ईरान में विद्रोह की तैयारी? अमेरिका की नई ‘कुर्द’ रणनीति और उसके संभावित खतरे

Daily Current Affairs ईरान में विद्रोह की तैयारी? अमेरिका की नई ‘कुर्द’ रणनीति और उसके संभावित खतरे | Preparing for a Rebellion in Iran? America’s New ‘Kurdish’ Strategy and Its Potential Dangers

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के दौरान अमेरिका की नई सैन्य रणनीति का विश्लेषण करता है। इसमें बताया गया है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अमेरिकी सेना सीधे जमीनी युद्ध से बच रही है और इसके विकल्प के रूप में कुर्द लड़ाकों को हथियारबंद कर रही है। सीआईए द्वारा समर्थित इस योजना का उद्देश्य ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना और सरकार विरोधी विद्रोह को हवा देना है। लेख में कुर्दिस्तान की मांग करने वाले इन समूहों के इतिहास और उनके रणनीतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है। अंततः, यह चर्चा की गई है कि अमेरिका अपने स्वार्थ के लिए क्षेत्रीय ताकतों का उपयोग करने की अपनी पुरानी नीति को दोहरा रहा है।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया जानकारियों के अनुसार, अमेरिका ईरान के खिलाफ एक नई जमीनी रणनीति तैयार कर रहा है, जिसमें वह सीधे अपने सैनिकों को उतारने के बजाय कुर्द लड़ाकों (Kurdish fighters) को हथियारबंद कर विद्रोह भड़काने की योजना बना रहा है।

जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा है अमेरिका?

स्रोतों के अनुसार, अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर वायु सेना और मिसाइल तकनीक है, लेकिन जमीनी युद्ध में उसका अनुभव, विशेषकर अफगानिस्तान में, काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। ईरान की भौगोलिक स्थिति (Topography) भी अफगानिस्तान की तरह ही दुर्गम और पहाड़ी है। ईरान ने अपनी बैलेस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और परमाणु कार्यक्रम इन्हीं पहाड़ों के नीचे बनी सुरक्षित सुरंगों में छिपा रखे हैं, जहाँ अमेरिकी मिसाइलों की पहुँच सीमित है।

इसके अलावा, अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनाव भी एक बड़ा कारण हैं। राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं को एक “पीस प्रेसिडेंट” के रूप में देखते हैं और वे अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में डालकर घरेलू राजनीति में कोई नकारात्मक संदेश नहीं देना चाहते। इसलिए, अमेरिका अब ‘भाड़े के लड़ाकों’ या स्थानीय समूहों के जरिए ईरान के भीतर अस्थिरता फैलाना चाहता है।

कौन हैं कुर्द और अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

कुर्द दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा जातीय समूह है जिसके पास अपना कोई स्वतंत्र देश नहीं है। इनकी कुल आबादी लगभग 3.5 करोड़ है, जो मुख्य रूप से तुर्की, सीरिया, इराक और ईरान में फैले हुए हैं। ईरान में इनकी संख्या लगभग 80 लाख है, जो वहां की कुल आबादी का करीब 10% है।

ईरान में रहने वाले कुर्द मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमान हैं और वे शिया बहुल ईरान में खुद को अल्पसंख्यक और पीड़ित महसूस करते हैं। ऐतिहासिक रूप से भी कुर्दों का संघर्ष पुराना है। 1946 में उन्होंने ईरान के भीतर ‘महाबाद गणराज्य’ के रूप में एक छोटा स्वतंत्र देश बनाया था, लेकिन ईरानी सेना ने उसे एक साल के भीतर ही कुचल दिया और उनके नेता को फांसी दे दी थी। आज भी ये लड़ाके अपने स्वतंत्र ‘कुर्दिस्तान’ का सपना देख रहे हैं, जिसे अमेरिका भुनाने की कोशिश कर रहा है।

CIA की गुप्त योजना और ‘प्रॉक्सी’ वार

मीडिया रिपोर्ट्स (CNN, Reuters) का दावा है कि सीआईए (CIA) इराक के इरबिल में स्थित कुर्द नेताओं, जैसे मसूद बरजानी और बाफेल तलाबानी, के संपर्क में है। योजना यह है कि इन लड़ाकों को आधुनिक हथियार और खुफिया जानकारी (Intelligence) प्रदान की जाए ताकि वे ईरान के भीतर प्रवेश कर वहां की सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह शुरू कर सकें।

यदि कुर्द ईरान के भीतर मोर्चा खोलते हैं, तो ईरान को अपनी जमीनी सेना को वहां मोबिलाइज करना होगा। इससे ईरान का ध्यान इजरायल और अन्य अंतरराष्ट्रीय मोर्चों से हट जाएगा और वह आंतरिक गृहयुद्ध जैसी स्थिति में उलझ जाएगा।

इतिहास की चेतावनी: क्या यह एक नया खतरा है?

स्रोतों में यह गंभीर चिंता जताई गई है कि अमेरिका का यह कदम भविष्य में घातक साबित हो सकता है। इतिहास गवाह है कि अमेरिका ने अतीत में सोवियत संघ के खिलाफ तालिबान और अल-कायदा जैसे समूहों को खड़ा किया था, जो बाद में खुद दुनिया और अमेरिका के लिए ही सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती बन गए।

यद्यपि अमेरिकी विदेश मंत्रालय वर्तमान में इन खबरों का खंडन कर रहा है, लेकिन क्षेत्र की बदलती हलचलें कुछ और ही संकेत दे रही हैं। क्या अमेरिका ईरान को कमजोर करने के चक्कर में एक और ‘भस्मासुर’ तैयार कर रहा है? यह आने वाला वक्त ही बताएगा


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