Study Material  अध्याय 6 : भारतीय सभ्यता का प्रारंभ | The Beginning of Indian Civilization

Study Material  कक्षा-6 (अध्याय 6) : भारतीय सभ्यता का प्रारंभ | The Beginning of Indian Civilization

सरल भाषा में विस्तृत सारांश (Detailed Summary In Simple Language)

भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता या सिंधु सभ्यता भी कहा जाता है। इन तीनों नामों का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इस सभ्यता के अवशेष सबसे पहले हड़प्पा में मिले, अधिकांश नगर सिंधु नदी के आसपास स्थित थे और अनेक बस्तियाँ सरस्वती नदी के क्षेत्र में भी मिली हैं।

लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच यह सभ्यता अपने विकास के चरम पर थी। उस समय भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनेक बड़े और सुव्यवस्थित नगर बस चुके थे। इनमें हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धौलावीरा, लोथल, कालीबंगा, राखीगढ़ी और बनावली प्रमुख नगर थे। इन नगरों से पता चलता है कि उस समय के लोग बहुत बुद्धिमान, मेहनती और संगठित थे।

सुव्यवस्थित नगर

हड़प्पा सभ्यता के नगर बहुत अच्छी योजना के अनुसार बनाए गए थे। सड़कों को सीधी रेखाओं में बनाया गया था और वे एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। नगरों में चौड़ी सड़कें, गलियाँ और पक्के मकान थे। अधिकांश मकान पकी ईंटों से बने थे। प्रत्येक घर में कमरे, रसोई, स्नानघर तथा पानी निकालने की व्यवस्था थी।

नगरों को सामान्यत – दो भागों में बाँटा जाता था—ऊँचा दुर्ग क्षेत्र और नीचे का नगर। धौलावीरा में तीन अलग-अलग भाग पाए गए, जो इसकी विशेष योजना को दर्शाते हैं।

जल प्रबंधन और स्वच्छता

हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता उसकी जल-प्रबंधन प्रणाली थी। लगभग हर घर में स्नानघर बना होता था और गंदा पानी पक्की नालियों द्वारा नगर से बाहर निकाल दिया जाता था। ये नालियाँ ढकी हुई होती थीं और समय-समय पर उनकी सफाई भी की जाती थी। इससे पता चलता है कि हड़प्पावासी स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे।

मोहनजोदड़ो में सैकड़ों कुएँ मिले हैं। धौलावीरा में बड़े-बड़े जलाशय बनाए गए थे, जिनमें वर्षा का पानी एकत्र किया जाता था। वहाँ कम से कम छह विशाल जलाशय मिले हैं। इससे स्पष्ट होता है कि लोग भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर जल का संरक्षण करते थे।

कृषि और भोजन

हड़प्पा सभ्यता के लोग मुख्य रूप से किसान थे। वे गेहूँ, जौ, बाजरा, धान, दालें तथा अनेक प्रकार की सब्जियाँ उगाते थे। वे विश्व के सबसे पहले कपास उगाने वाले लोगों में थे। कपास से कपड़े बनाए जाते थे। खेती के लिए हल और अन्य कृषि उपकरणों का उपयोग किया जाता था।

लोग गाय, बैल, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे पशु पालते थे। वे मछली भी खाते थे। मिट्टी के बर्तनों की वैज्ञानिक जाँच से पता चलता है कि वे दूध, हल्दी, अदरक और अन्य खाद्य पदार्थों का भी उपयोग करते थे। इससे पता चलता है कि उनका भोजन संतुलित और विविध था।

व्यापार और उद्योग

हड़प्पावासी केवल कृषि ही नहीं करते थे, बल्कि व्यापार भी करते थे। उनका व्यापार भारत के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ विदेशों तक फैला हुआ था। वे आभूषण, कपास, लकड़ी, शंख की वस्तुएँ और कार्नेलियन (लाल पत्थर) के मनके निर्यात करते थे। बदले में ताँबा जैसी धातुएँ प्राप्त करते थे।

लोथल में एक विशाल बंदरगाह मिला है। इससे सिद्ध होता है कि हड़प्पावासी समुद्री व्यापार भी करते थे। व्यापार के लिए वे स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्ग—तीनों का उपयोग करते थे।

मुहरें, कला और संस्कृति

हड़प्पा सभ्यता की हजारों मुहरें मिली हैं। इन पर बैल, हाथी, गैंडा, बाघ और एक-सींग वाले पशु जैसे चित्र बने हैं। इन मुहरों पर कुछ चिह्न भी लिखे गए हैं, लेकिन उनकी लिपि आज तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है। माना जाता है कि इनका उपयोग व्यापार और पहचान के लिए होता था।

पुरातत्वविदों को कांस्य की प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति, दाढ़ी वाले व्यक्ति की प्रतिमा, खिलौने, खेल-बोर्ड, चूड़ियाँ, कंघे, दर्पण, बर्तन और अन्य अनेक वस्तुएँ मिली हैं। इससे पता चलता है कि लोग कला, संगीत, मनोरंजन और शिल्पकला में भी रुचि रखते थे।

सभ्यता का पतन

लगभग 1900 ईसा पूर्व के बाद हड़प्पा सभ्यता का धीरे-धीरे पतन होने लगा। नगर खाली होने लगे और लोग छोटे-छोटे गाँवों में बसने लगे। पहले यह माना जाता था कि विदेशी आक्रमण के कारण यह सभ्यता नष्ट हुई, लेकिन ऐसे प्रमाण नहीं मिले।

आज अधिकांश इतिहासकार मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन, वर्षा में कमी, सूखा तथा सरस्वती नदी के सूखने जैसे कारणों से कृषि प्रभावित हुई और नगरों का जीवन कठिन हो गया। इसलिए लोग ग्रामीण जीवन की ओर लौट गए।

निष्कर्ष

सिंधु-सरस्वती सभ्यता भारत की महान प्राचीन सभ्यता थी। इसके लोग स्वच्छता, नगर नियोजन, जल संरक्षण, कृषि, व्यापार, शिल्पकला और सामाजिक संगठन में अत्यंत उन्नत थे। आज भी इस सभ्यता से हमें स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने और सुव्यवस्थित जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। इसकी अनेक परंपराएँ बाद की भारतीय सभ्यता में भी जीवित रहीं।

प्रश्न 1. इस अध्याय में अध्ययन की गई सभ्यता के अनेक नाम क्यों हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर – इस सभ्यता को अलग-अलग नामों से जाना जाता है क्योंकि इसकी खोज अलग-अलग स्थानों पर हुई और इसका विस्तार बहुत बड़े क्षेत्र में था।

इसे हड़प्पा सभ्यता कहा जाता है क्योंकि इसका पहला प्रमुख स्थल हड़प्पा (वर्तमान पाकिस्तान) में खोजा गया था।
इसे सिंधु सभ्यता कहा जाता है क्योंकि इसके अनेक नगर सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे थे।
इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाता है क्योंकि इसके बहुत-से नगर सरस्वती नदी के क्षेत्र में भी मिले हैं।

इन सभी नामों का अपना-अपना ऐतिहासिक महत्व है। ये नाम इस सभ्यता के विस्तार, भौगोलिक क्षेत्र और खोज के इतिहास को दर्शाते हैं।

प्रश्न 2. सिंधु-सरस्वती सभ्यता की उपलब्धियों का सार देते हुए संक्षिप्त रिपोर्ट (150–200 शब्द) लिखिए।

उत्तर – सिंधु-सरस्वती सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक थी। इसके लोग सुव्यवस्थित नगर बसाने में अत्यंत कुशल थे। नगरों में चौड़ी सड़कें, पक्के मकान, जल-निकास प्रणाली तथा स्नानघर बने होते थे। जल संरक्षण के लिए कुएँ और विशाल जलाशय बनाए गए थे। कृषि उनकी मुख्य आजीविका थी। वे गेहूँ, जौ, बाजरा, धान तथा कपास की खेती करते थे। हड़प्पावासी उत्कृष्ट कारीगर थे और आभूषण, मिट्टी के बर्तन, कांस्य उपकरण तथा मुहरें बनाते थे। उनका व्यापार भारत के विभिन्न क्षेत्रों के साथ-साथ विदेशों तक फैला हुआ था। लोथल जैसे नगर में बंदरगाह होने से समुद्री व्यापार भी होता था। वे स्वच्छता, नगर नियोजन, जल प्रबंधन और शिल्पकला में अत्यंत उन्नत थे। यह सभ्यता भारतीय संस्कृति की महान उपलब्धियों में से एक है।

प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आपको हड़प्पा से कालीबंगा तक यात्रा करनी है। आपके पास विभिन्न विकल्प क्या हैं? क्या आप प्रत्येक विकल्प में लगने वाले समय का अनुमान लगा सकते हैं?

उत्तर – यदि मुझे हड़प्पा से कालीबंगा जाना हो, तो उस समय निम्नलिखित साधन उपलब्ध हो सकते थे—

बैलगाड़ी द्वारा यात्रा।
पैदल यात्रा।
नदी के मार्ग से नाव द्वारा (जहाँ संभव हो)।
पशुओं (बैल आदि) के साथ यात्रा।

यात्रा का समय मार्ग और साधन पर निर्भर करता था। पैदल यात्रा में कई सप्ताह लग सकते थे, जबकि बैलगाड़ी से कुछ कम समय लगता। नदी मार्ग उपलब्ध होने पर यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो सकती थी। उस समय आधुनिक परिवहन के साधन नहीं थे, इसलिए यात्राएँ लंबी और कठिन होती थीं।

प्रश्न 4. कल्पना कीजिए कि यदि हड़प्पा के किसी पुरुष या महिला को आज के भारत के सामान्य रसोईघर में ले आते हैं, तो उन्हें सबसे बड़े चार या पाँच आश्चर्य क्या लगेंगे?

उत्तर – हड़प्पावासी आज के रसोईघर में आकर निम्नलिखित बातों पर आश्चर्य करेंगे—

गैस चूल्हा और बिजली से चलने वाले उपकरण।
रेफ्रिजरेटर में भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
मिक्सर, ग्राइंडर और माइक्रोवेव जैसे आधुनिक उपकरण।
स्टील, एल्युमिनियम और प्रेशर कुकर जैसे बर्तन।
नल से आने वाला स्वच्छ जल तथा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था।

प्रश्न 5. इस अध्याय के सभी चित्रों पर दृष्टि डालते हुए उन आभूषणों, हाव-भावों और वस्तुओं की सूची बनाइए, जो आज भी 21वीं शताब्दी में परिचित प्रतीत होती हैं।

उत्तर – आज भी प्रचलित वस्तुएँ और परंपराएँ—

चूड़ियाँ
कंघा
दर्पण
मिट्टी के बर्तन
खेल-बोर्ड
आभूषण
नमस्ते की मुद्रा
पशुओं के चित्र
हल
तौलने के बाट

इनसे पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता की अनेक परंपराएँ आज भी भारतीय जीवन में दिखाई देती हैं।

प्रश्न 6. धौलावीरा के जलाशयों की प्रणाली क्या सोच प्रतिबिंबित करती है?

उत्तर – धौलावीरा की जलाशय प्रणाली यह दर्शाती है कि हड़प्पावासी जल संरक्षण के महत्व को अच्छी तरह समझते थे। उन्होंने वर्षा जल को संग्रह करने, सुरक्षित रखने और आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित की थी। इससे उनकी दूरदर्शिता, कुशल इंजीनियरिंग तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता का पता चलता है।

प्रश्न 7. मोहनजोदड़ो में ईंटों से निर्मित लगभग 700 कुओं की गणना की गई है। ऐसा लगता है कि उनका नियमित रूप से रख-रखाव किया जाता रहा और अनेक शताब्दियों तक उनका उपयोग किया जाता रहा। निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।

उत्तर – मोहनजोदड़ो में बड़ी संख्या में कुओं का होना यह सिद्ध करता है कि वहाँ के लोग स्वच्छ जल और सार्वजनिक स्वास्थ्य को अत्यधिक महत्व देते थे। कुओं का नियमित रख-रखाव दर्शाता है कि वहाँ एक सुव्यवस्थित प्रशासन कार्य करता था। लोग मिल-जुलकर सार्वजनिक संपत्ति की देखभाल करते थे। इससे यह भी पता चलता है कि नगरों में अनुशासन, सहयोग और नागरिक जिम्मेदारी की भावना विकसित थी।

प्रश्न 8. सामान्यतः यह कहा जाता है कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। इस कथन के महत्व पर चर्चा कीजिए। क्या आप इससे सहमत हैं? वर्तमान भारत के महानगरों के नागरिकों के साथ इसकी तुलना कीजिए।

उत्तर – मैं इस कथन से सहमत हूँ कि हड़प्पावासियों में नागरिकता का उच्च भाव था। इसके प्रमाण इस प्रकार हैं—

उन्होंने स्वच्छ और सुव्यवस्थित नगर बनाए।
जल निकासी की उत्कृष्ट व्यवस्था की।
सार्वजनिक जलाशयों और कुओं का संरक्षण किया।
नगरों में अनुशासन और साफ-सफाई बनाए रखी।
व्यापार और सामाजिक जीवन में ईमानदारी तथा संगठन दिखाई देता है।

अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (परीक्षा उपयोगी)

प्रश्न 1. भारतीय सभ्यता का प्रारंभ किस सभ्यता से माना जाता है?

उत्तर – भारतीय सभ्यता का प्रारंभ सिंधु-सरस्वती (हड़प्पा) सभ्यता से माना जाता है।

प्रश्न 2. हड़प्पा सभ्यता का पहला खोजा गया नगर कौन-सा था?

उत्तर – हड़प्पा।

प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता का दूसरा प्रमुख नगर कौन-सा था?

उत्तर – मोहनजोदड़ो।

प्रश्न 4. हड़प्पा सभ्यता किन अन्य नामों से जानी जाती है?

उत्तर – सिंधु सभ्यता तथा सिंधु-सरस्वती सभ्यता।

प्रश्न 5. हड़प्पा सभ्यता के चार प्रमुख नगरों के नाम लिखिए।

उत्तर: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धौलावीरा और लोथल।

प्रश्न 6. हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?

उत्तर – सुव्यवस्थित नगर योजना और उत्कृष्ट जल-निकास व्यवस्था।

प्रश्न 7. हड़प्पावासी घर किससे बनाते थे?

उत्तर – पकी हुई ईंटों से।

प्रश्न 8. हड़प्पा सभ्यता में सड़कें कैसी थीं?

उत्तर – चौड़ी, सीधी और एक-दूसरे को समकोण पर काटने वाली।

प्रश्न 9. हड़प्पावासी स्वच्छता का ध्यान कैसे रखते थे?

उत्तर – घरों में स्नानघर और पक्की जल-निकास प्रणाली बनाकर।

प्रश्न 10. मोहनजोदड़ो किसके लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर – महास्नानागार और सुव्यवस्थित नगर योजना के लिए।

प्रश्न 11. धौलावीरा किस लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर – विशाल जलाशयों और जल संरक्षण प्रणाली के लिए।

प्रश्न 12. लोथल किस लिए प्रसिद्ध है?

उत्तर – प्राचीन बंदरगाह और समुद्री व्यापार के लिए।

प्रश्न 13. हड़प्पावासियों का मुख्य व्यवसाय क्या था?

उत्तर – कृषि और व्यापार।

प्रश्न 14. हड़प्पावासी कौन-कौन सी फसलें उगाते थे?

उत्तर – गेहूँ, जौ, बाजरा, धान, दालें और सब्जियाँ।

प्रश्न 15. विश्व में सबसे पहले कपास की खेती किस सभ्यता ने की?

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता ने।

प्रश्न 16. हड़प्पावासी किन-किन पशुओं को पालते थे?

उत्तर – गाय, बैल, भैंस, बकरी और भेड़।

प्रश्न 17. हड़प्पावासी किस धातु के उपकरण बनाते थे?

उत्तर – ताँबे और काँसे के।

प्रश्न 18. हड़प्पावासी किस पत्थर के मनके बनाते थे?

उत्तर – कार्नेलियन (लाल पत्थर) के।

प्रश्न 19. हड़प्पा सभ्यता में व्यापार किन मार्गों से होता था?

उत्तर – स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्ग से।

प्रश्न 20. हड़प्पा सभ्यता की मुहरों पर क्या अंकित होता था?

उत्तर – पशुओं के चित्र और लेखन चिह्न।

प्रश्न 21. क्या हड़प्पा लिपि को पूरी तरह पढ़ लिया गया है?

उत्तर – नहीं, अभी तक हड़प्पा लिपि को पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है।

प्रश्न 22. प्रसिद्ध कांस्य ‘नर्तकी’ की मूर्ति कहाँ मिली?

उत्तर – मोहनजोदड़ो में।

प्रश्न 23. हड़प्पा सभ्यता के लोगों के मनोरंजन के साधन क्या थे?

उत्तर – खेल, खिलौने, संगीत और नृत्य।

प्रश्न 24. हड़प्पा सभ्यता के पतन का एक प्रमुख कारण क्या था?

उत्तर – जलवायु परिवर्तन और वर्षा में कमी।

प्रश्न 25. सरस्वती नदी के सूखने से क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – कृषि प्रभावित हुई और कई नगर खाली हो गए।

प्रश्न 26. हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद लोग कहाँ रहने लगे?

उत्तर – छोटे-छोटे गाँवों और ग्रामीण बस्तियों में।

प्रश्न 27. हड़प्पा सभ्यता से हमें क्या सीख मिलती है?

उत्तर – स्वच्छता, जल संरक्षण, सुव्यवस्थित नगर योजना और पर्यावरण की रक्षा का महत्व।

प्रश्न 28. हड़प्पावासियों की नागरिक भावना का प्रमाण क्या है?

उत्तर – स्वच्छ नगर, पक्की नालियाँ, जल संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं का रख-रखाव।

प्रश्न 29. हड़प्पा सभ्यता विश्व की महान सभ्यताओं में क्यों गिनी जाती है?

उत्तर – क्योंकि यह नगर नियोजन, जल प्रबंधन, कृषि, व्यापार, शिल्पकला और स्वच्छता में अत्यंत उन्नत थी।

प्रश्न 30. भारतीय सभ्यता के विकास में हड़प्पा सभ्यता का क्या योगदान है?

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता ने भारत को सुव्यवस्थित नगर, जल संरक्षण, स्वच्छता, कृषि, व्यापार, शिल्पकला और सामाजिक संगठन की महान परंपराएँ दीं। इसकी अनेक विशेषताएँ आगे की भारतीय सभ्यता में भी दिखाई देती हैं।

दीर्घ प्रश्न-उत्तर (परीक्षा उपयोगी)

प्रश्न 1. हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित सभ्यताओं में से एक थी। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

सुव्यवस्थित नगर योजना।
चौड़ी एवं सीधी सड़कें।
पकी ईंटों से बने मकान।
उत्कृष्ट जल-निकास व्यवस्था।
प्रत्येक घर में स्नानघर और कुएँ।
कृषि एवं व्यापार का विकास।
सुंदर आभूषण, मुहरें और मिट्टी के बर्तन।
स्वच्छता और नागरिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान।

इन विशेषताओं से स्पष्ट होता है कि हड़प्पा सभ्यता अपने समय की अत्यंत विकसित सभ्यता थी।

प्रश्न 2. हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना अत्यंत सुव्यवस्थित थी।

नगरों की सड़कें चौड़ी तथा सीधी थीं।
सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
मकान पकी ईंटों से बनाए जाते थे।
प्रत्येक घर में कमरे, रसोई और स्नानघर होते थे।
गंदे पानी के निकास के लिए पक्की नालियाँ बनाई गई थीं।
नगरों को ऊँचे दुर्ग क्षेत्र और निचले नगर में बाँटा गया था।
जल की व्यवस्था के लिए कुएँ और जलाशय बनाए गए थे।

इस प्रकार हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना आधुनिक नगरों के समान विकसित थी।

प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता में कृषि, पशुपालन और व्यापार का वर्णन कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन और व्यापार पर आधारित थी।

लोग गेहूँ, जौ, धान, बाजरा तथा दालों की खेती करते थे।
विश्व में सबसे पहले कपास की खेती करने वालों में हड़प्पावासी थे।
गाय, बैल, भैंस, बकरी और भेड़ जैसे पशु पाले जाते थे।
व्यापार भारत के विभिन्न क्षेत्रों तथा विदेशों तक होता था।
स्थल मार्ग, नदी मार्ग और समुद्री मार्ग से व्यापार किया जाता था।
लोथल का बंदरगाह समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र था।

इस प्रकार कृषि, पशुपालन और व्यापार ने हड़प्पा सभ्यता को समृद्ध बनाया।

प्रश्न 4. हड़प्पा सभ्यता की जल-प्रबंधन व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता जल संरक्षण और जल प्रबंधन के लिए प्रसिद्ध थी।

प्रत्येक घर में स्नानघर बनाया जाता था।
गंदे पानी को निकालने के लिए पक्की नालियाँ थीं।
मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुएँ मिले हैं।
धौलावीरा में वर्षा जल संग्रह के लिए विशाल जलाशय बनाए गए थे।
जलाशयों की नियमित सफाई और रख-रखाव किया जाता था।

इससे पता चलता है कि हड़प्पावासी जल संरक्षण के महत्व को अच्छी तरह समझते थे।

प्रश्न 5. हड़प्पा सभ्यता की कला एवं शिल्पकला का वर्णन कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता के लोग कला और शिल्पकला में अत्यंत निपुण थे।

वे सुंदर मिट्टी के बर्तन बनाते थे।
सोने, चाँदी और ताँबे के आभूषण बनाते थे।
कार्नेलियन पत्थर के मनके तैयार करते थे।
कांस्य की प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाई गई।
पशुओं की आकृतियों वाली मुहरें बनाई जाती थीं।
खिलौने, मूर्तियाँ तथा अन्य सजावटी वस्तुएँ भी बनाई जाती थीं।

इन कलाकृतियों से उनकी रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का पता चलता है।

प्रश्न 6. हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – लगभग 1900 ईसा पूर्व के बाद हड़प्पा सभ्यता का पतन होने लगा।

इसके प्रमुख कारण थे—

जलवायु में परिवर्तन।
वर्षा की मात्रा में कमी।
सरस्वती नदी का सूखना।
कृषि उत्पादन में गिरावट।
नगरों से लोगों का गाँवों की ओर जाना।

आज अधिकांश इतिहासकार इन्हीं प्राकृतिक कारणों को हड़प्पा सभ्यता के पतन का मुख्य कारण मानते हैं।

प्रश्न 7. हड़प्पा सभ्यता से हमें क्या-क्या सीख मिलती है?

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता आज भी हमें अनेक महत्वपूर्ण सीख देती है।

स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए।
जल का संरक्षण करना चाहिए।
नगरों की उचित योजना बनानी चाहिए।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए।
पर्यावरण का संरक्षण करना चाहिए।
नागरिक कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।

यदि हम इन बातों का पालन करें, तो हमारा समाज अधिक स्वच्छ और विकसित बन सकता है।

प्रश्न 8. हड़प्पा सभ्यता को विकसित सभ्यता क्यों कहा जाता है?

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता को विकसित सभ्यता इसलिए कहा जाता है क्योंकि—

यहाँ सुव्यवस्थित नगर बसाए गए थे।
पकी ईंटों से मजबूत मकान बनाए जाते थे।
जल-निकास की उत्कृष्ट व्यवस्था थी।
कृषि और व्यापार उन्नत थे।
कला और शिल्पकला का विकास हुआ था।
जल संरक्षण की वैज्ञानिक व्यवस्था थी।
लोग स्वच्छता और अनुशासन का पालन करते थे।

इन सभी कारणों से हड़प्पा सभ्यता अपने समय की सबसे उन्नत सभ्यताओं में गिनी जाती है।

प्रश्न 9. लोथल और धौलावीरा का ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – लोथल और धौलावीरा हड़प्पा सभ्यता के दो महत्वपूर्ण नगर थे।

लोथल समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र था। यहाँ एक विशाल बंदरगाह मिला है, जिससे पता चलता है कि हड़प्पावासी विदेशों से व्यापार करते थे।
धौलावीरा अपनी उन्नत जल संरक्षण प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ विशाल जलाशय बनाए गए थे, जिनमें वर्षा का जल संग्रह किया जाता था।

इन दोनों नगरों से हड़प्पा सभ्यता की वैज्ञानिक सोच, व्यापारिक उन्नति और इंजीनियरिंग कौशल का परिचय मिलता है।

प्रश्न 10. “हड़प्पा सभ्यता आधुनिक भारत के लिए प्रेरणा है।” इस कथन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर – हड़प्पा सभ्यता आधुनिक भारत के लिए कई कारणों से प्रेरणादायक है।

यह स्वच्छता का महत्व सिखाती है।
जल संरक्षण की आवश्यकता बताती है।
सुव्यवस्थित नगर निर्माण की प्रेरणा देती है।
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने का संदेश देती है।
पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाती है।
नागरिक कर्तव्यों के पालन की शिक्षा देती है।

यदि आज का समाज हड़प्पा सभ्यता की इन विशेषताओं को अपनाए, तो हमारे शहर अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और विकसित बन सकते हैं। इसलिए हड़प्पा सभ्यता आधुनिक भारत के लिए एक आदर्श और प्रेरणास्रोत मानी जाती है।

Leave a Comment