28 फ़रवरी 2026: इजरायल और अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला – मध्य-पूर्व में महायुद्ध की शुरुआत?
तेहरान/यरुशलम: 28 फ़रवरी 2026 की सुबह मध्य-पूर्व के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज की गई है। इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है, जिसे इजरायल ने “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” (निवारक हमला) करार दिया है। इस हमले का उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं और परमाणु खतरों को जड़ से खत्म करना बताया जा रहा है।
ऑपरेशन ‘रोरिंग लायन’ और ‘एपिक फ्यूरी’
इस संयुक्त सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion), ‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जूडा’ (Operation Shield of Judah) और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) जैसे कोडनेम दिए गए हैं। इस हमले में इजरायली वायु सेना (IAF), अमेरिकी वायु सेना और अमेरिकी नौसेना ने एक साथ हिस्सा लिया।
प्रमुख लक्ष्य और धमाके:
- ईरान की राजधानी तेहरान सहित कोम (Qom), केरमानशाह, इसफ़हान और कारज जैसे शहरों में बड़े विस्फोटों की खबरें हैं।
- तेहरान के उस संवेदनशील इलाके में भी मिसाइलें गिरी हैं जहाँ ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का आवास और कार्यालय स्थित है।
- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को सुरक्षित बताया गया है, जबकि खामेनेई को एक गुप्त “सुरक्षित स्थान” पर भेज दिया गया है।
इजरायल और अमेरिका का आधिकारिक रुख
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह कार्रवाई ईरान के “आतंकवादी शासन” द्वारा पैदा किए गए “अस्तित्व के खतरे” को हटाने के लिए की गई है। इजरायल ने पूरे देश में 48 घंटे के लिए आपातकाल (State of Emergency) घोषित कर दिया है और हवाई क्षेत्र (Airspace) को नागरिक उड़ानों के लिए बंद कर दिया गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “बड़े युद्धक अभियान” (Major Combat Operations) शुरू कर दिए हैं। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ईरान की सैन्य शक्ति को नष्ट करना और वहां “शासन परिवर्तन” (Regime Change) लाना है। उन्होंने ईरानी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के जवानों को चेतावनी दी कि वे हथियार डाल दें या “निश्चित मृत्यु” का सामना करें।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और आंतरिक स्थिति
ईरान ने इस हमले को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए “विनाशकारी और कड़ा जवाब” देने की शपथ ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इजरायल की ओर मिसाइलों की बौछार (Barrage of Missiles) शुरू कर दी है, जिससे पूरे इजरायल में सायरन बज रहे हैं और लोगों को बम निरोधक बंकरों में रहने की सलाह दी गई है।
ईरान के भीतर स्थिति तनावपूर्ण है। हमले के तुरंत बाद पूरे ईरान में इंटरनेट कनेक्टिविटी गिरकर केवल 4% रह गई और मोबाइल सेवाएं भी ठप कर दी गईं।
वैश्विक और आर्थिक प्रभाव
इस युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी हिला कर रख दिया है:
- तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें बढ़कर $72.48 प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं।
- शेयर बाजार: युद्ध की आशंका और मुद्रास्फीति के डर से S&P 500, Dow Jones और Nasdaq में भारी गिरावट देखी गई है।
- हवाई यातायात: इजरायल, ईरान, इराक और जॉर्डन ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का मार्ग बदल दिया गया है।
भारत के लिए चिंता और सुरक्षा निर्देश
भारत सरकार ने इस संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। इजरायल और ईरान में स्थित भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें अत्यधिक सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइनों ने अपनी उड़ानों को डायवर्ट कर दिया है।
विशेषज्ञों की राय: क्या यह ‘पूरी तरह का युद्ध’ है?
विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सीमित एयर स्ट्राइक नहीं बल्कि एक सुनियोजित व्यापक सैन्य अभियान है। जहाँ इजरायल और अमेरिका इसे शांति बहाली का कदम बता रहे हैं, वहीं चीन और अफ्रीकी संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों ने इसे वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए तनाव कम करने (De-escalation) की अपील की है।
यह स्थिति अभी भी अस्थिर है और दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं।
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