खमनेई की मौत के बाद दहला मिडिल ईस्ट: ईरान का भीषण पलटवार | Middle East shaken by Khamenei’s death: Iran launches a fierce counterattack

Daily Current Affairs – खमनेई की मौत के बाद दहला मिडिल ईस्ट: ईरान का भीषण पलटवार और भारत पर इसके गहरे मायने

ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खमनेई की मौत ने पूरी दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ जिज्ञासा, सस्पेंस और युद्ध का खतरा एक साथ मंडरा रहा है। जहाँ एक ओर पश्चिमी जगत को यह अपेक्षा थी कि खमनेई के बाद ईरान कमजोर पड़ेगा या सरेंडर कर देगा, वहीं इसके विपरीत ईरान ने अपनी मिसाइलों से इजराइली आसमान को रंगीन कर दिया है।

ईरान का पलटवार: सरेंडर नहीं, संघर्ष का रास्ता

सूत्रों के अनुसार, खमनेई की मौत के बाद ईरान ने इजराइल के साथ-साथ मिडिल ईस्ट के उन सभी देशों में अमेरिकी बेसों पर हमले खोल दिए हैं जहाँ अमेरिका की मौजूदगी है। ईरान के राष्ट्रपति पजेष्कियन और वहां के जनरलों का रुख बेहद सख्त है। उनका कहना है कि वे पिछले 20 सालों से अमेरिका की युद्ध रणनीतियों का अध्ययन कर रहे थे और अब वे ‘मोजेक डिफेंस’ जैसी डिसेंट्रलाइज्ड रणनीतियों के साथ तैयार हैं। ईरान का स्पष्ट संदेश है कि खमनेई केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि एक विचार थे, जिसने जनता के बीच उबाल को और तेज कर दिया है।

नेतृत्व में बदलाव: कौन संभालेगा कमान?

खमनेई की मृत्यु के बाद ईरान ने आयतुल्लाह अली रेजी अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है। फिलहाल शासन चलाने के लिए एक तीन सदस्यीय परिषद बनाई गई है, जिसमें राष्ट्रपति, जुडिशियल चीफ हुसैन मोहसिन एज़ और अली अराफी शामिल हैं। हालांकि, ‘काउंसिल ऑफ एक्सपर्ट्स’ आने वाले कुछ दिनों में स्थायी सुप्रीम लीडर के नाम की घोषणा कर सकती है।

दुनिया भर में विरोध और भारत में प्रदर्शन

खमनेई की मौत की प्रतिक्रिया वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है:

  • भारत: जम्मू-कश्मीर के लाल चौक से लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर, बेंगलुरु और लेह-लद्दाख तक में शिया समुदाय द्वारा शोक सभाएं और विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। भारतीय राजनीति में भी इसकी गूंज है, जहाँ असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने इसे शांति वार्ता के बीच ‘कायराना हमला’ करार दिया है।
  • पाकिस्तान: यहाँ स्थिति और भी गंभीर है। कराची में अमेरिकी कंसुलेट और इस्लामाबाद में अमेरिकी एंबेसी पर प्रदर्शनकारियों ने हमले किए। खबरों के अनुसार, सुरक्षा में तैनात अमेरिकी मरीन कमांडो की फायरिंग में लगभग नौ लोगों की मौत हुई है।

अमेरिका का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’

अमेरिका ने इस स्थिति से निपटने के लिए ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया है। इसमें बी-2 स्टील्थ बॉम्बर्स (B-2 Stealth Bombers) का उपयोग किया जा रहा है ताकि ईरान की जमीन के नीचे छिपी मिसाइल टनल्स को निशाना बनाया जा सके। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन के तहत ईरान के नौ नौसैनिक जहाजों को डुबो दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस युद्ध में एआई (AI) टूल्स और पेंटागन द्वारा ‘क्लॉड’ (Claude) जैसे मॉडल्स के उपयोग की भी चर्चा हो रही है।

भारत के लिए चिंता का विषय: अर्थव्यवस्था और सुरक्षा

भारत के लिए यह संकट केवल राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक भी है:

  1. तेल की कीमतें: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर निर्भर है। ईरान द्वारा इस क्षेत्र में ब्लॉकेड करने या जहाजों को निशाना बनाने से भारत में महंगाई चरम पर पहुंच सकती है।
  2. रणनीतिक संबंध: प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में यूएई (UAE) के लीडर से बात की है, जिसे विशेषज्ञों द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
  3. आंतरिक सुरक्षा: भारत में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक बुलाई गई ताकि देश के भीतर किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

निष्कर्ष

ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह युद्ध खत्म होने तक अमेरिका से कोई बातचीत (Negotiation) नहीं करेगा। जहाँ अमेरिका इसे ‘रिजीम चेंज’ (Regime Change) का मौका मान रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और धार्मिक विचारधारा की लड़ाई बता रहा है। आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि क्या यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति की जीत होगी।


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