Class 12 राजनीति विज्ञान Chapter 2 : दो ध्रुवीयता का अंत | The End of Bipolarity दो ध्रुवीयता का अंत: सोवियत संघ का विघटन और वैश्विक राजनीति का नया स्वरूप
परिचय
शीतयुद्ध के चरम दौर में बर्लिन की दीवार का खड़ा किया जाना विभाजन का सबसे बड़ा प्रतीक था। लेकिन 1989 में पूर्वी जर्मनी की आम जनता द्वारा इस दीवार को गिरा दिया जाना एक ऐसी ऐतिहासिक घटना थी, जिसने न केवल जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि ‘दूसरी दुनिया’ यानी सोवियत खेमे के अंत की शुरुआत भी कर दी। इसके परिणामस्वरूप शीतयुद्ध समाप्त हुआ और विश्व राजनीति में दो ध्रुवीयता का अंत हो गया।
सोवियत प्रणाली
एक परिचय समाजवादी सोवियत गणराज्य (USSR) रूस में 1917 की समाजवादी क्रांति के बाद अस्तित्व में आया था। यह प्रणाली पूंजीवादी व्यवस्था के विरोध में और समाजवाद के आदर्शों व समतामूलक समाज की जरूरत से प्रेरित थी। इसमें निजी संपत्ति की संस्था को समाप्त कर समाज को समानता के सिद्धांत पर रचने की कोशिश की गई थी। सोवियत राजनीति की धुरी कम्युनिस्ट पार्टी थी, जिसमें किसी अन्य दल या विपक्ष के लिए कोई जगह नहीं थी और पूरी अर्थव्यवस्था राज्य के नियंत्रण में थी।
विघटन के प्रमुख कारण सोवियत संघ जैसी महाशक्ति के अचानक बिखरने के पीछे कई गहरे कारण थे-
1. संस्थागत कमजोरी – सोवियत संघ की राजनीतिक और आर्थिक संस्थाएँ जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में विफल रहीं। कई सालों तक अर्थव्यवस्था गतिरुद्ध रही, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की भारी कमी हो गई।
2.हथियारों की होड़ – सोवियत संघ ने अपने संसाधनों का अधिकांश हिस्सा परमाणु हथियारों और सैन्य साजो-सामान पर खर्च किया, जिससे अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।
3. प्रशासनिक गतिरोध और भ्रष्टाचार – कम्युनिस्ट पार्टी का 70 सालों का शासन अब जनता के प्रति जवाबदेह नहीं रह गया था। भारी भ्रष्टाचार और गलतियों को सुधारने में असमर्थता ने आम जनता को शासन से अलग-थलग कर दिया।
4. गोर्बाचेव के सुधार – मिखाइल गोर्बाचेव ने 1980 के दशक के मध्य में ‘पेरेस्त्रोइका’ (पुनर्चरचना) और ‘ग्लासनोस्त’ (खुलापन) के माध्यम से सुधारों की कोशिश की। हालांकि, इन सुधारों ने जनता की अपेक्षाओं का ऐसा ज्वार उमड़ाया जिसे नियंत्रित करना असंभव हो गया।
5. राष्ट्रवाद का उदय – रूस, बाल्टिक गणराज्य (एस्टोनिया, लतविया, लिथुआनिया), यूक्रेन और जॉर्जिया जैसे देशों में राष्ट्रवादी भावनाओं और संप्रभुता की इच्छा का उभार विघटन का सबसे तात्कालिक कारण बना।
‘शॉक थेरेपी’ और इसके परिणाम साम्यवाद के पतन के बाद, सोवियत संघ के देशों को पूँजीवाद की ओर ले जाने के लिए विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा निर्देशित एक मॉडल अपनाया गया, जिसे ‘शॉक थेरेपी’ (आघात पहुँचाकर उपचार करना) कहा गया।
इसका परिणाम यह हुआ कि रूस का पूरा औद्योगिक ढांचा चरमरा गया और लगभग 90% उद्योगों को औने-पौने दामों पर निजी हाथों में बेच दिया गया, जिसे “इतिहास की सबसे बड़ी गराज-सेल” कहा जाता है।
रूसी मुद्रा ‘रूबल’ में भारी गिरावट आई और मुद्रास्फीति इतनी बढ़ी कि लोगों की जमापूँजी खत्म हो गई। समाज कल्याण की पुरानी व्यवस्था नष्ट हो गई और एक नया ‘माफिया वर्ग’ उभर आया।
विघटन की परिणतियाँ सोवियत संघ के अंत ने विश्व राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।
• शीतयुद्ध का अंत – वैचारिक विवाद समाप्त हो गया और हथियारों की होड़ रुक गई।
• एकध्रुवीय विश्व – अमेरिका एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा और उसकी पूँजीवादी अर्थव्यवस्था का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा हो गया।
• नए देशों का उदय – सोवियत संघ से अलग होकर कई नए स्वतंत्र देश बने, जिनमें से कई यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) का हिस्सा बनना चाहते थे। रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य स्वीकार किया गया और उसे सुरक्षा परिषद में सोवियत संघ की सीट मिली।
भारत और सोवियत संघ/रूस
भारत और सोवियत संघ/रूस के संबंध भारत और सोवियत संघ के संबंध हमेशा से गहरे रहे हैं। सोवियत संघ ने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों जैसे भिलाई और बोकारो इस्पात कारखानों में मदद की। राजनीतिक रूप से, सोवियत संघ ने कश्मीर मामले पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन किया और 1971 के युद्ध के दौरान भारत की सहायता की।
आज भी भारत की विदेश नीति में रूस के साथ संबंध एक महत्वपूर्ण पहलू हैं। भारत और रूस दोनों का सपना एक ‘बहुध्रुवीय विश्व’ का है, जहाँ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान बातचीत से हो और हर देश की स्वतंत्र विदेश नीति हो। भारत रूस के लिए हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है और रूस ने तेल संकट तथा अंतरिक्ष उद्योग (जैसे क्रायोजेनिक रॉकेट देना) में हमेशा भारत की मदद की है।
निष्कर्ष- सोवियत संघ का विघटन 20वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। इसने न केवल एक विचारधारा के अंत को दर्शाया, बल्कि विश्व को एक नई दिशा भी दी, जहाँ आर्थिक और राजनीतिक संबंध नए सिरे से परिभाषित हुए।
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