कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 8 – जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा | A Journey Through the Various States of Water

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कक्षा 6 विज्ञान अध्याय 8 – जल की विविध अवस्थाओं की यात्रा | A Journey Through the Various States of Water

जल हमारे दैनिक जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम जल को बर्फ, पानी और जलवाष्प के रूप में देखते हैं। बर्फ और जल अलग-अलग दिखाई देते हैं, लेकिन दोनों एक ही पदार्थ के अलग-अलग रूप हैं। इन्हें जल की अवस्थाएँ कहा जाता है। जल मुख्य रूप से तीन अवस्थाओं में पाया जाता है—ठोस, द्रव और गैसीय। ठोस अवस्था में जल को बर्फ, द्रव अवस्था में पानी और गैसीय अवस्था में जलवाष्प कहते हैं।

1. जल की ठोस, द्रव और गैसीय अवस्थाएँ

बर्फ जल की ठोस अवस्था है। बर्फ का अपना निश्चित आकार होता है। इसे किसी भी पात्र में रखने पर इसका आकार नहीं बदलता। यह बहती या फैलती नहीं है।

जल इसकी द्रव अवस्था है। जल का अपना निश्चित आकार नहीं होता। जिस पात्र में इसे रखा जाता है, यह उसी का आकार ग्रहण कर लेता है। जल एक स्थान से दूसरे स्थान तक बह सकता है और साफ सतह पर फैल भी सकता है। इसका आयतन सामान्यतः स्थिर रहता है।

जलवाष्प जल की गैसीय अवस्था है। गैस का कोई निश्चित आकार नहीं होता और वह उपलब्ध स्थान में फैल जाती है। जलवाष्प हमारे चारों ओर की वायु में उपस्थित रहती है, लेकिन सामान्य तापमान पर दिखाई नहीं देती।

2. वाष्पीकरण या वाष्पन

जब जल द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था अर्थात जलवाष्प में बदलता है, तो इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण या वाष्पन कहते हैं।

वाष्पीकरण केवल उबालने पर ही नहीं होता, बल्कि सामान्य कमरे के तापमान पर भी लगातार होता रहता है। गीले कपड़ों का सूखना, पोंछा लगे फर्श का सूखना और शरीर के पसीने का सूखना वाष्पीकरण के उदाहरण हैं। गर्म तवे पर पानी डालने पर वह तेजी से जलवाष्प में बदल जाता है।

वाष्पीकरण की गति कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। खुला क्षेत्रफल, तापमान, हवा की गति और वायु में उपस्थित नमी (आर्द्रता) इसके प्रमुख कारक हैं। अधिक क्षेत्रफल में फैला जल अधिक तेजी से वाष्पित होता है। इसी प्रकार धूप में जल छाया की अपेक्षा तेजी से वाष्पित होता है। तेज हवा भी वाष्पीकरण को तेज करती है। अधिक आर्द्रता वाले बरसात के दिनों में जल धीरे-धीरे वाष्पित होता है।

3. संघनन

जब वायु में उपस्थित जलवाष्प किसी ठंडी सतह के संपर्क में आती है, तो वह जल की छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है। जलवाष्प के द्रव अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।

ठंडे पानी और बर्फ से भरे गिलास की बाहरी सतह पर दिखाई देने वाली पानी की बूंदें इसी प्रक्रिया के कारण बनती हैं। ये बूंदें गिलास के अंदर के पानी के रिसने से नहीं बनतीं, बल्कि वायु में उपस्थित जलवाष्प ठंडी सतह के संपर्क में आकर संघनित होती है। पौधों पर सुबह दिखाई देने वाली ओस की बूंदें भी संघनन का उदाहरण हैं।

4. जल की अवस्थाओं में परिवर्तन

जल को गर्म या ठंडा करके उसकी अवस्था बदली जा सकती है। बर्फ को गर्म करने पर वह पिघलकर जल में बदल जाती है। ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को पिघलना कहते हैं।

जल को और अधिक गर्म करने पर वह जलवाष्प में बदल जाता है। दूसरी ओर, जल को ठंडा करने पर वह जमकर बर्फ में बदल जाता है। द्रव से ठोस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को हिमीकरण कहते हैं।

इसी प्रकार मोम भी गर्म करने पर पिघलता है और ठंडा करने पर फिर ठोस हो जाता है। नारियल का तेल भी ठंडे मौसम में ठोस अवस्था ग्रहण कर सकता है।

5. वाष्पीकरण से शीतलन प्रभाव

वाष्पीकरण के कारण शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है। जब कोई द्रव वाष्पित होता है, तो उसे ऊष्मा की आवश्यकता होती है। इसलिए आसपास की सतह या पदार्थ से ऊष्मा लेकर वाष्पीकरण होता है और ठंडक महसूस होती है।

मिट्टी के मटके में रखा पानी ठंडा रहता है क्योंकि कुछ पानी मिट्टी के छोटे-छोटे छिद्रों से बाहर आकर वाष्पित होता रहता है। इसी प्रकार पसीना वाष्पित होने पर शरीर को ठंडक मिलती है। पंखे की हवा पसीने के वाष्पीकरण को तेज करती है, इसलिए पंखे के नीचे हमें ठंडक महसूस होती है। गर्मियों में फर्श और छत पर पानी का छिड़काव करने से भी वाष्पीकरण द्वारा ठंडक मिलती है।

6. बादलों का निर्माण और वर्षा

पृथ्वी की सतह से जल वाष्पित होकर वायुमंडल में पहुँचता है। ऊँचाई पर जाने पर वायु ठंडी होती जाती है। एक निश्चित ऊँचाई पर जलवाष्प ठंडी होकर छोटी-छोटी जल-बूंदों में बदल जाती है। यह संघनन है।

ये छोटी जल-बूंदें सामान्यतः धूल के बहुत छोटे कणों के आसपास बनती हैं और वायु में तैरती रहती हैं। बहुत-सी छोटी बूंदें आपस में मिलकर बड़ी बूंदें बनाती हैं। जब बूंदें बहुत भारी हो जाती हैं, तो वे पृथ्वी की ओर गिरने लगती हैं। इन्हें वर्षा कहते हैं। विशेष परिस्थितियों में जल ओले या हिम के रूप में भी पृथ्वी पर गिर सकता है।

7. जल चक्र

पृथ्वी की सतह और वायुमंडल के बीच जल के लगातार चक्रण को जल चक्र कहते हैं। महासागरों, नदियों, झीलों और पृथ्वी की सतह से जल वाष्पित होकर वायु में जाता है। जलवाष्प ऊपर जाकर संघनित होती है और बादलों का निर्माण करती है। बादलों से वर्षा, हिम या ओले के रूप में जल फिर पृथ्वी पर लौटता है। यह जल नदियों आदि के माध्यम से बहकर अंततः महासागरों तक पहुँच सकता है और फिर से वाष्पित हो जाता है।

जल चक्र के कारण प्रकृति में जल का निरंतर चक्रण होता रहता है। पृथ्वी पर उपलब्ध जल का बहुत छोटा भाग ही मनुष्य, पौधों और जानवरों के सीधे उपयोग के योग्य है। इसलिए जल का समझदारी से उपयोग करना और उसे व्यर्थ होने से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

परीक्षा के लिए मुख्य बातें

  • जल की तीन अवस्थाएँ—ठोस, द्रव और गैसीय।
  • ठोस अवस्था—बर्फ।
  • द्रव अवस्था—जल।
  • गैसीय अवस्था—जलवाष्प।
  • द्रव से गैस—वाष्पीकरण/वाष्पन।
  • गैस से द्रव—संघनन।
  • ठोस से द्रव—पिघलना।
  • द्रव से ठोस—हिमीकरण।
  • वाष्पीकरण से शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।
  • पृथ्वी और वायुमंडल के बीच जल के चक्रण को जल चक्र कहते हैं।
  • वाष्पीकरण की गति पर तापमान, खुला क्षेत्रफल, हवा की गति और आर्द्रता का प्रभाव पड़ता है।

पुस्तक में दिए गए प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन संघनन का उत्तम वर्णन करता है?

(क) जल का वाष्प के रूप में परिवर्तन।
(ख) जल का द्रव से गैसीय अवस्था में परिवर्तन का प्रक्रम।
(ग) जल की छोटी बूंदों से बादलों का बनना।
(घ) जलवाष्प का उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तन।

उत्तर:
सही उत्तर है— (घ) जलवाष्प का उसकी द्रव अवस्था में परिवर्तन।

जब वायु में उपस्थित जलवाष्प ठंडी होकर जल की छोटी-छोटी बूंदों में बदलती है, तो इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।


प्रश्न 2. नीचे दी गई प्रक्रियाओं में से किस प्रक्रिया में वाष्पीकरण अति महत्वपूर्ण है?

(क) रंग भरना

(i) क्रेयॉन से
(ii) पानी के रंगों से
(iii) ऐक्रेलिक रंगों से
(iv) पेंसिल रंगों से

(ख) कागज पर लिखना

(i) पेंसिल से
(ii) स्याही वाले पेन से
(iii) बॉल पॉइंट पेन से

उत्तर:

(क) रंग भरने में वाष्पीकरण मुख्य रूप से पानी के रंगों और ऐक्रेलिक रंगों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इनमें उपस्थित द्रव का कुछ भाग वाष्पित हो जाता है।

(ख) कागज पर लिखने में वाष्पीकरण स्याही वाले पेन में महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्याही का द्रव भाग वाष्पित होकर लिखे हुए निशान को सूखने में सहायता करता है।


प्रश्न 3. आजकल हमें अनेक स्थानों पर हरे रंग की प्लास्टिक की घास दिखाई देती है। प्राकृतिक घास के आसपास का स्थान प्लास्टिक की घास के आसपास के स्थान की तुलना में अधिक ठंडा लगता है। ऐसा क्यों है?

उत्तर:
प्राकृतिक घास के आसपास की मिट्टी और घास में जल उपस्थित रहता है। यह जल धीरे-धीरे वाष्पित होता रहता है। वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए आसपास से ऊष्मा लेकर वाष्पीकरण होता है और वहाँ शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।

प्लास्टिक की घास में इस प्रकार जल का वाष्पीकरण नहीं होता। इसलिए प्राकृतिक घास वाला स्थान प्लास्टिक की घास वाले स्थान की तुलना में अधिक ठंडा महसूस हो सकता है।


प्रश्न 4. जल के अतिरिक्त अन्य द्रव पदार्थों के उदाहरण दीजिए जो वाष्पित होते हैं।

उत्तर:
जल के अतिरिक्त कई अन्य द्रव पदार्थ भी वाष्पित होते हैं। उदाहरण के लिए—

  1. सैनिटाइजर
  2. अल्कोहल
  3. इत्र

जब सैनिटाइजर को हाथों पर लगाया जाता है, तो वह कुछ समय बाद दिखाई देना बंद हो जाता है क्योंकि उसका द्रव भाग वाष्पित हो जाता है।


प्रश्न 5. पंखे हवा को इधर-उधर घुमाते हैं जिससे ठंडक महसूस होती है। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पंखों का उपयोग विचित्र लग सकता है क्योंकि पंखे की हवा वस्तुओं को ठंडा करती है, गरम नहीं। सामान्यतः जब जल वाष्पित होता है तो उसे ऊष्मा की आवश्यकता होती है, ठंडी वायु की नहीं। आपका इस विषय में क्या सोचना है?

उत्तर:
पंखे की हवा गीले कपड़ों के आसपास की नम हवा को हटाती रहती है। इससे कपड़ों में उपस्थित जल का वाष्पीकरण तेज हो जाता है। जल के वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है। वाष्पीकरण के दौरान आवश्यक ऊष्मा आसपास से ली जाती है।

इसी कारण पंखे के नीचे पसीना जल्दी वाष्पित होता है और हमें ठंडक महसूस होती है। इसी प्रकार पंखे की हवा गीले कपड़ों से जल के वाष्पीकरण को तेज करके उन्हें जल्दी सुखाने में सहायता करती है।


प्रश्न 6. प्रायः जब नालियों से कीचड़ निकाला जाता है तो नाली के समीप में उसका ढेर बनाकर तीन से चार दिनों के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके पश्चात इसे उद्यान या खेत में ले जाया जाता है जहाँ इसका उपयोग खाद के रूप में कर सकते हैं। यह विधि कीचड़ को दूसरे स्थान पर ले जाने की लागत कम करती है और इसके साथ ही काम करने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा बढ़ाती है। इस पर विचार करें और बताएँ कि ऐसा क्यों है?

उत्तर:
नाली से निकाले गए कीचड़ में काफी मात्रा में जल होता है। उसे कुछ दिनों तक खुले स्थान पर रखने से उसमें उपस्थित जल का वाष्पीकरण होता रहता है। इससे कीचड़ में जल की मात्रा कम हो जाती है और वह अधिक सूखा तथा हल्का हो जाता है।

जब कीचड़ हल्का और कम मात्रा में रह जाता है, तो उसे दूसरे स्थान पर ले जाने में कम लागत और कम मेहनत लगती है। सूखे कीचड़ को संभालना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। इस प्रकार वाष्पीकरण के कारण कीचड़ को सुखाने से परिवहन की लागत कम करने और काम करने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाने में सहायता मिलती है।


प्रश्न 7. एक दिन के लिए अपने घर की गतिविधियों का अवलोकन करें। उन गतिविधियों की पहचान करें जिनमें वाष्पीकरण सम्मिलित है? वाष्पीकरण के प्रक्रम को समझने से हमें अपनी दैनिक गतिविधियों में कैसे सहायता मिलती है?

उत्तर:
हमारे घर में अनेक दैनिक गतिविधियों में वाष्पीकरण होता है। उदाहरण—

  1. गीले कपड़ों का सूखना।
  2. पोंछा लगे फर्श का सूखना।
  3. नहाने के बाद शरीर का सूखना।
  4. पसीने का सूखना।
  5. हाथों पर सैनिटाइजर लगाने के बाद उसका सूखना।
  6. धूप में रखे पानी का धीरे-धीरे कम होना।

वाष्पीकरण को समझने से हमें यह पता चलता है कि गर्मी, हवा और अधिक खुला क्षेत्रफल वाष्पीकरण को तेज कर सकते हैं। इसलिए कपड़े जल्दी सुखाने के लिए उन्हें फैला सकते हैं और ऐसी जगह रख सकते हैं जहाँ हवा और धूप हो।


प्रश्न 8. प्रकृति में जल ठोस अवस्था में किस प्रकार विद्यमान है?

उत्तर:
प्रकृति में जल ठोस अवस्था में मुख्य रूप से बर्फ और हिम के रूप में पाया जाता है। पर्वतों पर बर्फ तथा हिम के रूप में बहुत-सा जल जमा रहता है। अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में भी जल ठोस अवस्था में पाया जाता है।

जब तापमान बढ़ता है, तो बर्फ और हिम पिघलकर द्रव जल में बदल सकते हैं।


प्रश्न 9. “जल हमारे अधिकार से पहले हमारी जिम्मेदारी है” इस कथन पर विचार करें। अपने विचार साझा करें।

उत्तर:
जल जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक प्राकृतिक संसाधन है। मनुष्य, पशु-पक्षी और पौधे सभी जल पर निर्भर हैं। पृथ्वी पर बहुत अधिक मात्रा में जल उपलब्ध है, लेकिन उसका केवल एक छोटा भाग ही मनुष्यों, पौधों और जानवरों के सीधे उपयोग के योग्य है। अधिकांश जल महासागरों में है, जिसका सीधे उपयोग नहीं किया जा सकता।

इसलिए जल को केवल अपना अधिकार समझकर उसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। हमें जल का बुद्धिमानी से उपयोग करना, उसे व्यर्थ बहने से रोकना और जलाशयों को प्रदूषण से मुक्त रखना चाहिए। जल की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।


प्रश्न 10. धूप में खड़े दुपहिया या वाहन की सीट गरम हो जाती है। आप उसे ठंडा कैसे करेंगे?

उत्तर:
धूप में गरम हुई वाहन की सीट को ठंडा करने के लिए उस पर थोड़ा पानी छिड़का जा सकता है। पानी वाष्पित होते समय ऊष्मा ग्रहण करता है। इससे सीट से ऊष्मा कम होती है और सीट ठंडी होने लगती है।

इसके अतिरिक्त वाहन को छाया में खड़ा करना और सीट को कुछ समय के लिए हवा लगने देना भी उपयोगी है। हवा वाष्पीकरण को तेज कर सकती है, जिससे शीतलन प्रभाव अधिक होता है।

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य बातें

  • वाष्पीकरण: जल का द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में बदलना।
  • संघनन: जलवाष्प का द्रव अवस्था में बदलना।
  • वाष्पीकरण से शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।
  • अधिक खुला क्षेत्रफल → तेज वाष्पीकरण।
  • तेज हवा → तेज वाष्पीकरण।
  • अधिक आर्द्रता → धीमा वाष्पीकरण।
  • धूप/अधिक ताप → तेज वाष्पीकरण।
  • बादलों के निर्माण में संघनन महत्वपूर्ण है।
  • पृथ्वी और वायुमंडल के बीच जल के चक्रण को जल चक्र कहते हैं।
  • जल का संरक्षण करना और उसे प्रदूषण से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

अतिरिक्त दीर्घ प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. जल की तीन अवस्थाओं का वर्णन उदाहरण सहित कीजिए।

उत्तर:
जल हमारे चारों ओर तीन अवस्थाओं में पाया जाता है—

  1. ठोस अवस्था: इस अवस्था में जल बर्फ या हिम के रूप में पाया जाता है। इसका अपना निश्चित आकार होता है।
  2. द्रव अवस्था: सामान्य परिस्थितियों में जल द्रव अवस्था में होता है। इसे हम पीने, खाना बनाने और अन्य कार्यों में उपयोग करते हैं।
  3. गैसीय अवस्था: जल गर्म होने पर जलवाष्प में बदल जाता है। जलवाष्प गैसीय अवस्था में जल का रूप है।

जल को गर्म करने या ठंडा करने पर उसकी अवस्था बदल सकती है। इस प्रकार जल एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तित होता रहता है।


प्रश्न 2. वाष्पीकरण क्या है? इसके प्रमुख कारकों को समझाइए।

उत्तर:
जब कोई द्रव अपनी सतह से गैसीय अवस्था में बदलता है, तो इस प्रक्रिया को वाष्पीकरण कहते हैं। जल के वाष्पीकरण से जलवाष्प बनती है।

वाष्पीकरण की गति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं—

  1. खुला क्षेत्रफल: द्रव का खुला क्षेत्रफल अधिक होने पर वाष्पीकरण तेज होता है।
  2. तापमान: तापमान बढ़ने पर वाष्पीकरण तेज होता है।
  3. हवा की गति: हवा तेज होने पर वाष्पीकरण की गति बढ़ती है।
  4. आर्द्रता: हवा में नमी अधिक होने पर वाष्पीकरण धीमा होता है।

इसी कारण कपड़े फैलाकर, धूप और हवा वाली जगह पर रखने से वे जल्दी सूखते हैं।


प्रश्न 3. वाष्पीकरण के कारण शीतलन प्रभाव कैसे उत्पन्न होता है?

उत्तर:
वाष्पीकरण की प्रक्रिया में द्रव को गैस में बदलने के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह ऊष्मा आसपास के वातावरण या वस्तु से ली जाती है। इसके कारण वस्तु या आसपास का तापमान कम हो जाता है और ठंडक महसूस होती है।

इसके उदाहरण हैं—

  • पसीना वाष्पित होने पर शरीर को ठंडक मिलती है।
  • गीले कपड़े शरीर को ठंडा महसूस करा सकते हैं।
  • गर्मियों में फर्श या छत पर पानी छिड़कने से ठंडक मिलती है।
  • मिट्टी के घड़े का पानी ठंडा रहता है क्योंकि घड़े की दीवार से रिसने वाला पानी वाष्पित होता रहता है।

इस प्रकार वाष्पीकरण से शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।


प्रश्न 4. मिट्टी के घड़े का पानी गर्मियों में ठंडा क्यों रहता है?

उत्तर:
मिट्टी के घड़े में बहुत छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। घड़े के अंदर का कुछ पानी इन छिद्रों से बाहर की सतह तक पहुँचता है। बाहर की सतह पर पहुँचा हुआ पानी वाष्पित होता रहता है।

वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह ऊष्मा घड़े और उसके आसपास से ली जाती है। इसलिए घड़े में रखा पानी ठंडा हो जाता है।

इस प्रकार मिट्टी के घड़े में पानी के ठंडा होने का मुख्य कारण वाष्पीकरण और उससे उत्पन्न शीतलन प्रभाव है।


प्रश्न 5. संघनन क्या है? दैनिक जीवन में संघनन के उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
जब जलवाष्प ठंडी होकर द्रव जल में बदलती है, तो इस प्रक्रिया को संघनन कहते हैं।

दैनिक जीवन में इसके उदाहरण हैं—

  1. ठंडे गिलास की बाहरी सतह पर जल की बूंदें दिखाई देना।
  2. जलवाष्प के ठंडा होने पर छोटी-छोटी जल की बूंदों का बनना।
  3. वायुमंडल में जलवाष्प के ठंडा होकर जल की छोटी बूंदों में बदलने से बादलों का बनना।

संघनन वाष्पीकरण की विपरीत प्रक्रिया है। वाष्पीकरण में द्रव गैस में बदलता है, जबकि संघनन में गैस द्रव में बदलती है।


प्रश्न 6. जल की अवस्था में परिवर्तन कैसे होता है? समझाइए।

उत्तर:
जल को गर्म करने या ठंडा करने पर उसकी अवस्था बदल सकती है।

  • ठोस से द्रव: बर्फ को गर्म करने पर वह पिघलकर जल में बदल जाती है। इसे पिघलना कहते हैं।
  • द्रव से गैस: जल को गर्म करने पर वह जलवाष्प में बदल जाता है। इसे वाष्पीकरण कहते हैं।
  • गैस से द्रव: जलवाष्प के ठंडा होने पर वह जल की बूंदों में बदल जाती है। इसे संघनन कहते हैं।
  • द्रव से ठोस: जल को पर्याप्त ठंडा करने पर वह बर्फ में बदल जाता है। इसे जमना कहते हैं।

इस प्रकार तापमान में परिवर्तन के कारण जल अपनी अवस्थाएँ बदलता रहता है।


प्रश्न 7. बादलों का निर्माण किस प्रकार होता है?

उत्तर:
सूर्य की ऊष्मा के कारण पृथ्वी की सतह, नदियों, तालाबों और महासागरों का जल वाष्पित होकर जलवाष्प में बदलता है। जलवाष्प युक्त वायु ऊपर उठती है।

ऊँचाई पर पहुँचने पर वायु ठंडी होती है। ठंडी होने पर जलवाष्प संघनित होकर बहुत छोटी-छोटी जल की बूंदों में बदल जाती है। ये बूंदें प्रायः वायु में उपस्थित धूल के छोटे कणों के आसपास जमा हो सकती हैं।

बहुत-सी छोटी जल बूंदें एकत्र होकर बादल बनाती हैं। जब बूंदें आपस में मिलकर बड़ी और भारी हो जाती हैं, तो वे वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं। विशेष परिस्थितियों में ओले या बर्फ भी गिर सकती है।


प्रश्न 8. जल चक्र क्या है? इसे क्रम से समझाइए।

उत्तर:
प्रकृति में जल का लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान और एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाना जल चक्र कहलाता है।

जल चक्र के मुख्य चरण हैं—

  1. सूर्य की ऊष्मा से महासागरों, नदियों, तालाबों और पृथ्वी की सतह का जल वाष्पित होता है।
  2. जलवाष्प ऊपर उठती है।
  3. ऊपर जाकर वायु ठंडी होने पर जलवाष्प का संघनन होता है।
  4. इससे बादल बनते हैं।
  5. जल की बूंदें बड़ी और भारी होने पर वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं।
  6. वर्षा का जल नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों में पहुँचता है तथा कुछ जल भूमि के अंदर भी चला जाता है।
  7. यह जल फिर वाष्पित होकर जल चक्र को जारी रखता है।

इस प्रकार प्रकृति में जल का निरंतर चक्र चलता रहता है।


प्रश्न 9. पंखे के नीचे पसीना जल्दी सूखने और ठंडक महसूस होने का कारण समझाइए।

उत्तर:
पसीने में जल उपस्थित होता है। जब पंखा चलता है तो हवा शरीर के आसपास लगातार घूमती रहती है। इससे शरीर के पास की नम हवा हटती रहती है और पसीने के जल का वाष्पीकरण तेज हो जाता है।

वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह ऊष्मा शरीर से ली जाती है। इसलिए शरीर की सतह का ताप कम होता है और हमें ठंडक महसूस होती है।

इस प्रकार पंखा स्वयं शरीर को सीधे ठंडा करने के बजाय वाष्पीकरण को तेज करके ठंडक का अनुभव कराने में सहायता करता है।


प्रश्न 10. बरसात या अधिक आर्द्रता वाले दिनों में कपड़े देर से क्यों सूखते हैं?

उत्तर:
कपड़ों के सूखने की प्रक्रिया में जल का वाष्पीकरण होता है। लेकिन बरसात के दिनों में हवा में पहले से ही जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है। अर्थात हवा में आर्द्रता अधिक होती है।

ऐसी स्थिति में कपड़ों से जल का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है। इसलिए कपड़ों में मौजूद जल धीरे-धीरे वाष्पित होता है और कपड़े देर से सूखते हैं।

इसके विपरीत, शुष्क वातावरण में वाष्पीकरण अधिक तेजी से हो सकता है और कपड़े जल्दी सूखते हैं।


प्रश्न 11. प्राकृतिक घास के आसपास प्लास्टिक की घास की तुलना में अधिक ठंडक क्यों महसूस हो सकती है?

उत्तर:
प्राकृतिक घास के आसपास मिट्टी और घास में जल मौजूद रहता है। यह जल धीरे-धीरे वाष्पित होता रहता है। वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए आसपास से ऊष्मा लेने के कारण शीतलन प्रभाव उत्पन्न होता है।

प्लास्टिक की घास में इस प्रकार जल का वाष्पीकरण नहीं होता। इसलिए प्राकृतिक घास वाला स्थान प्लास्टिक की घास वाले स्थान की तुलना में अधिक ठंडा महसूस हो सकता है।

इससे हमें पता चलता है कि वाष्पीकरण हमारे आसपास के वातावरण को ठंडा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


प्रश्न 12. जल संरक्षण क्यों आवश्यक है? समझाइए।

उत्तर:
जल सभी जीवों के जीवन के लिए आवश्यक है। मनुष्य, पशु-पक्षी और पौधे सभी जल पर निर्भर हैं। पृथ्वी पर जल की मात्रा बहुत अधिक है, लेकिन उसका अधिकांश भाग महासागरों में है और सीधे उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है।

इसलिए हमें उपलब्ध उपयोगी जल का सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए। इसके लिए—

  1. जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए।
  2. जल स्रोतों को प्रदूषित नहीं करना चाहिए।
  3. आवश्यकता के अनुसार ही जल का उपयोग करना चाहिए।
  4. वर्षा के जल को बचाने और उपयोग करने के उपाय करने चाहिए।
  5. दूसरों को भी जल बचाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

इसलिए जल केवल हमारा अधिकार नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी भी है।


प्रश्न 13. वाष्पीकरण की गति बढ़ाने के लिए किन परिस्थितियों को अनुकूल माना जाता है?

उत्तर:
वाष्पीकरण की गति बढ़ाने के लिए निम्न परिस्थितियाँ अनुकूल होती हैं—

  1. तापमान अधिक होना: गर्मी बढ़ने पर वाष्पीकरण तेज होता है।
  2. खुला क्षेत्रफल अधिक होना: द्रव का अधिक भाग हवा के संपर्क में होने पर वाष्पीकरण तेज होता है।
  3. हवा की गति अधिक होना: तेज हवा द्रव के पास की जलवाष्प को हटाती रहती है, जिससे वाष्पीकरण बढ़ता है।
  4. आर्द्रता कम होना: शुष्क हवा में वाष्पीकरण अपेक्षाकृत तेज होता है।

इसीलिए कपड़ों को फैलाकर धूप और हवा में रखने से वे जल्दी सूखते हैं।


प्रश्न 14. वाष्पीकरण और संघनन में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

वाष्पीकरणसंघनन
द्रव से गैस में परिवर्तन होता है।गैस से द्रव में परिवर्तन होता है।
जल से जलवाष्प बनती है।जलवाष्प से जल की बूंदें बनती हैं।
इसमें ऊष्मा की आवश्यकता होती है।ठंडा होने पर यह प्रक्रिया होती है।
कपड़ों का सूखना इसका उदाहरण है।बादलों का बनना इसका उदाहरण है।
पसीने के सूखने में भी वाष्पीकरण होता है।ठंडी सतह पर जल की बूंदें बनना संघनन का उदाहरण है।

इस प्रकार दोनों प्रक्रियाएँ जल की अवस्था में परिवर्तन से संबंधित हैं, लेकिन एक-दूसरे के विपरीत हैं।


प्रश्न 15. मिट्टी के घड़े और “पॉट-इन-पॉट” शीतलक में ठंडक उत्पन्न होने का वैज्ञानिक कारण समझाइए।

उत्तर:
मिट्टी के घड़े में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। घड़े का कुछ जल इन छिद्रों से बाहर आकर सतह पर पहुँचता है और वहाँ वाष्पित होता है। वाष्पीकरण के लिए ऊष्मा की आवश्यकता होती है, इसलिए घड़े और उसके अंदर के पानी से ऊष्मा ली जाती है। इससे पानी ठंडा होता है।

पॉट-इन-पॉट शीतलक में दो मिट्टी के बर्तनों के बीच रेत रखी जाती है। रेत को गीला किया जाता है और ऊपर से गीला कपड़ा रखा जाता है। पानी के वाष्पीकरण के कारण अंदर रखे बर्तन और उसमें रखी वस्तुएँ ठंडी होती हैं।

इस प्रकार दोनों विधियों में वाष्पीकरण के कारण होने वाला शीतलन प्रभाव मुख्य भूमिका निभाता है।


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