कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 9 – दैनिक जीवन में पृथक्करण विधियाँ | Separation Methods in Daily Life
हमारे दैनिक जीवन में अनेक ऐसी वस्तुएँ हैं जो दो या दो से अधिक पदार्थों के मिश्रण से बनी होती हैं। जब किसी मिश्रण में उपस्थित पदार्थों को अलग-अलग करना आवश्यक होता है, तब पृथक्करण की विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है। इस अध्याय में मल्ली और वल्ली की भारत यात्रा के माध्यम से दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली पृथक्करण विधियों को समझाया गया है।
1. हस्त चयन
जब किसी ठोस मिश्रण में से अवांछित पदार्थों को हाथ से चुनकर अलग किया जाता है, तो इसे हस्त चयन कहते हैं। यह विधि पदार्थों के आकार, रंग और आकृति में अंतर के आधार पर की जाती है। उदाहरण के लिए, चावल या गेहूँ में मिले छोटे कंकड़ और भूसी को हाथ से अलग किया जा सकता है। यदि अलग किए जाने वाले पदार्थ कम मात्रा में हों और आसानी से उठाए जा सकें, तो हस्त चयन सुविधाजनक होता है।
2. थ्रेशिंग
खेतों में गेहूँ आदि की फसल काटने के बाद उनके दानों को पौधों के डंठलों से अलग करना पड़ता है। पौधों को पीटकर या मशीन की सहायता से दानों को अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं। आजकल थ्रेशर मशीनों का उपयोग किया जाता है। ये मशीनें थ्रेशिंग के साथ-साथ अनाज से भूसी को अलग करने का कार्य भी कर सकती हैं।
3. ओसाई
थ्रेशिंग के बाद अनाज के दाने भूसी के साथ मिल जाते हैं। भूसी हल्की होती है जबकि अनाज के दाने भारी होते हैं। हवा या पवन की सहायता से हल्की भूसी को भारी अनाज से अलग करने की प्रक्रिया को ओसाई (विनोइंग) कहते हैं। पारंपरिक रूप से इसके लिए बाँस से बने सूप का उपयोग किया जाता है। हवा भूसी को दूर ले जाती है, जबकि भारी अनाज नीचे गिर जाता है।
4. छानना
जब किसी ठोस मिश्रण के पदार्थों के कणों के आकार में अंतर होता है, तब चालनी की सहायता से उन्हें अलग किया जा सकता है। इस प्रक्रिया को छानना कहते हैं। उदाहरण के लिए, गेहूँ के आटे से चोकर और बड़े कणों को अलग करने के लिए चालनी का उपयोग किया जाता है। बारीक आटे के कण चालनी के छिद्रों से निकल जाते हैं, जबकि बड़े कण चालनी में रह जाते हैं। निर्माण स्थलों पर रेत से कंकड़ अलग करने के लिए भी चालनी का उपयोग किया जा सकता है।
5. वाष्पीकरण
किसी विलयन में घुले हुए ठोस पदार्थ को द्रव से अलग करने के लिए वाष्पीकरण या वाष्पन की विधि का उपयोग किया जा सकता है। समुद्री जल में नमक घुला होता है। समुद्री जल को उथले गड्ढों में धूप और हवा के संपर्क में रखा जाता है। कुछ समय बाद पानी वाष्पित हो जाता है और नमक पीछे रह जाता है। इस प्रकार समुद्री जल से नमक प्राप्त किया जाता है।
6. अवसादन और निस्तारण
यदि किसी द्रव में कोई भारी और अघुलनशील पदार्थ मिला हो, तो कुछ समय तक द्रव को स्थिर रखने पर वह पदार्थ नीचे बैठ जाता है। इस प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं।
इसके बाद ऊपर के साफ द्रव को धीरे-धीरे दूसरे पात्र में उड़ेलकर अलग किया जाता है। इसे निस्तारण कहते हैं। उदाहरण के लिए, चाय की पत्तियों को कुछ समय नीचे बैठने दिया जा सकता है और फिर चाय को धीरे-धीरे दूसरे कप में डाला जा सकता है। चावल और दालों को धोते समय भी निस्तारण का उपयोग किया जाता है।
7. निस्यंदन
किसी द्रव में उपस्थित अघुलनशील ठोस कणों को किसी छिद्रयुक्त पदार्थ की सहायता से अलग करने की प्रक्रिया को निस्यंदन (फिल्ट्रेशन) कहते हैं। चाय की पत्तियों को चाय से अलग करने के लिए चाय की चालनी उपयोगी है। मटमैले जल को कपड़े या फिल्टर-पत्र से छाना जा सकता है। फिल्टर-पत्र में बहुत छोटे छिद्र होते हैं, इसलिए मिट्टी जैसे कण उसमें रुक जाते हैं और जल नीचे निकल जाता है। कपास, चारकोल और रेत जैसी सामग्रियों का भी निस्यंदक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
8. मथना
दही से मक्खन प्राप्त करने के लिए मथने की विधि का उपयोग किया जाता है। दही को मथने पर मक्खन अलग होकर ऊपर तैरने लगता है, जबकि छाछ नीचे रह जाती है। इस प्रकार मथने से दही के उपयोगी घटक अलग किए जाते हैं।
9. चुंबकीय पृथक्करण
कुछ पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे पदार्थों को चुंबकीय पदार्थ कहा जाता है। लोहा इसका सामान्य उदाहरण है। चुंबक की सहायता से चुंबकीय और अचुंबकीय पदार्थों को अलग करने की प्रक्रिया चुंबकीय पृथक्करण कहलाती है। जैसे लकड़ी के बुरादे में गिर गई लोहे की कीलों को चुंबक से आसानी से अलग किया जा सकता है। पुनर्चक्रण में भी चुंबक की सहायता से लोहे की वस्तुओं को कचरे से अलग किया जाता है।
10. पृथक्करण का महत्व
हम पदार्थों का पृथक्करण मुख्यतः दो कारणों से करते हैं—किसी अनुपयोगी अवयव को हटाने के लिए या दो भिन्न लेकिन उपयोगी अवयवों को अलग करने के लिए। अलग-अलग मिश्रणों के लिए अलग-अलग विधियों का चुनाव किया जाता है। यह चुनाव पदार्थों के गुणों, जैसे आकार, भार, घुलनशीलता और चुंबकीय गुण आदि पर निर्भर करता है।
कई बार किसी मिश्रण के सभी अवयवों को अलग करने के लिए एक से अधिक विधियों को क्रम से प्रयोग करना पड़ता है। उदाहरण के लिए, लोहे की कीलें, रेत, काली मिर्च, कंकड़, नमक और जल के मिश्रण को अलग करने के लिए चुंबकीय पृथक्करण, हस्त चयन, छानना, वाष्पीकरण आदि विधियों का उचित क्रम में उपयोग करना होगा।
अतः पृथक्करण विधियाँ हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। किसान, रसोई में काम करने वाले लोग, निर्माण कार्य करने वाले व्यक्ति और पुनर्चक्रणकर्ता सभी विभिन्न परिस्थितियों में इन विधियों का उपयोग करते हैं। इस अध्याय से हमें यह समझ में आता है कि मिश्रण के घटकों के गुणों को पहचानकर उनके लिए उपयुक्त पृथक्करण विधि का चुनाव किया जा सकता है।
पुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. पृथक्करण विधि के रूप में हस्त चयन का क्या प्रयोजन है?
उत्तर:
हस्त चयन का उपयोग मिश्रण में से ठोस पदार्थों को हाथ से चुनकर अलग करने के लिए किया जाता है। यह विधि तब उपयोगी होती है जब अलग किए जाने वाले पदार्थ कम मात्रा में हों और आसानी से उठाए जा सकें।
सही विकल्प – (ख) छँटाई।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से किन पदार्थों का पृथक्करण मथना विधि से किया जाता है?
(क) तेल का पानी से
(ख) रेत का पानी से
(ग) मक्खन का दही से
(घ) ऑक्सीजन का वायु से
उत्तर:
दही को मथने पर उसमें से मक्खन अलग होकर ऊपर तैरने लगता है और छाछ नीचे रह जाती है।
सही विकल्प – (ग) मक्खन का दही से।
प्रश्न 3. निस्यंदन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कारक प्रायः अनिवार्य होता है?
(क) उपकरण का आकार
(ख) वायु की उपस्थिति
(ग) छिद्रों का आकार
(घ) मिश्रण का तापमान
उत्तर:
निस्यंदन में छिद्रों का आकार महत्वपूर्ण होता है। निस्यंदक के छिद्र इतने उपयुक्त होने चाहिए कि द्रव निकल जाए और अवांछित ठोस कण रुक जाएँ।
सही विकल्प – (ग) छिद्रों का आकार।
प्रश्न 4. निम्नलिखित कथनों को सही या गलत बताइए और गलत कथनों को सही करके लिखिए।
उत्तर:
(क) बेसन और काले चने का मिश्रण — हस्त चयन
सही। इस मिश्रण में ठोस पदार्थों को हाथ से अलग किया जा सकता है।
(ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण — चुंबकीय पृथक्करण
गलत। चॉक पाउडर और पानी को निस्यंदन द्वारा अलग किया जा सकता है।
(ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण — निस्तारण
गलत। भुट्टे और आलू जैसे ठोस पदार्थों को हस्त चयन द्वारा अलग किया जा सकता है।
(घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण — चुंबकीय पृथक्करण
सही। लोहे का चूरा चुंबक की ओर आकर्षित होता है, जबकि लकड़ी का बुरादा नहीं।
(ङ) तेल और पानी का मिश्रण — निस्तारण
सही। तेल और पानी आपस में नहीं मिलते तथा कुछ समय स्थिर रखने पर अलग-अलग परतें बना लेते हैं। ऊपर की परत को सावधानी से अलग किया जा सकता है।
प्रश्न 5. स्तंभ I में दिए गए प्रत्येक मिश्रण का स्तंभ II में दी गई उपयुक्त पृथक्करण विधि से मिलान करें।
उत्तर:
| स्तंभ I – मिश्रण | स्तंभ II – पृथक्करण विधि |
| (क) बेसन और काले चने का मिश्रण | हस्त चयन |
| (ख) चॉक पाउडर और पानी का मिश्रण | निस्यंदन |
| (ग) भुट्टे और आलू का मिश्रण | हस्त चयन |
| (घ) लोहे के चूरे और बुरादे का मिश्रण | चुंबकीय पृथक्करण |
| (ङ) तेल और पानी का मिश्रण | निस्तारण |
प्रश्न 6. किस परिस्थिति में आप ठोस और द्रव के मिश्रण को पृथक करने में निस्यंदन के स्थान पर निस्तारण विधि का उपयोग करेंगे?
उत्तर:
जब द्रव में मिला हुआ ठोस पदार्थ भारी और अघुलनशील हो तथा कुछ समय तक मिश्रण को स्थिर रखने पर वह पात्र के तल में बैठ जाए, तब निस्तारण का उपयोग किया जा सकता है। ऊपर के द्रव को सावधानी से दूसरे पात्र में उड़ेलकर अलग किया जाता है। इसे निस्तारण कहते हैं।
प्रश्न 7. नासिका में बालों की उपस्थिति को आप किस पृथक्करण प्रक्रिया से जोड़कर देखते हैं?
उत्तर:
नासिका के बाल हवा में उपस्थित धूल और अन्य बड़े कणों को रोकते हैं तथा हवा को आगे जाने देते हैं। यह कार्य निस्यंदन (फिल्ट्रेशन) की प्रक्रिया से मिलता-जुलता है, जिसमें छिद्रों के माध्यम से द्रव या गैस गुजरती है और कुछ कण रुक जाते हैं।
प्रश्न 8. कोविड-19 के समय हम सभी ने मास्क पहने थे। सामान्यतया वे किस सामग्री से बने होते हैं? आपके मुँह और नथनों को ढँकने में मास्क की क्या भूमिका है?
उत्तर:
मास्क सामान्यतः ऐसे कपड़े या रेशेदार पदार्थों से बने होते हैं जिनमें बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। मास्क नाक और मुँह को ढँकता है तथा हवा के साथ आने-जाने वाले कुछ कणों को रोकने में सहायता करता है। यह निस्यंदन की अवधारणा से संबंधित है।
प्रश्न 9. आपको आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे का मिश्रण दिया गया है। इस मिश्रण के प्रत्येक अवयव को पृथक करने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार कीजिए।
उत्तर:
चरण 1 – हस्त चयन:
सबसे पहले आलू को हाथ से चुनकर अलग कर लें।
चरण 2 – पानी मिलाना:
बचे हुए नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण में पानी डालें। नमक पानी में घुल जाएगा, जबकि लकड़ी का बुरादा नहीं घुलेगा।
चरण 3 – निस्यंदन:
मिश्रण को कपड़े या फिल्टर की सहायता से छान लें। लकड़ी का बुरादा फिल्टर पर रह जाएगा और नमक का विलयन नीचे एकत्र हो जाएगा।
चरण 4 – वाष्पीकरण:
नमक के विलयन को वाष्पित करने पर पानी उड़ जाएगा और नमक पीछे रह जाएगा।
इस प्रकार तीनों अवयव अलग किए जा सकते हैं।
प्रश्न 10. ‘बुद्धिमान लीला’ कहानी में सही विकल्प चुनिए।
(क) नमक के विलयन को सूर्य के प्रकाश/धूप में रखकर नमक को इससे पृथक किया जा सकता है।
उत्तर – धूप।
(ख) जब एक अवयव कम मात्रा में हो तभी हस्त चयन का उपयोग होता है।
उत्तर – हस्त चयन।
(ग) मुरमुरे और चावल के दानों के मिश्रण को थ्रेशिंग/ओसाई द्वारा पृथक कर सकते हैं।
उत्तर – ओसाई।
(घ) सरसों के तेल और नींबू पानी के मिश्रण को निस्तारण द्वारा पृथक कर सकते हैं।
उत्तर – निस्तारण।
(ङ) छानने की विधि का उपयोग चावल के आटे और पानी को पृथक करने में होता है।
उत्तर – निस्यंदन।
प्रश्न 11. पौधों के विभिन्न भागों से बनाए गए हर्बल काढ़े में किस पृथक्करण विधि का उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर:
हर्बल काढ़ा तैयार करने के बाद पौधों की पत्तियाँ, तने या अन्य ठोस भागों को द्रव से अलग करने के लिए निस्यंदन या छानने की विधि का उपयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 12. मिश्रण में उपस्थित पदार्थों को पृथक करने के लिए कई बार एक से अधिक विधियों की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर:
जब किसी मिश्रण में दो से अधिक अलग-अलग पदार्थ होते हैं, तो सभी पदार्थों के गुण समान नहीं होते। किसी पदार्थ को उसके आकार, भार, घुलनशीलता या चुंबकीय गुण के आधार पर अलग करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मिश्रण के सभी अवयवों को अलग करने के लिए पृथक्करण की कई विधियों को उचित क्रम में मिलाकर प्रयोग करना पड़ता है।
याद रखने योग्य मुख्य बिंदु
- हस्त चयन → हाथ से चुनकर अलग करना।
- थ्रेशिंग → फसल के पौलों से अनाज के दाने अलग करना।
- ओसाई → हवा से हल्की भूसी को भारी अनाज से अलग करना।
- छानना → कणों के आकार के आधार पर चालनी से अलग करना।
- वाष्पीकरण → विलयन से घुले ठोस को अलग करना।
- अवसादन → भारी अघुलनशील कणों का नीचे बैठना।
- निस्तारण → ऊपर के द्रव को सावधानी से अलग करना।
- निस्यंदन → अघुलनशील ठोस को द्रव से छानकर अलग करना।
- मथना → दही से मक्खन अलग करना।
- चुंबकीय पृथक्करण → चुंबकीय पदार्थों को चुंबक से अलग करना।
अतिरिक्त प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर:
दो या दो से अधिक पदार्थों के एक साथ मिलने से बने पदार्थ को मिश्रण कहते हैं। मिश्रण में उपस्थित अलग-अलग पदार्थों को उनके गुणों के आधार पर पृथक किया जा सकता है।
प्रश्न 2. पदार्थों को पृथक करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर:
पृथक्करण मुख्यतः दो कारणों से किया जाता है—
- किसी मिश्रण से अवांछित पदार्थ को हटाने के लिए।
- मिश्रण में उपस्थित दो या अधिक उपयोगी पदार्थों को अलग-अलग प्राप्त करने के लिए।
प्रश्न 3. हस्त चयन क्या है?
उत्तर:
मिश्रण में से अवांछित पदार्थों को हाथ से चुनकर अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं। जैसे गेहूँ या चावल में मिले छोटे पत्थरों को हाथ से चुनकर अलग करना।
प्रश्न 4. हस्त चयन विधि कब उपयोगी होती है?
उत्तर:
जब मिश्रण में अलग किए जाने वाले पदार्थ आसानी से दिखाई देते हों और उन्हें हाथ से चुनना संभव हो, तब हस्त चयन उपयोगी होता है।
प्रश्न 5. थ्रेशिंग क्या है?
उत्तर:
फसल के पौलों या डंठलों से अनाज के दानों को अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं। परंपरागत रूप से इसके लिए पौलों को पीटा जाता है। आजकल थ्रेशर मशीन का भी उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 6. ओसाई क्या है?
उत्तर:
हवा की सहायता से अनाज के दानों से हल्की भूसी को अलग करने की विधि को ओसाई कहते हैं। इसमें भारी अनाज नीचे गिरता है और हल्की भूसी हवा के साथ दूर चली जाती है।
प्रश्न 7. ओसाई में हवा की क्या भूमिका है?
उत्तर:
हवा हल्की भूसी को अपने साथ उड़ा ले जाती है, जबकि भारी अनाज नीचे गिर जाता है। इस प्रकार हवा के कारण दोनों पदार्थ अलग हो जाते हैं।
प्रश्न 8. थ्रेशिंग और ओसाई में क्या अंतर है?
उत्तर:
थ्रेशिंग में पौधों के डंठलों से अनाज के दाने अलग किए जाते हैं, जबकि ओसाई में अनाज के दानों से हल्की भूसी को हवा की सहायता से अलग किया जाता है।
प्रश्न 9. सूप का उपयोग किस पृथक्करण विधि में किया जाता है?
उत्तर:
सूप का उपयोग ओसाई की विधि में किया जाता है। इससे हवा की सहायता से हल्की भूसी को भारी अनाज से अलग किया जाता है।
प्रश्न 10. छानना किसे कहते हैं?
उत्तर:
चालनी या छलनी की सहायता से अलग-अलग आकार के ठोस कणों को अलग करने की विधि को छानना कहते हैं। इसमें छोटे कण छलनी के छिद्रों से निकल जाते हैं और बड़े कण ऊपर रह जाते हैं।
प्रश्न 11. आटे को छानने पर क्या होता है?
उत्तर:
आटे के महीन कण छलनी के छिद्रों से नीचे निकल जाते हैं, जबकि चोकर तथा बड़े कण छलनी में रुक जाते हैं।
प्रश्न 12. वाष्पीकरण क्या है?
उत्तर:
किसी विलयन में उपस्थित द्रव को वाष्प में बदलकर अलग करने की प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। उदाहरण के लिए, नमक के घोल का पानी वाष्पित होने पर नमक पीछे रह जाता है।
प्रश्न 13. समुद्री जल से नमक कैसे प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
समुद्री जल को उथले गड्ढों में रखकर सूर्य की गर्मी और हवा के प्रभाव में पानी को वाष्पित होने दिया जाता है। पानी के वाष्पित होने के बाद ठोस नमक पीछे रह जाता है।
प्रश्न 14. अवसादन क्या है?
उत्तर:
किसी द्रव में उपस्थित भारी, अघुलनशील ठोस कणों का कुछ समय तक स्थिर रखने पर पात्र के तल में बैठ जाना अवसादन कहलाता है।
प्रश्न 15. निस्तारण क्या है?
उत्तर:
अवसादन के बाद ऊपर के साफ द्रव को बिना नीचे बैठे ठोस कणों को हिलाए सावधानीपूर्वक दूसरे पात्र में उड़ेलकर अलग करने की प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं।
प्रश्न 16. निस्यंदन क्या है?
उत्तर:
किसी द्रव में उपस्थित अघुलनशील ठोस कणों को फिल्टर या छिद्रयुक्त पदार्थ की सहायता से अलग करने की विधि को निस्यंदन कहते हैं।
प्रश्न 17. निस्यंदन में फिल्टर पेपर का क्या काम है?
उत्तर:
फिल्टर पेपर के बहुत छोटे छिद्रों से द्रव निकल जाता है, जबकि मिट्टी जैसे ठोस कण फिल्टर पेपर पर रुक जाते हैं। इस प्रकार ठोस और द्रव अलग हो जाते हैं।
प्रश्न 18. निस्यंदन के लिए किन पदार्थों का उपयोग फिल्टर के रूप में किया जा सकता है?
उत्तर:
अध्याय में कपड़े, फिल्टर पेपर, रूई, चारकोल और रेत जैसे पदार्थों का फिल्टर के रूप में उपयोग बताया गया है।
प्रश्न 19. अवसादन और निस्तारण में क्या संबंध है?
उत्तर:
पहले भारी अघुलनशील कण द्रव में नीचे बैठते हैं, इसे अवसादन कहते हैं। इसके बाद ऊपर के द्रव को सावधानी से अलग किया जाता है, इसे निस्तारण कहते हैं। इसलिए दोनों विधियाँ अक्सर क्रम से प्रयोग की जाती हैं।
प्रश्न 20. तेल और पानी को किस विधि से अलग किया जा सकता है?
उत्तर:
तेल और पानी को निस्तारण द्वारा अलग किया जा सकता है। दोनों आपस में नहीं मिलते और स्थिर रखने पर अलग-अलग परतें बना लेते हैं।
प्रश्न 21. मथना क्या है?
उत्तर:
दही को मथकर उसमें से मक्खन अलग करने की विधि को मथना कहते हैं। मथने पर मक्खन ऊपर तैरने लगता है और छाछ नीचे रह जाती है।
प्रश्न 22. मक्खन और छाछ को दही से कैसे अलग किया जाता है?
उत्तर:
दही को मथने पर उसमें से मक्खन अलग होकर ऊपर तैरता है। छाछ नीचे रह जाती है। इस प्रकार मथने की प्रक्रिया से मक्खन और छाछ अलग किए जाते हैं।
प्रश्न 23. चुंबकीय पृथक्करण क्या है?
उत्तर:
चुंबक की सहायता से चुंबकीय पदार्थों को गैर-चुंबकीय पदार्थों से अलग करने की विधि को चुंबकीय पृथक्करण कहते हैं।
प्रश्न 24. लोहे के चूरे और लकड़ी के बुरादे को कैसे अलग करेंगे?
उत्तर:
इस मिश्रण के पास चुंबक ले जाने पर लोहे का चूरा चुंबक की ओर आकर्षित हो जाएगा, जबकि लकड़ी का बुरादा आकर्षित नहीं होगा। इस प्रकार दोनों को चुंबकीय पृथक्करण से अलग किया जा सकता है।
प्रश्न 25. लोहे को चुंबकीय पदार्थ क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
लोहे पर चुंबक का आकर्षण बल लगता है। इसलिए लोहा चुंबकीय पदार्थ कहलाता है।
प्रश्न 26. पृथक्करण की विधि का चुनाव किन गुणों के आधार पर किया जाता है?
उत्तर:
पृथक्करण की विधि मिश्रण में उपस्थित पदार्थों के गुणों के आधार पर चुनी जाती है। इनमें कणों का आकार, भार, घुलनशीलता और चुंबकीय गुण महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 27. क्या एक मिश्रण को अलग करने के लिए एक से अधिक विधियों का उपयोग किया जा सकता है?
उत्तर:
हाँ। यदि मिश्रण में दो से अधिक पदार्थ हों और उनके गुण अलग-अलग हों, तो सभी अवयवों को अलग करने के लिए एक से अधिक पृथक्करण विधियों का क्रम से उपयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 28. पानी को साफ करने में निस्यंदन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
निस्यंदन द्वारा पानी में मौजूद कुछ अघुलनशील ठोस कणों को फिल्टर माध्यम पर रोककर पानी से अलग किया जा सकता है। इससे पानी अधिक साफ दिखाई दे सकता है।
प्रश्न 29. मछली पकड़ने के जाल को निस्यंदन से कैसे जोड़ा जा सकता है?
उत्तर:
मछली पकड़ने के जाल के छिद्रों से पानी निकल जाता है, जबकि मछलियाँ जाल में रुक जाती हैं। इसी प्रकार निस्यंदन में द्रव छोटे छिद्रों से निकलता है और कुछ ठोस कण रुक जाते हैं।
प्रश्न 30. पुनर्चक्रण में चुंबकीय पृथक्करण का क्या उपयोग है?
उत्तर:
पुनर्चक्रण के दौरान कचरे में मिले लोहे जैसे चुंबकीय पदार्थों को विद्युत चुंबकों की सहायता से अन्य कचरे से अलग किया जा सकता है। इससे लोहे को अलग करके आगे उपयोग में लाने में सहायता मिलती है।
अतिरिक्त दीर्घ प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. मिश्रण से पदार्थों को अलग करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
हमारे दैनिक जीवन में अनेक पदार्थ मिश्रण के रूप में पाए जाते हैं। कई बार मिश्रण में कोई अनावश्यक पदार्थ मिला होता है, जिसे हटाना आवश्यक होता है। जैसे चावल या दाल में छोटे पत्थर मिले हों तो उन्हें अलग करना पड़ता है। इसी प्रकार कई बार मिश्रण में उपस्थित दोनों या सभी पदार्थ उपयोगी होते हैं और उन्हें अलग-अलग प्राप्त करना होता है।
उदाहरण के लिए, दही से मक्खन प्राप्त करने के लिए मथने की प्रक्रिया की जाती है। समुद्री जल से नमक प्राप्त करने के लिए वाष्पीकरण का उपयोग किया जाता है। लोहे के चूरे और लकड़ी के बुरादे को चुंबक की सहायता से अलग किया जा सकता है। इसलिए मिश्रण के घटकों के गुणों के आधार पर उचित पृथक्करण विधि का चुनाव किया जाता है।
प्रश्न 2. हस्त चयन विधि को उदाहरण सहित समझाइए। इसकी उपयोगिता क्या है?
उत्तर:
मिश्रण में उपस्थित ठोस पदार्थों को हाथ से चुनकर अलग करने की विधि को हस्त चयन कहते हैं। इस विधि में पदार्थों के आकार, रंग या आकृति में अंतर का लाभ उठाया जाता है।
उदाहरण के लिए, चावल या दाल में मिले छोटे पत्थरों को हाथ से चुनकर अलग किया जा सकता है। इसी प्रकार पकवान में दिखाई देने वाली किसी अलग वस्तु को भी हाथ से निकाला जा सकता है।
यह विधि तब अधिक उपयोगी होती है जब अलग किए जाने वाले पदार्थों की संख्या कम हो और वे आसानी से दिखाई देकर हाथ से चुने जा सकें।
प्रश्न 3. थ्रेशिंग और ओसाई की विधियों को समझाइए तथा दोनों में अंतर लिखिए।
उत्तर:
थ्रेशिंग: फसल काटने के बाद उसके पौलों या डंठलों से अनाज के दानों को अलग करने की प्रक्रिया को थ्रेशिंग कहते हैं। परंपरागत रूप से पौलों को पीटकर दाने अलग किए जाते हैं।
ओसाई: अनाज के दानों से हल्की भूसी को हवा की सहायता से अलग करने की प्रक्रिया को ओसाई कहते हैं। इसमें भारी दाने नीचे गिरते हैं और हल्की भूसी हवा के साथ दूर चली जाती है।
अंतर:
- थ्रेशिंग में दानों को डंठलों से अलग किया जाता है।
- ओसाई में दानों को हल्की भूसी से अलग किया जाता है।
- थ्रेशिंग में पौलों को पीटना प्रमुख प्रक्रिया है, जबकि ओसाई में हवा का उपयोग होता है।
प्रश्न 4. छानने की विधि को उदाहरण सहित समझाइए। इसमें छिद्रों के आकार का क्या महत्व है?
उत्तर:
अलग-अलग आकार के ठोस कणों को छलनी या छन्नी की सहायता से अलग करने की विधि को छानना कहते हैं। इसमें छोटे कण छलनी के छिद्रों से निकल जाते हैं, जबकि बड़े कण छलनी में रुक जाते हैं।
उदाहरण के लिए, गेहूँ के आटे से चोकर और बड़े कणों को अलग करने के लिए आटा छाना जाता है। निर्माण कार्य में भी रेत से बड़े पत्थरों को अलग करने के लिए छलनी का उपयोग किया जा सकता है।
छानने में छिद्रों का आकार बहुत महत्वपूर्ण है। छिद्र इतने उपयुक्त होने चाहिए कि छोटे कण उनसे निकल सकें और बड़े कण रुक जाएँ।
प्रश्न 5. वाष्पीकरण द्वारा नमक को नमक के घोल से कैसे अलग किया जाता है?
उत्तर:
नमक के घोल में नमक पानी में घुला हुआ होता है। इस घोल को गर्म करने या सूर्य की गर्मी में रखने पर पानी धीरे-धीरे वाष्प में बदलकर उड़ जाता है। नमक वाष्प के साथ नहीं जाता, इसलिए वह पात्र में पीछे रह जाता है।
समुद्री जल से नमक प्राप्त करने में भी इसी सिद्धांत का उपयोग किया जाता है। समुद्री जल को उथले गड्ढों में रखा जाता है, जहाँ सूर्य की गर्मी और हवा के कारण पानी वाष्पित होता रहता है। अंत में ठोस नमक पीछे रह जाता है।
प्रश्न 6. अवसादन और निस्तारण की प्रक्रियाओं को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
जब किसी द्रव में उपस्थित भारी और अघुलनशील ठोस कणों को कुछ समय तक बिना हिलाए रखा जाता है, तो वे पात्र के तल में बैठ जाते हैं। इस प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं।
अवसादन के बाद ऊपर के अपेक्षाकृत साफ द्रव को सावधानीपूर्वक दूसरे पात्र में उड़ेलकर अलग किया जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तारण कहते हैं।
उदाहरण के लिए, मिट्टी मिले पानी को कुछ समय के लिए स्थिर रखने पर मिट्टी नीचे बैठ जाती है। इसके बाद ऊपर के पानी को सावधानी से दूसरे पात्र में डाला जा सकता है। इस प्रकार अवसादन और निस्तारण का उपयोग साथ-साथ किया जा सकता है।
प्रश्न 7. निस्यंदन की विधि क्या है? फिल्टर पेपर इसका कार्य कैसे करता है?
उत्तर:
किसी द्रव में उपस्थित अघुलनशील ठोस कणों को छिद्रयुक्त माध्यम की सहायता से अलग करने की विधि को निस्यंदन कहते हैं।
इस प्रक्रिया में फिल्टर पेपर को मोड़कर शंकु के आकार में बनाकर कीप में लगाया जाता है। जब मिट्टी मिले पानी को फिल्टर पेपर से गुजारा जाता है, तो पानी फिल्टर पेपर के बहुत छोटे छिद्रों से होकर नीचे चला जाता है, जबकि मिट्टी जैसे ठोस कण फिल्टर पेपर पर रुक जाते हैं।
फिल्टर पेपर में बहुत महीन छिद्र होते हैं। इसलिए यह पानी से बहुत छोटे अघुलनशील कणों को अलग करने में सहायता करता है।
प्रश्न 8. मथने की प्रक्रिया द्वारा दही से मक्खन कैसे प्राप्त किया जाता है?
उत्तर:
दही को एक पात्र में लेकर मथनी की सहायता से अच्छी तरह मथा जाता है। मथने के दौरान दही के घटक अलग होने लगते हैं। मक्खन दही से अलग होकर ऊपर की ओर तैरने लगता है, जबकि छाछ नीचे रह जाती है।
इसके बाद ऊपर तैर रहे मक्खन को अलग से निकाल लिया जाता है। इस प्रकार मथना दही से मक्खन प्राप्त करने की एक पृथक्करण विधि है। यह प्रक्रिया हमारे दैनिक जीवन में लंबे समय से उपयोग की जाती रही है।
प्रश्न 9. चुंबकीय पृथक्करण क्या है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
चुंबक की सहायता से चुंबकीय पदार्थ को गैर-चुंबकीय पदार्थ से अलग करने की विधि को चुंबकीय पृथक्करण कहते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि लकड़ी के बुरादे में लोहे के कील या लोहे का चूरा मिला हो, तो मिश्रण के पास चुंबक ले जाने पर लोहे के पदार्थ चुंबक की ओर आकर्षित हो जाते हैं। लकड़ी का बुरादा चुंबक से आकर्षित नहीं होता। इस प्रकार लोहे को बुरादे से अलग किया जा सकता है।
इस विधि का उपयोग कचरे के पुनर्चक्रण में भी किया जा सकता है, जहाँ लोहे के कबाड़ को अन्य कचरे से अलग किया जाता है।
प्रश्न 10. तेल और पानी को अलग करने की विधि समझाइए।
उत्तर:
तेल और पानी आपस में घुलते नहीं हैं। दोनों को कुछ समय तक स्थिर रखने पर वे अलग-अलग परतों में दिखाई देते हैं। तेल और पानी जैसे मिश्रण को निस्तारण की सहायता से अलग किया जा सकता है।
पात्र को सावधानी से झुकाकर एक परत के द्रव को दूसरे से अलग किया जाता है। इस प्रकार दोनों पदार्थों की अलग-अलग परतों का लाभ उठाकर उन्हें अलग किया जा सकता है।
प्रश्न 11. यदि किसी मिश्रण में आलू, नमक और लकड़ी का बुरादा हो, तो आप तीनों को अलग-अलग कैसे करेंगे?
उत्तर:
इस मिश्रण को अलग करने के लिए एक से अधिक पृथक्करण विधियों का प्रयोग करना होगा।
पहला चरण: आलू को हाथ से चुनकर अलग करेंगे। यह हस्त चयन है।
दूसरा चरण: बचे हुए नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण में पानी डालेंगे। नमक पानी में घुल जाएगा, जबकि लकड़ी का बुरादा पानी में नहीं घुलेगा।
तीसरा चरण: मिश्रण को छानेंगे। लकड़ी का बुरादा फिल्टर पर रुक जाएगा और नमक का घोल नीचे एकत्र होगा। यह निस्यंदन है।
चौथा चरण: नमक के घोल से पानी को वाष्पित कर देंगे। पानी उड़ जाएगा और नमक पीछे रह जाएगा। यह वाष्पीकरण है।
इस प्रकार हस्त चयन, निस्यंदन और वाष्पीकरण के क्रमिक उपयोग से तीनों पदार्थ अलग किए जा सकते हैं।
प्रश्न 12. किसी मिश्रण को अलग करने की विधि चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
पृथक्करण की विधि चुनते समय मिश्रण में उपस्थित पदार्थों के भौतिक गुणों को ध्यान में रखना चाहिए। जैसे—
- पदार्थों के कणों के आकार में अंतर हो तो छानने की विधि अपनाई जा सकती है।
- पदार्थों के भार में अंतर हो और एक पदार्थ हल्का हो तो ओसाई उपयोगी हो सकती है।
- कोई पदार्थ चुंबकीय हो तो चुंबकीय पृथक्करण किया जा सकता है।
- कोई ठोस पदार्थ द्रव में अघुलनशील हो तो निस्यंदन किया जा सकता है।
- किसी ठोस पदार्थ का द्रव में घुला होना और द्रव का वाष्पित होना संभव हो तो वाष्पीकरण किया जा सकता है।
- भारी अघुलनशील कणों के नीचे बैठने पर अवसादन और उसके बाद निस्तारण किया जा सकता है।
इसलिए पृथक्करण की विधि मिश्रण के घटकों के गुणों के अनुसार चुनी जाती है।
प्रश्न 13. यदि किसी मिश्रण में लोहे की कीलें, रेत, काली मिर्च, पत्थर, नमक और पानी हों, तो उन्हें अलग करने की उचित प्रक्रिया बताइए।
उत्तर:
इस मिश्रण में कई अलग-अलग पदार्थ हैं, इसलिए एक से अधिक विधियों का क्रम से उपयोग करना होगा।
- सबसे पहले चुंबक की सहायता से लोहे की कीलों को अलग करेंगे।
- इसके बाद मिश्रण में मौजूद बड़े पत्थरों और काली मिर्च को हस्त चयन द्वारा अलग किया जा सकता है।
- अब बचे हुए रेत, नमक और पानी के मिश्रण में नमक पानी में घुला हुआ होगा, जबकि रेत अघुलनशील होगी।
- निस्यंदन द्वारा रेत को नमक के घोल से अलग करेंगे।
- अंत में नमक के घोल को वाष्पीकरण द्वारा अलग करेंगे। पानी वाष्पित हो जाएगा और नमक पीछे रह जाएगा।
इस उदाहरण से स्पष्ट होता है कि एक से अधिक पदार्थों वाले मिश्रण को अलग करने के लिए विभिन्न विधियों को उचित क्रम में प्रयोग करना पड़ सकता है।
प्रश्न 14. पृथक्करण की विभिन्न विधियों का दैनिक जीवन में क्या महत्व है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
पृथक्करण की विधियाँ हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं। हम भोजन तैयार करने, अनाज साफ करने, पानी साफ करने और उपयोगी पदार्थ प्राप्त करने के लिए इनका प्रयोग करते हैं।
दाल और चावल से पत्थर हटाने में हस्त चयन, अनाज से भूसी अलग करने में ओसाई, आटा छानने में छानना, दही से मक्खन निकालने में मथना, नमक के घोल से नमक प्राप्त करने में वाष्पीकरण और गंदे पानी से अघुलनशील कण हटाने में निस्यंदन का उपयोग होता है।
इसी प्रकार लोहे के चूरे को लकड़ी के बुरादे से अलग करने में चुंबकीय पृथक्करण और कुछ ठोस पदार्थों को द्रव से अलग करने में अवसादन तथा निस्तारण उपयोगी हैं। इस प्रकार पृथक्करण की विधियाँ हमारे जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाती हैं।
प्रश्न 15. “एक से अधिक पृथक्करण विधियों का उपयोग किया जा सकता है।” इस कथन को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
हाँ, किसी जटिल मिश्रण में कई पदार्थ उपस्थित हों तो उन्हें अलग करने के लिए एक ही विधि पर्याप्त नहीं होती। ऐसी स्थिति में पदार्थों के अलग-अलग गुणों के आधार पर कई विधियों का क्रम से उपयोग किया जाता है।
उदाहरण के लिए, आलू, नमक और लकड़ी के बुरादे के मिश्रण को लें। सबसे पहले आलू को हस्त चयन द्वारा अलग किया जाएगा। फिर पानी डालने पर नमक घुल जाएगा, जबकि बुरादा नहीं घुलेगा। निस्यंदन द्वारा बुरादा अलग किया जाएगा। अंत में नमक के घोल का वाष्पीकरण करके नमक प्राप्त किया जाएगा।
इस प्रकार मिश्रण के प्रत्येक घटक के गुणों को देखकर उचित क्रम में अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया जा सकता है।
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