वैश्विक फर्टिलाइजर संकट: रूस का निर्यात बैन और हॉर्मोज विवाद, क्या भारत में भी होगी खाद की किल्लत? Global Fertilizer Crisis: Russia’s Export Ban and the Hormuz Dispute
रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर उत्पन्न होने वाले उर्वरक संकट का विश्लेषण करता है। रूस द्वारा निर्यात पर रोक और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के चलते भारत सहित दुनिया भर में नाइट्रोजन और यूरिया की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। लेख बताता है कि कैसे प्राकृतिक गैस की कमी सीधे खाद उत्पादन को चोट पहुँचाती है, जो अंततः खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। हालांकि, भारत सरकार ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक होने का दावा करते हुए नागरिकों से पैनिक न करने और कालाबाजारी से बचने की अपील की है। अंत में, यह संदेश दिया गया है कि किसान मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें ताकि वैश्विक अस्थिरता के बीच कृषि उत्पादन सुरक्षित रहे।
ईरान-इजराइल संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच दुनिया इस समय एक गंभीर फर्टिलाइजर (उर्वरक) संकट की कगार पर खड़ी है। तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बाद अब वैश्विक खाद आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) पर पड़ने वाला यह प्रभाव सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
रूस का निर्यात प्रतिबंध और वैश्विक आपूर्ति में बाधा
रूस ने हाल ही में अपने यहां से नाइट्रोजन फर्टिलाइजर्स के निर्यात पर एक महीने का प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा, स्टेट ऑफ हॉर्मोज (Strait of Hormuz) में जारी तनाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि दुनिया का लगभग 33% फर्टिलाइजर इसी रास्ते से गुजरता है। वैश्विक यूरिया सप्लाई का 46% और सल्फर सप्लाई का 45% हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है।
प्राकृतिक गैस और फर्टिलाइजर का अंतर्संबंध
फर्टिलाइजर उत्पादन सीधे तौर पर प्राकृतिक गैस (Natural Gas/CH4) पर निर्भर करता है। यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट बनाने के लिए हाइड्रोजन की आवश्यकता होती है, जो प्राकृतिक गैस से प्राप्त होता है। कतर, जो दुनिया की गैस सप्लाई में बड़ी हिस्सेदारी रखता है, वहां तनाव होने से हाइड्रोजन और अमोनिया की उपलब्धता प्रभावित होती है, जिससे फर्टिलाइजर उत्पादन रुक जाता है।
अन्य देशों की भूमिका और हमले
- चीन और रूस: चीन ने 19 मार्च को और रूस ने 24 मार्च को अपने फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट को रोक दिया है।
- यूक्रेन का हमला: यूक्रेन ने हाल ही में रूस के एक प्रमुख फर्टिलाइजर प्लांट पर ड्रोन हमला किया, जो दुनिया का 11% अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन करता था। इस हमले के कारण वह फैक्ट्री मई तक के लिए बंद हो गई है।
भारत पर प्रभाव और वर्तमान स्थिति
भारत दुनिया में यूरिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ-साथ दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत को सालाना 8 से 10 मेट्रिक टन यूरिया आयात करना पड़ता है। हालांकि, खरीफ की फसल का सीजन आने वाला है, लेकिन भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
- आत्मनिर्भरता: भारत यूरिया में लगभग 87% आत्मनिर्भर है, जबकि डीएपी (DAP) में 40% और पोटाश (Potash) के लिए 100% आयात पर निर्भर है।
- सरकारी तैयारी: भारत के विदेश मंत्रालय और कृषि मंत्री के अनुसार, सरकार ने पहले ही वैश्विक समझौतों के माध्यम से 86 लाख टन उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
विशेषज्ञों और सरकार ने किसानों को सलाह दी है कि वे पैनिक (घबराहट) में न आएं और खाद की जमाखोरी न करें। सरकार ने चेतावनी दी है कि कालाबाजारी करने वालों पर ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, पौधों की वास्तविक आवश्यकता जानने के लिए मृदा परीक्षण (Soil Test) करवाने की सलाह दी गई है ताकि उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जा सके。
निष्कर्ष: यद्यपि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और स्टेट ऑफ हॉर्मोज के बंद होने से दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं, लेकिन भारत सरकार के अग्रिम स्टॉक और कूटनीतिक समझौतों के कारण वर्तमान में देश के भीतर खरीफ सीजन के लिए खाद का कोई तात्कालिक संकट नहीं है।
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