से अपनी नाखुशी जाहिर की है। ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान उनके परामर्श के बिना नया सुप्रीम लीडर नियुक्त न करे, लेकिन ईरान ने इसे नजरअंदाज करते हुए मुजतबा के नाम की घोषणा कर दी।
वहीँ दूसरी ओर, रूस और चीन ने इस फैसले का स्वागत किया है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मुजतबा को बधाई देते हुए इसे ईरान का आंतरिक मामला बताया है।
भारत पर प्रभाव और सदन में हंगामा
ईरान और मध्य पूर्व के बिगड़ते हालात का असर भारत में भी देखा जा रहा है। भारतीय संसद के बजट सत्र में विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए:
- भारतीयों की वापसी: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि अब तक लगभग 52,000 भारतीयों को गल्फ देशों से वापस लाया जा चुका है और एयर इंडिया विशेष उड़ानें संचालित कर रही है。
- तेल की कीमतें: विपक्ष ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों पर चिंता जताई है।
- विदेश नीति पर बहस: समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि युद्ध के इस दौर में भारत की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
मुजतबा खमेनेई का सर्वोच्च नेता बनना इस बात का संकेत है कि ईरान अपनी पुरानी विचारधारा और पश्चिम विरोधी रुख पर अडिग रहेगा। जहाँ ईरान की जनता सड़कों पर उतरकर इस नियुक्ति का जश्न मना रही है, वहीं वैश्विक समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि मुजतबा के नेतृत्व में ईरान और इजरायल-अमेरिका के संबंध किस दिशा में मुड़ते हैं।