अमेरिका की ‘चार बड़ी हार’: क्या पुतिन और ईरान ने बदल दी वैश्विक कूटनीति की दिशा?

अमेरिका की ‘चार बड़ी हार’: क्या पुतिन और ईरान ने बदल दी वैश्विक कूटनीति की दिशा? | America’s ‘Four Major Defeats’: Have Putin and Iran Changed the Direction of Global Diplomacy?

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका की रणनीतिक साख पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। एक ओर जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालते ही रूस-यूक्रेन युद्ध को 24 घंटे में रुकवाने का दावा किया था, वहीं दूसरी ओर आज स्थिति यह है कि अमेरिका को न केवल रूसी तेल पर प्रतिबंधों से पीछे हटना पड़ा है, बल्कि वह मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों को सुरक्षा देने में भी विफल साबित हो रहा है।

विशेषज्ञ इसे “अमेरिका की चार बड़ी हार” के रूप में देख रहे हैं, जिसने व्लादिमीर पुतिन और ईरान को इस भू-राजनीतिक खेल में विजेता के रूप में स्थापित कर दिया है।

1. रूसी तेल पर प्रतिबंधों में ढील: पुतिन की कूटनीतिक जीत

अमेरिका ने हाल ही में दुनिया भर के देशों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति दे दी है। अमेरिकी प्रशासन के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट कंट्रोल’ (OFAC) ने एक जनरल लाइसेंस जारी किया है, जो 11 अप्रैल तक उस रूसी तेल को बेचने और खरीदने की इजाजत देता है जो 12 मार्च से पहले समुद्र में निकल चुका था।

यह कदम वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है, क्योंकि अमेरिका को डर है कि अगर रूसी तेल बाजार से पूरी तरह बाहर हुआ, तो कीमतें बेकाबू हो जाएंगी। इसे राष्ट्रपति पुतिन के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि जिस अर्थव्यवस्था को अमेरिका “डेथ ज़ोन” में पहुँचाना चाहता था, वह आज वैश्विक ऊर्जा बाजार को नियंत्रित कर रही है।

2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का नियंत्रण

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) का वर्चस्व है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी तेल का जहाज वहां से नहीं गुजर पाएगा।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका, जो अपनी नौसेना की शक्ति पर गर्व करता था, उसने स्वीकार किया है कि वह वहां से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा देने के लिए “तैयार नहीं है”। इस असुरक्षा के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $200 प्रति बैरल तक पहुँचने की आशंका जताई जा रही है।

3. बैंकिंग संकट: दुबई और कतर से पश्चिमी संस्थानों का पलायन

इजरायल द्वारा ईरान के ‘सेपा बैंक’ (Sepah Bank) पर किए गए साइबर हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी और यूरोपीय बैंकों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इसके परिणामस्वरूप:

  • सिटी बैंक (Citibank) ने यूएई में अपनी शाखाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं।
  • HSBC, डेलॉयट (Deloitte) और PwC जैसे बड़े संस्थान दुबई और कतर से अपने कर्मचारियों को हटा रहे हैं या उन्हें ‘वर्क फ्रॉम होम’ दे रहे हैं। ईरान की इस चेतावनी ने खाड़ी देशों की सुरक्षा रैंकिंग को गिरा दिया है और निवेशक अब सिंगापुर या हांगकांग जैसे सुरक्षित ठिकानों की ओर देख रहे हैं。

4. खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान

इस पूरे संघर्ष में सबसे दिलचस्प और दुखद पहलू यह है कि दुबई, कतर और कुवैत जैसे देश, जो इस युद्ध में सीधे शामिल नहीं हैं, सबसे ज्यादा आर्थिक कीमत चुका रहे हैं। पर्यटन और निवेश के वैश्विक केंद्र रहे इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं असुरक्षा के माहौल के कारण धराशायी हो रही हैं。

निष्कर्ष: एक ‘अविश्वसनीय’ साथी के रूप में अमेरिका

स्रोतों के अनुसार, अमेरिका की ये नीतियां और युद्ध न रुकवा पाने की विफलता उसे एक ‘कमजोर और अविश्वसनीय रिलायबल पार्टनर’ के रूप में सिद्ध कर रही हैं। खाड़ी देशों को अब यह समझ आने लगा है कि अमेरिका के भरोसे रहकर वे अपनी अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रहे हैं। फिलहाल, वैश्विक मंच पर पुतिन की डटे रहने की नीति और ईरान का आक्रामक रुख अमेरिका की रणनीतियों पर भारी पड़ता दिख रहा है।


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