भारत में बड़ी आतंकी साजिश का भंडाफोड़: NIA ने 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी नागरिक को किया गिरफ्तार | Major Terror Plot Foiled in India: NIA Arrests 6 Ukrainian and 1 American National
NIA राष्ट्रीय जांच एजेंसी
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने हाल ही में देश विरोधी साजिशों में शामिल होने के आरोप में सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल है। इस समूह पर विशेष रूप से यूएपीए (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया है, क्योंकि ये बिना अनुमति के उत्तर-पूर्व के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश कर म्यांमार के विद्रोही समूहों को हथियारों और ड्रोन की ट्रेनिंग दे रहे थे। गिरफ्तार किया गया अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वेंडाइक पहले भी लीबिया और सीरिया जैसे देशों में सत्ता परिवर्तन की गतिविधियों में शामिल रहा है, जिससे उसके सीआईए (CIA) से जुड़े होने का संदेह गहरा गया है। यह घटना भारत की आंतरिक सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की स्थिरता के लिए एक गंभीर विदेशी खतरे की ओर संकेत करती है। विशेषज्ञ इस पूरी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में विदेशी हस्तक्षेप को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं।
भारत में बड़ी आतंकी साजिश का भंडाफोड़ | Major Terror Plot Foiled in India
भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जिनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक शामिल है। इन सभी पर भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने का आरोप है और उन्हें यूएपीए (UAPA) तथा बीएनएस (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया है।
मुख्य आरोपी: मैथ्यू वेंडाइक और उसका संदिग्ध इतिहास इस मामले में सबसे प्रमुख नाम अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एररान वेंडाइक (Matthew VanDyke) का है। वेंडाइक का इतिहास काफी विवादित रहा है; उसे दुनिया के उन देशों में देखा गया है जहाँ अमेरिका और सीआईए (CIA) सत्ता परिवर्तन की कोशिशों में शामिल थे, जैसे लीबिया, सीरिया, इराक और वेनेजुएला। वह ‘संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नाम की एक संस्था चलाता है, जो दमनकारी सरकारों के खिलाफ लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण और सुविधाएं मुहैया कराती है। हालांकि वह खुद को एक पत्रकार और फ्रीडम फाइटर बताता है, लेकिन कई लोग उसे सीआईए का मोहरा मानते हैं।
साजिश का तरीका और पूर्वोत्तर भारत पर खतरा सूत्रों के अनुसार, ये विदेशी नागरिक दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता के हवाई अड्डों से गिरफ्तार किए गए। इनके खिलाफ मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं-
- अवैध प्रवेश: इन्होंने बिना अनुमति के भारत के प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) और रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (RAP) वाले क्षेत्रों (मिजोरम और मणिपुर जैसे पूर्वोत्तर राज्यों) में प्रवेश किया।
- आतंकी प्रशिक्षण और हथियार: ये लोग गुवाहाटी के रास्ते मिजोरम पहुंचे और वहां से म्यांमार की सीमा पार कर देश विरोधी तत्वों से मिले। वहां इन्होंने विद्रोहियों को यूरोप में बने ड्रोन उपलब्ध कराए और हथियारों की ट्रेनिंग दी।
- अस्थिरता फैलाने की कोशिश: इनका उद्देश्य भारत के संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वोत्तर राज्यों में अस्थिरता पैदा करना था, जो पहले से ही मणिपुर हिंसा और म्यांमार की सैन्य सरकार के कारण तनावपूर्ण है।
लेटेस्ट अपडेट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- न्यायिक हिरासत: एनआईए कोर्ट ने इन सातों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 16 मार्च को इन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था।
- डिजिटल जांच: इनके पास से बरामद मोबाइल फोनों को सर्ट-इन (CERT-In) एजेंसी को डेटा निकालने (Data Extraction) के लिए भेजा गया है ताकि इनके संपर्कों का पता लगाया जा सके।
- यूक्रेन और अमेरिका का रुख: यूक्रेन ने अपने नागरिकों की रिहाई की मांग शुरू कर दी है। वहीं, भारत में अमेरिकी राजदूत और अजीत डोभाल के बीच हाल ही में मुलाकात हुई है। ऐसी चर्चाएं हैं कि अमेरिका वेंडाइक की रिहाई के लिए भारत पर दबाव बना सकता है, जिसके बदले में भारत निखिल गुप्ता की रिहाई की मांग कर सकता है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बांग्लादेश में हालिया बदलावों और अमेरिका के भारत विरोधी बयानों के बीच पूर्वोत्तर में विदेशी नागरिकों की ऐसी गतिविधियां भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं। फिलहाल एनआईए इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की गहराई से जांच कर रही है।
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