रामलीला – मुंशी प्रेमचंद | Story – Ram Leela – Munshi Premchand

रामलीला – मुंशी प्रेमचंद | Story – Ram Leela – Munshi Premchand Image source: https://dubeat.com/2021/07/an-ode-to-munshi-premchand/ इधर एक मुद्दत से रामलीला देखने नहीं गया। बंदरों के भद्दे चेहरे लगाए, आधी टाँगों का पाजामा और काले रंग का ऊँचा कुरता पहने आदमियों को दौड़ते, हू-हू करते देख कर अब हँसी आती है; मज़ा नहीं आता। काशी की … Read more

मुक्ति-मार्ग – मुंशी प्रेमचंद | Story – Mukti Marg – Munshi Premchand

Image source: https://currentaffairs.adda247.com/birth-anniversary-of-premchand-being-celebrated/   सिपाही को अपनी लाल पगड़ी पर, सुंदरी को अपने गहनों पर और वैद्य को अपने सामने बैठे हुए रोगियों पर जो घमंड होता है, वही किसान को अपने खेतों को लहराते हुए देखकर होता है। झींगुर अपने ऊख के खेतों को देखता, तो उस पर नशा-सा छा जाता। तीन बीघे ऊख थी। … Read more

बड़े भाई साहब – मुंशी प्रेमचंद | Story – Bade Bhai Sahab – Munshi Premchand

बड़े भाई साहब – मुंशी प्रेमचंद | Story – Bade Bhai Sahab – Munshi Premchand   Image source: https://dubeat.com/2021/07/an-ode-to-munshi-premchand/ मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया था; लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी … Read more

नशा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Nasha – Munshi Premchand

  नशा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Nasha – Munshi Premchand   Image Source: https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/munshi-premchand-birth-anniversary-839029-2016-10-08   ईश्वरी एक बड़े ज़मींदार का लड़का था और मैं एक ग़रीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं। मैं ज़मींदारी की बुराई करता, उन्हें हिंसक … Read more

सद्गति – मुंशी प्रेमचंद | Story – Sadgati – Munshi Premchand

  सद्गति – मुंशी प्रेमचंद | Story – Sadgati – Munshi Premchand Image source: https://dubeat.com/2021/07/an-ode-to-munshi-premchand/ दुखी चमार द्वार पर झाड़ू लगा रहा था और उसकी पत्नी झुरिया, घर को गोबर से लीप रही थी। दोनों अपने-अपने काम से फ़ुर्सत पा चुके थे, तो चमारिन ने कहा, ‘तो जाके पंडित बाबा से कह आओ न। ऐसा … Read more

नमक का दारोग़ा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Namak Ka Daroga – Munshi Premchand

 नमक का दारोग़ा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Namak Ka Daroga – Munshi Premchand जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वरप्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों … Read more

दो बैलों की कथा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Do Bailon Ki Katha – Munshi Premchand

दो बैलों की कथा – मुंशी प्रेमचंद | Story – Do Bailon Ki Katha – Munshi Premchand Image Source: https://www.indiatoday.in/education-today/gk-current-affairs/story/munshi-premchand-birth-anniversary-839029-2016-10-08 जानवरों में गधा सबसे ज़ियादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवक़ूफ़ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा सचमुच बेवक़ूफ़ है या उसके सीधेपन, उसकी निरापद … Read more

ठाकुर का कुआँ – मुंशी प्रेमचंद | Story – Thakur Ka Kuan – Munshi Premchand

ठाकुर का कुआँ –  मुंशी प्रेमचंद जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आई। गंगी से बोला- यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं जाता। गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाए देती है ! गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी। कुआँ दूर था, … Read more

पंच परमेश्वर – मुंशी प्रेमचंद | Story – Panch Parmeshwar – Munshi Premchand

पंच परमेश्वर – मुंशी प्रेमचंद | Story – Panch Parmeshwar – Munshi Premchand Image source: https://dubeat.com/2021/07/an-ode-to-munshi-premchand/ जुम्मन शेख़ और अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक को दूसरे पर अटल विश्वास था। जुम्मन जब हज करने गए थे, तब अपना घर अलगू को सौंप … Read more

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद | Story – Puas Ki Raat – Munshi Premchand

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद | Story – Puas Ki Raat – Munshi Premchand Image source: https://currentaffairs.adda247.com/birth-anniversary-of-premchand-being-celebrated/ हल्कू ने आकर स्त्री से कहा—सहना आया है, लाओ, जो रुपए रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली—तीन ही तो रुपए हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ … Read more