Strait of Hormuz Crisis: क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है? नाटो देशों और जापान की एंट्री से बढ़ा तनाव
कनाडा और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की सुरक्षा हेतु अमेरिका के साथ आने के घटनाक्रम का विश्लेषण किया है। शुरुआत में हिचकिचाने के बाद, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड और जापान जैसे देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और एलएनजी आपूर्ति के संकट को देखते हुए इस सैन्य गठबंधन का समर्थन किया है। चर्चा में यह भी बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने किस तरह ऐतिहासिक पर्ल हार्बर का संदर्भ देकर जापान पर कटाक्ष किया और वर्तमान तनाव की तुलना विश्व युद्ध जैसी स्थितियों से की। भारत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए लेखक ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वैश्विक नेताओं से संवाद कर कूटनीतिक शांति का मार्ग अपनाने पर बल दिया है। अंततः, यह स्रोत रेखांकित करता है कि आर्थिक मजबूरियों ने दुनिया के शक्तिशाली देशों को इस ईरान-अमेरिका संघर्ष में कूदने पर विवश कर दिया है।
हाइलाइट्स:
- स्टेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर।
- ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान समेत 7 देश अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग के लिए तैयार।
- वैश्विक तेल की कीमतें 60सेबढ़कर∗∗150 प्रति बैरल** तक पहुँचीं।
- डोनाल्ड ट्रंप का ‘पर्ल हार्बर’ वाला डार्क जोक चर्चा में।
मुख्य लेख:
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष अब एक वैश्विक युद्ध की आहट देने लगा है। स्टेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz), जिसे दुनिया की ‘तेल सप्लाई की नस’ कहा जाता है, को लेकर चल रहे तनाव में अब अमेरिका के साथ उसके नाटो (NATO) सहयोगी और जापान भी आधिकारिक रूप से शामिल हो गए हैं।
सहयोगी देशों का ‘यू-टर्न’: मजबूरी या रणनीति?
शुरुआत में, 14 मार्च तक जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने इसे ‘अमेरिका का निजी युद्ध’ बताते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि, 16 मार्च तक स्थिति पूरी तरह बदल गई। अब ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, जापान और कनाडा ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्टेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए सैन्य और कूटनीतिक सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है।
इन देशों के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह ऊर्जा संकट है। हाल ही में कतर की मुख्य रिफाइनरी पर हुए हमलों ने दुनिया की 20% एलएनजी (LNG) आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसके चलते तेल की कीमतें 60सेबढ़करसीधे∗∗150 प्रति बैरल** तक पहुँच गई हैं।
ऊर्जा के लिए अमेरिका पर निर्भरता
यूरोपीय देशों की बेबसी का एक बड़ा कारण रूस पर लगे प्रतिबंध हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप ने रूसी गैस पर निर्भरता कम कर दी और अमेरिका उनका मुख्य सप्लायर बन गया।
- यूरोप अपनी कुल गैस आवश्यकता का 40% हिस्सा अकेले अमेरिका से आयात कर रहा है।
- अनुमान है कि 2030 तक यूरोप की 80% एलएनजी आपूर्ति अमेरिका से होगी। ऐसे में हॉर्मुज के बाधित होने पर ट्रंप ने इन देशों को याद दिलाया कि उनके पास अमेरिका के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
जापान की स्थिति और ट्रंप का ‘पर्ल हार्बर’ जोक
जापान के लिए यह संकट अस्तित्व की लड़ाई जैसा है क्योंकि जापान का 95% तेल मिडिल ईस्ट से स्टेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते ही आता है। हाल ही में जापान की प्रधानमंत्री तकाईची ने जब व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की, तो ट्रंप ने एक विवादास्पद ‘डार्क जोक’ मारा। ट्रंप ने 1941 के पर्ल हार्बर हमले का जिक्र करते हुए कहा कि “सरप्राइज (अचानक हमले) के बारे में जापान से बेहतर कौन जान सकता है”। यह टिप्पणी दिखाती है कि वर्तमान भू-राजनीति में ऐतिहासिक कड़वाहटें अब भी मौजूद हैं।
भारत की भूमिका: कूटनीति का मोर्चा
इस भीषण तनाव के बीच भारत ने शांति का रास्ता चुना है। प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस, मलेशिया, जॉर्डन और कतर के राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत की है। भारत का मुख्य उद्देश्य स्टेट ऑफ हॉर्मुज को सुरक्षित रखना है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 40 से अधिक देशों पर निर्भर है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रोन ने तनाव कम करने के लिए भारत के राजनयिक प्रयासों की सराहना की है。
लेटेस्ट अपडेट: क्या यह विश्व युद्ध की शुरुआत है?
ताजा अपडेट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के F-35 विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। यदि आने वाले दिनों में सऊदी अरब, यूएई और बहरीन जैसे देश भी इस युद्ध में सीधे तौर पर कूदते हैं, तो यह संघर्ष एक पूर्ण विश्व युद्ध (World War III) का रूप ले सकता है।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत के जरिए हॉर्मुज का रास्ता खुलेगा या फिर ऊर्जा की यह जंग दुनिया को तबाह कर देगी।
- AI vs नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockades): 2030 तक होर्मुज़ संघर्ष रणनीति का पूर्वानुमान
- 2026 Semiconductor War: ताइवान अपनी सबसे स्मार्ट तकनीकी फैक्ट्रियां क्यों स्थानांतरित कर रहा है
- ₹5 लाख चेक बाउंस — वकील ने 10 दिन में पैसा वापस दिलवाया!
- India Hikes Gold & Silver Import Duty | सोना-चाँदी आयात शुल्क वृद्धि: Full Analysis
- क्या तलाक के दौरान पत्नी पति की संपत्ति पर दावा कर सकती है?